Tuesday, June 1, 2021

Health Tips: इन सब्जियों को भूलकर भी कच्चा न खाएं, हो सकती है परेशानी

<p style="text-align: justify;">कई लोग सेहतमंद रहने के लिए कुछ सब्जियों को भी सलाद की तरह कच्चा खाते हैं. हालांकि सलाद और कुछ कच्ची सब्जियां भी स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कई फल और सब्जियों को कच्चा खाने से आपको नुकसान भी हो सकता है. यहां तक कि आपको कई बीमारियां भी हो सकती हैं. कई कच्ची सब्जियों और फलों को पचाने में भी बहुत मुश्किल होती है. ऐसे में ये सब्जियां पेट में इंफेक्शन भी पैदा कर देती हैं. आइये जानते हैं कौन से फल सब्जियां आपको कच्चे ( Raw Form ) नहीं खाने चाहिए.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>1- पत्ता गोभी, गोभी और ब्रोकली-</strong> आपको गोभी फैमिली की सब्जियों को गलती से भी कच्चा नहीं खाना चाहिए. कई लोग सलाद में ब्रोकली और पत्ता गोभी खा लेते हैं. लेकिन इससे आपके पेट में गैस और अपच की समस्या हो सकती है. कुछ लोग फूल गोभी को भी कच्चा खा लेते हैं. जो नुकसान दायक है. दरअसल में इन सब्जियों में एक तरह की शुगर होती है जो बिना पकाए पेट में घुलती नहीं है. इसलिए इन्हें पका कर खाने की सलाह दी जाती है. &nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>2- मशरूम-</strong> कुछ लोग सलाद के रुप में कच्चा मशरूम भी खाते हैं. लेकिन ये गलत है मशरूम को पका कर खाने से भरपूर पोषक तत्व मिलते हैं. इसे आप ग्रिल करके भी खा सकते हैं. ग्रिल की हुई मशरूम में पोटेशियम की मात्रा बढ़ जाती है. आपको मशरुम को अच्छी तरह से धोकर हमेशा पका कर ही खाना चाहिए.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>3- ग्वार की फलियां-</strong> ग्वार की फलियों में अमीनो एसिड होता है इसलिए इन्हें कच्चा खाने से शरीर में कई तरह के नुकसान हो सकते हैं. आपको कभी भी ग्वार की फलियों को कच्चा नहीं खाना चाहिए. आप इन्हें पहले अच्छी तरह से धोकर और पका कर ही खाएं. इस तरह आपको स्वाद और फायदे दोनों मिलेंगे.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>4- राजमा और बीन्स-</strong> अगर आप कच्चा राजमा या बीन्स खाते हैं तो इससे आपको उल्टी और दस्त जैसी परेशानी हो सकती है. इसलिए राजमा या बीन्स को कभी भी बिना पकाए नहीं खाना चाहिए. कच्ची बीन्स में काफी टॉक्सिन, ग्लाइकोप्रोटीन लेक्टिन होता है. जबकि राजमा में काफी मात्रा में लेक्टिन होती है जो बिना पके शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>5- बैंगन और आलू-</strong> कच्चा बैंगन और आलू आपको कच्चे नहीं खाने चाहिए. इससे आपके पेट को नुकसान पहुंचा सकता है. कच्चा बैंगन खाने से उल्टी, चक्कर आना या पेट में ऐंठन की समस्या हो जाती है. बैंगन में पाया जाने वाला सोलनिन न्यूरोलॉजिकल और गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल से गैस की समस्या होने लगती है वहीं कच्चे आलू में सोलानाइन नामक टॉक्सिन होता है. जो पेट में जाकर गैस, उल्टी, सिर दर्द और पाचन संबंधी दिक्कत पैदा करता है. इसलिए आलू और बैंगन को हमेशा पका कर ही खाना चाहिए.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://ift.tt/3vEWzCl" target="_blank" rel="noopener">कोविड-19 वैक्सीन लगवाने पर इस जगह है लकी ड्रा जीतने का मौका, इनाम में हैं महंगे सामान</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3i8gGVN

HEALTH UPDATE: चावल का पानी रखेगा आपके शरीर को हाइड्रेट और पेट को साफ - bhaskarhindi.com


,दिल्ली। भारत एक ऐसा देश हैं, जहां लोग ब्रेड या हल्की-फुल्की चीजें खाकर लोग अपना जीवन-यापन नहीं करते है। बल्कि भारतीय लोगों को तेज मसालें और चावल-रोटी खाने की आदत होती है। लेकिन क्या आप जानतें हैं कि, जिस चावल को बनाते वक्त आप उसका पानी निकाल देते हैं, उस पानी में कितने गुण पाए जाते है। दरअसल, वो पानी आपकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। इस पानी के सेवन से आपका शरीर हाइड्रेट रहता है। साथ ही आपके पेट को साफ करने में भी मदद करता है। हालांकि, भारत के घर-घर में हर रोज खाने में चावल और दाल जरुर बनाया जाता है। क्योंकि चावल ज्यादातर लोगों का फेवरेट खाने में से एक होता है। बता दें कि, देश के कई हिस्सों में चावल के पानी को मांड भी कहा जाता है। आइए बतातें हैं चावल के पानी के फायदें-

चावल में कई तरह के पौष्टिक तत्व होते हैं, जो आपके शरीर को मजबूत बनाने का काम करते है। अगर आप अपने शरीर को हाइड्रेट रखना चाहते हैं, तो चावल का पानी आपके लिए रामबाण का काम कर सकता है। इस पानी को पीने से आपके शरीर में कई तत्वों की कमी दूर होती है साथ ही आपको कमजोरी महसूस नहीं होती है। अगर आपको बीपी यानि कि ब्लड प्रेशर की परेशानी हैं तो, आप चावल के पानी का इस्तेमाल कर सकते हैं। जी हां, इस पानी में सोडियम की भरपूर मात्रा पाई जाती है और जब आप इसका सेवन करते हैं तो, ये आपके ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में मददगार साबित होता है। इसलिए ये उन लोगों को लेना चाहिए जो अपना बीपी कंट्रोल करना चाहते है। 

अगर आपको ज्यादातर पेट में समस्या बनी रहती हैं तो चावल के पानी का इस्तेमाल करें। दरअसल इसके पानी का सेवन करने से आपके डाइजेशन सिस्टम में सुधार आता है। साथ ही आपको गैस और कब्ज जैसी समस्या से राहत मिलती है। इसलिए पेट साफ करने का घरेलू नुस्खा हैं चावल के पानी का सेवन करना। इसका पानी आपकी सेहत ही नहीं बल्कि आपके चेहरे और बालों के लिए रामबाण माना जाता है। दरअसल, मांड में खनिज, विटामिन्स, अमीनो एसिड और एंटी ऑक्सडेंट्स फेरुलिक एसिड की अच्छी-खासी मात्रा पाई जाती है। अगर आप अपने चेहरे की चमक बढ़ाना चाहते हैं तो आपको इसका उपयोग करना चाहिए। त्वचा को मुलायम रखना हो या सूखी त्वचा को ठीक करना हो या कील-मुंहासे की समस्या हो आप चावल के पानी का इस्तेमाल कर सकते है। 

आपके शरीर में कमजोरी को दूर करने के साथ-साथ मांड आपके शरीर को एनर्जी भी प्रदान करता है। दरअसल, चावल में कार्बोहाइड्रेट भरपूर मात्रा में पाई जाती है। तो जाहिर सी बात हैं इसके पानी में भी कार्बोहाइड्रेट होगा। इस वजह से ये आपके शरीर में ऊर्जा प्रदान करने के अच्छे सोर्सेज में से एक होता है। अगर सुबह इसे पीया जाए तो, ये एनर्जी बूस्टर का काम कर सकता है। स्वस्थ्य रहने के लिए आप चावल के पानी को अपने रुटीन डाइट के तौर पर इस्तेमाल कर सकते है। 




.
...

.
.
.
https://ift.tt/3fWr1l6

Fungal Infection: कोरोना से रिकवर होने के बाद, अब एक और नया फंगल इंफेक्शन हो रहा है घातक, जानिए लक्षण

<p style="text-align: justify;">कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने लोगों को डरा दिया है. हालांकि अब हालात पहले से काफी बेहतर हो गए हैं. लेकिन अब कोरोना से रिकवर होने के बाद होने वाल फंगल इंफेक्शन ने लोगों को डरा दिया है. ब्लैक फंगस के बाद अब कोरोना के मरीजों में कई तरह के दूसरे फंगल इंफेक्शन भी देखने को मिल रहे हैं. मरीजों को तरह-तरह के इंफेक्शन से जूझना पड़ रहा है. अब एक और फंगस ने पैर पसारना शुरु कर दिया है. जिसे एस्परजिलोसिस (Aspergillosis) कहते हैं. गुजरात में इसके मामले ज्यादा देखने को मिले हैं. ये इंफक्शन भी कोरोना से रिकवरी के बाद हो रहा है. जानते हैं एस्परजिलोसिस इंफेक्शन के लक्षण क्या हैं.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>एस्परजिलोसिस क्या है-</strong> एस्परजिलोसिस एक फंगल संक्रमण है. ये फंगस हमारे आसपास के वातावरण में ही मौजूद होता है लेकिन जिनकी इम्यूनिटी मजबूत होती है उन्हें ये नुकसान नहीं पहुंचाता है. हालांकि कमजोर लोगों या फेफड़ों में संक्रमण वाले व्यक्ति की सांस के जरिए ये शरीर के अंदर जाकर एलर्जी पैदा करता है. इसकी गंभीरता इससे भी समझी जा सकती है कि ये रक्त वाहिकाओं और उससे आगे भी फैल सकता है. ये एस्परजिलोसिस अलग अलग तरह से शरीर को प्रभावित करता है. ऐसे में ये अहम है कि आपको किस तरह के एस्परजिलोसिस से संक्रमण हुआ है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>एस्परजिलोसिस संक्रमण के लक्षण&nbsp;</strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong>सांस लेने में परेशानी-</strong> अगर आपको सांस लेने में तकलीफ हो रही है तो ये इंफेक्शन के संकेत हो सकते हैं. ये फंगस फेफड़ों तक पहुंचने के बाद टिश्यूज को नुकसान पहुंचाना शुरू करता है. जिससे सांस लेने मे तकलीफ होती है. इससे समझ जाएं कि इंफेक्शन फेफड़ों तक पहुंच गया है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>बुखार और ठंड लगना-</strong> कोरोना के शुरुआती लक्षण भी बुखार और ठंड लगना ही है. ऐसे में अगर आप कोरोना संक्रमण से पूरी तरह ठीक हो चुके हैं इसके बाद भी आपको बुखार आए तो ये फंगल इंफेक्शन के संकेत हो सकते हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>खांसी में खून आना-</strong> अगर ये संक्रमण आपके फेफड़ों में पहुंच गया है तो आपको लगातार खांसी बनी रहेगी. कई लोगों को खांसी के साथ थोड़ा खून भी आ सकता है.<br />&nbsp;<br /><strong>सिर और आंखों में दर्द-</strong> फंगस नाक से शरीर में जाता है. ये मुख्य रूप से साइनस, फेफड़ों में संक्रमण पहुंचाता है. फिर ये फंगस दिमाग की ओर बढ़ने लगता है. जिससे सिर और आंखों में दर्द बना रहता है.<br />&nbsp;<br /><strong>थकान और कमजोरी- &nbsp;</strong>वैसे तो कोरोना के बाद काफी कमजोरी और थकान रहती है लेकिन अगर आपको किसी तरह का इंफेक्शन है तो ये और ज्यादा बढ़ जाती है. यहां तक कि आपको रोजमर्रा के काम करने में भी तकलीफ होती है.&nbsp;<br />&nbsp;<br /><strong>स्किन पर इंफेक्शन-</strong> फंगल इंफेक्शन का असर कई मामलों में त्वचा पर भी हो रहा है. इससे स्किन में जलन, लालिमा, सूजन और फुंसी होने की समस्या हो सकती है. पूरे समय स्किन पर खुजली भी हो सकती है.&nbsp;<br />&nbsp;<br /><strong>एस्परजिलोसिस की पहचान-</strong> एस्परजिलोसिस की पहचान थोड़ी मुश्किल है हालांकि डॉक्टर बायोप्सी, ब्लड टेस्ट, चेस्ट एक्स-रे, सीटी और फेफड़ों का स्कैन कराने के बाद इसकी पहचान कर लेते हैं.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>एस्परजिलोसिस का इलाज-</strong> किसी भी फंगल इंफेक्शन के बारे में जितना जल्दी हो सके पता चल जाए, उतना ही अच्छा है. हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार इसका इलाज भी ब्लैक और व्हाइट फंगस की तरह ही किया जाता है. बॉडी में ज्यादा इंफेक्शन फैलने पर सर्जरी भी करनी पड़ती है.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;">&nbsp;</p> lifestyle https://ift.tt/34CU1J7

कोविड-19 वैक्सीन लगवाने पर इस जगह है लकी ड्रा जीतने का मौका, इनाम में हैं महंगे सामान

<p style="text-align: justify;">गैर सरकारी संगठनों के समूह ने लोगों में वैक्सीन संकोच दूर करने और टीकाकरण अभियान को बढ़ावा देने का अनोखा रास्ता निकाला है. उसके लिए वैक्सीन को न सिर्फ मुफ्त रखा गया है बल्कि अगर आप भाग्यशाली हुए तो इनाम में सोने के सिक्के, बाइक, वाशिंग मशीन और कई घरेलू सामान भी जीत सकते हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>वैक्सीन लगवाने पर आकर्षक इनाम जीतने का मौका</strong>&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;">चेन्नई शहर से करीब 50 किलोमीटर दूर दर्शनीय मछुआरों की बस्ती कोवालम है. 16,000 से ज्यादा लोगों की बस्ती का मुख्य पेशा मछली पकड़ना, पर्यटन और वाटर स्पोर्ट्स है. हालांकि, गांव के लिए जिंदगी आसान नहीं रही है और उसके निवासियों पर महामारी का जबरदस्त प्रभाव पड़ा. लोगों के मुताबिक, उनके गांव में कोविड-19 के बहुत ज्यादा मामले नहीं थे, लेकिन उनकी आजीविका को नुकसान पहुंचा. पर्यटकों का आना रुक गया, स्पोर्ट्स गतिविधियों पर पाबंदी लगा दी गईं और सर्फिंग त्योहार को आयोजित करने का कोई जरिया नहीं रहा जिससे गांव में भीड़ को आकर्षित किया जा सके. सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही गलत सूचनाओं और अफवाहों ने भी स्थिति को बिगाड़ने का काम किया.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>टीकाकरण को बढ़ावा देने की अनोखी तरकीब</strong></p> <p style="text-align: justify;">हालांकि, इस स्थिति में गैर सरकारी संगठनों ने लोगों की मुसीबत कम करने का सबसे बड़ा काम किया. गांव में महामारी के दौरान हेल्पलाइन की स्थापना की गई और लोगों की जरूरतों का किराना सामान, मास्क, इम्यूनिटी बूस्टर घर-घर पहुंचाया गया.&nbsp;लोगों का कहना है कि जब वैक्सीन मुहैया हो गई, तो गांववालों ने वैक्सीन लगवाने से इंकार कर दिया. उनके लिए पात्र लोगों का टीकाकरण के लिए रजिस्ट्रेशन कराना टेढ़ी खीर साबित हुआ. उस वक्त उनके मन में एक विचार आया कि क्यों न वैक्सीन मुफ्त में उपलब्ध कराई जाए बल्कि उनकी जिंदगी में खुशी लाने का कुछ अलग प्रयास भी किया जाए. उन प्रयासों में से एक प्लेट बिरयानी, नए ब्रांड की बाइक, सोने के सिक्के, वाशिंग मशीन के अलावा घरेलू सामान भी हो सकते हैं.</p> <p style="text-align: justify;">सीएन रामदास और शिराज ट्रस्ट के साथ साझेदारी में एसटीएफ फाउंडेशन ने गांव में टीकाकरण अभियान को धार देने के लिए दो तरफा रणनीति बनाई. पहला अल्पकालीन प्रोत्साहन जैसे मोबाइल फोन रिचार्ज और एक प्लेट बिरयानी और दूसरा दीर्घकालीन बंपर प्राइज जैसे लकी ड्रा में आकर्षक इनाम की पेशकश की गई. गांववालों को टीकाकरण केंद्र तक लाने और पहुंचाने की भी सुविधा मुफ्त दी गई. वैक्सीन लगवाने वाले शख्स को एक टोकन और रसीद से प्रावधान किया गया कि बाद में उसका इस्तेमाल बंपर लकी ड्रा के लिए हो सके.&nbsp;गैर सरकारी संगठनों की मुहिम रंग लाई और 6400 पात्र लोगों में से 640 का सफलतापूर्वक रजिस्ट्रेशन किया जा चुका.</p> <p style="text-align: justify;">उसके अलावा, 200 से ज्यादा लोगों को कोविड-19 वैक्सीन की पहली डोज लगाई जा चुकी है. गैर सरकारी संगठनों को उम्मीद है कि गांव में आकर्षक इनाम की खबर फैलने के साथ रजिस्ट्रेशन करानेवालों की संख्या में इजाफा होगा और जल्द से जल्द पात्र पूरी आबादी का टीकाकरण किया जा सकेगा. लोगों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है ताकि टीकाकरण के लिए उनकी लिस्ट बनाई जा सके. वर्तमान में रोजाना 100 डोज लगाए जा रहे हैं और संख्या आगे बढ़ने की उम्मीद है. साझेदार गैर सरकारी संगठन और स्वास्थ्य विभाग खूबसूरत तटीय बस्ती और सर्फिंग हॉटस्पॉट को मॉडल टीकाकरण गांव होने के नाते नक्शे पर जगह देने का मंसूबा बना रहा है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Exercise Benefits: जब आपको डायबिटीज की बीमारी हो, तो जानिए व्यायाम के महत्व" href="https://ift.tt/3pbMvi6 Benefits: जब आपको डायबिटीज की बीमारी हो, तो जानिए व्यायाम के महत्व</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="आखिर क्यों उम्र में खुद से बड़ी महिलाओं की ओर आकर्षित होते हैं पुरुष, जानिए वो 9 कारण" href="https://www.abplive.com/entertainment/why-younger-men-like-older-women-as-their-partner-know-reasons-1921319">आखिर क्यों उम्र में खुद से बड़ी महिलाओं की ओर आकर्षित होते हैं पुरुष, जानिए वो 9 कारण</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3vEWzCl

Cancer symptoms: पांव पर इस तरह के संकेत बढ़ते हुए स्किन ट्यूमर का बता सकते हैं पता, जानें

<p style="text-align: justify;">अमेरिकन एकेडमी ऑफ डरमेटोलोजी एसोसिएशन ने चेताया है कि स्किन का कैंसर अक्सर दिखाई देने से पहले फैलता है. मेलेनोमा के नाम से जाना जानेवाला ये आमतौर पर स्किन कैंसर का सबसे गंभीर प्रकार भी होता है. मेलेनोमा खतरनाक हो सकता है, लेकिन जल्दी पता लगने से स्किन कैंसर ज्यादातर इलाज योग्य है. पांव का घाव बीमारी के खतरे को बढ़ा सकता है. डॉक्टर पैरों के तलवे, पैर की अंगुली के नाखून, अंगूठे के बीच और पांव के किनारे पर देखने की सलाह देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं तलाश क्या किया जाए?</p> <p style="text-align: justify;">मेलेनोमा का एक संकेत पैर की अंगुली के नाखुन के नीचे भूरी या काली खड़ी रेखा है.&nbsp;कैंसर का दूसरा संकेत पांव पर कहीं गुलाबी-लाल धब्बा या वृद्धि हो सकता है. पांव के किसी हिस्से पर एक बार होनेवाले घाव, नया धब्बा या विकास से सावधान रहें. विशेषज्ञों का कहना है कि कभी-कभी पांव पर मेलेनोमा से दर्द होता है, खून बहता है या खुजली होती है, लेकिन हमेशा नहीं.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>मेलेनोमा क्यों खतरनाक होता है?</strong></p> <p style="text-align: justify;">नेशनल हेल्थ सर्विस का कहना है कि मेलेनोमा शरीर के अन्य अंगों तक फैल सकता है. मेलेनोमा न सिर्फ पांव पर हो सकता है बल्कि स्किन पर कहीं भी नजर आ सकता है. पुरुषों में मेलेनोमा की सबसे आम जगह उनकी पीठ होती है, महिलाओं में ये पांव पर होता है.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>मेलेनोमा का खतरा बढ जाता है अगर:</strong></p> <ul style="text-align: justify;"> <li>अगर आपमें बहुत ज्यादा तिल या झाइयां हों</li> <li>आपने त्वचा ऐसी बना ली है जो आसानी से जल जाती है</li> <li>आपके लाल या सुनहरे बाल हैं</li> <li>मेलेनोमा वाले पारिवारिक करीबी सदस्य से संबंध हो&nbsp;</li> </ul> <p style="text-align: justify;">नेशनल हेल्थ सर्विस ने सावधान किया है कि हाल के वर्षों में ब्रिटन में स्किन कैंसर बहुत ज्यादा आम हो गया है. कैंसर के अन्य प्रकार की तुलना में स्किन कैंसर का सबसे घातक प्रकार '​मेलेनोमा भी 50 की उम्र से नीचे के लोगों में आम तौर से पाया जाता है. वास्तव में युवाओं के बीच चार कैंसर के मामलों में से एक का ज्यादा पता चलता है. खतरनाक बीमारी ब्रिटेन में हर साल करीब 2,300 लोगों की जिंदगी छीन लेती है. लिहाजा, अगर आप कोई असामान्य निशान या तिल अपने शरीर पर देखते हैं, तो सबसे पहला काम डॉक्टर से मुलाकात है. अगर विशेषज्ञ को अतिरिक्त जांच की जरूरत लगे, तो आपको आगे के इलाज की सिफारिश की जा सकती है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="आखिर क्यों उम्र में खुद से बड़ी महिलाओं की ओर आकर्षित होते हैं पुरुष, जानिए वो 9 कारण" href="https://www.abplive.com/entertainment/why-younger-men-like-older-women-as-their-partner-know-reasons-1921319">आखिर क्यों उम्र में खुद से बड़ी महिलाओं की ओर आकर्षित होते हैं पुरुष, जानिए वो 9 कारण</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Exercise Benefits: जब आपको डायबिटीज की बीमारी हो, तो जानिए व्यायाम के महत्व" href="https://ift.tt/3pbMvi6 Benefits: जब आपको डायबिटीज की बीमारी हो, तो जानिए व्यायाम के महत्व</a></strong></p> <p style="text-align: justify;">&nbsp;</p> lifestyle https://ift.tt/3wNbkmZ

ये ओरल दवा कोविड-19 की गंभीरता को कर सकती है कम, सस्ती होने के साथ हैं और फायदे

<p style="text-align: justify;">किफायती, आसानी से उपलब्ध सूजन रोधी ओरल दवा कोविड-19 के मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत और कुछ में मौत के खतरे को कम कर सकती है. कोरोना वायरस की संक्रामक दूसरी लहर के बीच विशेषज्ञों ने रिसर्च के हवाले से बड़ा दावा किया है. कोरोना वायरस आम तौर से शरीर में नाक, मुंह, आंख के जरिए दाखिल होता है और लंग्स पर सीधे हमला करता है जिससे सांस लेने में गंभीर समस्या होती है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कोविड-19 के खिलाफ ओरल दवा पर बड़ा दावा</strong></p> <p style="text-align: justify;">वर्तमान में कोल्चिसीन नामक दवा फेमिलियल मेडीट्रेनियन फीवर, गठिया और पेरिकार्डिटिस के इलाज में लिखी जाती है. वैज्ञानिक पत्रिका दि लांसेट रेस्पेरेट्री मेडिसीन में प्रकाशित नतीजों से खुलासा हुआ कि दवा को जटिलता के खतरे वाले लोगों में इलाज के तौर पर समझा जा सकता है. आपको बता दें कि फेमिलियल मेडीट्रेनियन फीवर एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें बार बार बुखार आता है और साथ में पेट, जोड़ो में दर्द के अलावा सूजन भी होता है.&nbsp;मोंट्रियाल हार्ट इंस्टीट्यूट रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर जीन क्लाउड टार्डिफ ने कहा, "वर्तमान महामारी को देखते हुए टीकाकरण से सामूहिक इम्यूनिटी का इंतजार, कोविड-19 से संक्रमित होनेवाले मरीजों के बीच बीमारी की जटिलताओं को रोकने के लिए इलाज की जरूरत है." उन्होंने ये भी कहा, "हमारे रिसर्च में पता चला कि कोल्चिसीन का इस्तेमाल कोविड-19 से संक्रमित कुछ मरीजों की जटिलताओं के खतरे को कम करने के लिए किया जा सकता है." शोधकर्ताओं ने कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, अमेरिका और कनाडा में मानव परीक्षण के लिए प्लेसेबो और ओरल दवा का इस्तेमाल किया.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत कर सकती है कम</strong></p> <p style="text-align: justify;">उन्होंने परीक्षण शुरू करने के समय कोविड-19 से पीड़ित 40 पार उम्र वाले 4,488 मरीजों को शामिल किया. उनमें कम से कम कोविड-19 की जटिलता बढ़ानेवाला एक जोखिम कारक जैसे डायबिटीज, हाइपरटेशन, मोटापा की पहचान हुई. मरीजों को बेतरतीब तीन दिनों तक रोजाना और उसके बाद रोजाना एक बार 0.5 मिलीग्राम कोल्चिसीन का इस्तेमाल कराया गया और एक ग्रुप को 30 दिनों तक प्लेसेबो दिया गया. नतीजों से पता चला कि जिन लोगों में पीसीआर टेस्ट से कोविड-19 संक्रमण की पुष्टि हुई थी, दवा के इस्तेमाल से कोविड-19 के लिए अस्पताल में भर्ती होने या मौत दोनों का खतरा करीब 25 फीसद कम हो गया. बीमारी का कम से कम एक जोखिम कारक वाले 40 से ज्यादा की उम्र पर पुरुषों में सबसे स्पष्ट फायदा देखा गया, जिनको कोविड-19 से होनेवाली जटिलताओं का महिलाओं के मुकाबले ज्यादा खतरा है. कोल्चिसीन ग्रुप के 4.9 फीसद मरीजों में प्रतिकूल प्रभाव दर्ज किए गए जबकि प्लेसेबो ग्रुप में प्रतिकूल प्रभाव का सामना करनेवाले मरीजों की संख्या 6.3 फीसद रही. शोधकर्ताओं ने हालांकि ये भी कहा कि नतीजे अंतिम निष्कर्ष नहीं हैं और आगे रिसर्च करने की जरूरत है.</p> <p><strong>Disclaimer: </strong><strong>इस आर्टिकल में बताई विधि</strong><strong>, </strong><strong>तरीकों व दावों की एबीपी न्यूज़ पुष्टि नहीं करता है. इनको केवल सुझाव के रूप में लें. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.</strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="आखिर क्यों उम्र में खुद से बड़ी महिलाओं की ओर आकर्षित होते हैं पुरुष, जानिए वो 9 कारण" href="https://www.abplive.com/entertainment/why-younger-men-like-older-women-as-their-partner-know-reasons-1921319">आखिर क्यों उम्र में खुद से बड़ी महिलाओं की ओर आकर्षित होते हैं पुरुष, जानिए वो 9 कारण</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Exercise Benefits: जब आपको डायबिटीज की बीमारी हो, तो जानिए व्यायाम के महत्व" href="https://ift.tt/3pbMvi6 Benefits: जब आपको डायबिटीज की बीमारी हो, तो जानिए व्यायाम के महत्व</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/2RfgCIU

Shani Jayanti 2021: शनि जयंती कब? जानें शनिदेव की कृपा पाने के उपाय, पूजा विधि व महत्व

<p style="text-align: justify;"><strong>Shani Jayanti 2021 Upay Puja Vidhi: </strong>हिंदू पंचांग के अनुसार, शनि देव को न्याय का देवता कहा गया है. वे व्यक्ति को उनके कर्मों के अनुसार कर्मफल देने वाले देवता हैं. अच्छे कर्म करने वालों पर<strong> &nbsp;</strong>शनि देव की कृपा बनी रहती है और उनकी सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती है. जबकि बुरे कर्म करने वाले को शनिदेव कठोर दंड देते है. शनि देव की कुदृष्टि से व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. &nbsp;</p> <p style="text-align: justify;">हिंदू धर्म में शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए पूजा विधि का वर्णन किया गया है. जब शनि जयंती परशनिदेव की विधि विधान से पूजा की जाती है तो शनिदेव की कृपा भक्त पर होती है. पंचांग के अनुसार शनि जयंती हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाई जाती है अंगेजी कैलेंडर के अनुसार इस साल शनि जयंती 10 जून को मनाई जायेगी. मान्यता है इस दिन शनिदेव की विधि पूर्वक उपासना करने से उनके कुप्रभाव को कम किया जा सकता है.</p> <div class="uk-grid-collapse uk-grid" style="text-align: justify;"> <div class="uk-width-3-5 fz20 p-10 newsList_ht uk-first-column"><a href="https://ift.tt/34v3nH1 Ekadashi 2021: सभी पापों से मुक्ति के लिए इस विधि से करें अपरा एकादशी का व्रत, जानें पूजन सामग्री की पूरी लिस्ट</strong></a></div> </div> <p style="text-align: justify;"><strong>शनि</strong> <strong>जयंती</strong> <strong>पर</strong> <strong>बन</strong> <strong>रहें</strong> <strong>हैं</strong> <strong>दो</strong> <strong>शुभ</strong> <strong>योग</strong></p> <p style="text-align: justify;">ज्योतिष शास्त्र की गणनाओं के मुताबिक़, साल 2021 में शनि जयंती के दिन शूल व धृति योग बन रहे हैं. ये योग बहुत शुभ मानें गए हैं. मान्यता है कि इस शुभ योग में शुभ व मांगलिक कार्य किए जाते हैं. शूल व धृति योग जैसे शुभ योग में किये जाने वाले कार्यों में सफलता मिलती है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>शनि</strong> <strong>जयंती</strong> <strong>शुभ</strong> <strong>मुहूर्त</strong></p> <p style="text-align: justify;">ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि 09 जून को दोपहर 1 बजकर 57 मिनट से शुरू होगी, जोकि 10 जून को शाम 04 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगी.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>शनिदेव</strong> <strong>को</strong> <strong>प्रसन्न</strong> <strong>करने</strong> <strong>के</strong> <strong>उपाय</strong></p> <ul style="text-align: justify;"> <li>शनि दोष से पीड़ित जातक को हर शनिवार के दिन शनिदेव के मंत्र &lsquo;ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्&zwj;चराय नम:&rsquo; का जाप करना चाहिए.</li> <li>शनिवार के दिन प्रातः काल स्नान आदि करके पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाना और शाम को दीपक जलाना शुभ माना जाता है.</li> <li>शनि दोष को शांति करने के लिए प्रतिदिन महामृत्युंजय मंत्र या 'ॐ नमः शिवाय' का जाप और सुंदरकाण्ड का पाठ करना चाहिए. इससे शनि देव प्रसन्न होते हैं.</li> <li>शनिदेव की कृपा पाने के लिए जातक को शनिवार के दिन व्रत रखना चाहिए.</li> <li>शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए हनुमान जी की भी पूजा करनी चाहिए.</li> </ul> <div class="uk-grid-collapse uk-grid"> <div class="uk-width-3-5 fz20 p-10 newsList_ht uk-first-column" style="text-align: justify;"><a href="https://ift.tt/3uFDtLc Vrat 2021: कब है जून का पहला प्रदोष व्रत, जानें प्रदोष काल में भोलेनाथ की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्त्व</strong></a></div> </div> lifestyle https://ift.tt/3yN0QG9