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Thursday, May 27, 2021

Oregano का ज्यादा इस्तेमाल हो सकता है हानिकारक! जानिए कौन सी बीमारियों की है वजह

आजकल पिज्जा, पास्ता और सेंडविच में लोग ऑरेगैनो का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं. अब लोग घरों में भी कई चीजों में स्वाद बढ़ाने के लिए ऑरेगैनो डालने लगे हैं. इसका स्वाद बच्चों और बड़ों सभी को पसंद आता है. मार्केट में कई तरह के ऑरेगैनो आपको मिल जाएंगे. जिसमें पिज़्ज़ा, पास्ता और सॉस जैसी चीजों में इस्तेमाल किया जाना वाला ऑरेगैनो सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है. इसे मेक्सिकन ऑरेगैनो कहते हैं. इसके अलावा यूरोपियन ऑरेगैनो का इस्तेमाल भी लोग करते हैं. इसे खांसी, सिरदर्द, घबराहट और दांत दर्द जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा तीसरा ऑरेगैनो ग्रीक ऑरेगैनो है जिसे लोग इस्तेमाल करते हैं. लोग ऑरेगैनो के फायदों को तो जानते हैं लेकिन आपको बता दें कि ऑरेगैनो केवल फायदा ही नहीं कई मामलों काफी नुकसान भी कर सकता है. जानते हैं ऑरेगैनो से होने वाले नुकसान कौन से हैं
स्किन एलर्जी-
ऑरेगैनो का ज्यादा दिन तक इस्तेमाल करने से आपको स्किन एलर्जी होने का खतरा रहता है. ऐसे में आपको संतुलित मात्रा में ही इसका सेवन करना चाहिए. ऑरेगैनो का तेल भी कई लोगों को स्किन पर एलर्जी कर देता है जिससे जलन, लाली और खुजली की समस्या होने लगती ह.
पेट में दिक्कत- ज्यादा मात्रा में और ज्यादा दिन तक ऑरेगैनो खाने से पेट में दिक्कत हो सकती है. इससे पेट में जलन, अपच, गैस, कब्ज़ की समस्या और पेट दर्द भी हो सकता है.
ज्यादा ब्लीडिंग-
 कई लोगों को ब्लीडिंग डिसऑर्डर की समस्या होती है. ऐसे लोगों को नकसीर फूटने या चोट लगने पर जल्दी खून बंद नहीं होता. इन लोगों को ऑरेगैनो का ज्यादा सेवन करने से बचना चाहिए. इससे उन्हें दिक्कत और बढ़ सकती है.
गर्भपात का खतरा-अगर आप प्रेगनेंट हैं तो आपको ऑरेगैनो का सेवन करने से बचना चाहिए. गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में ज्यादा ऑरेगैनो खाने से ब्लीडिंग हो सकती है. इससे मिसकैरेज का खतरा भी बढ़ जाता है.
ब्ड शुगर लेवल कम-
बहुत ज्यादा ऑरेगैनो खाने से बचना चाहिए. इसके रोज़ाना खाने से ब्लड शुगर लेवल कम हो सकता है. जिससे कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं. इसके अलावा जो लोग हाइपोग्लाइसीमिया की बीमारी से पीड़ित हैं उन्हें ऑरेगैनो सोच-समझकर खाना चाहिए.इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों की एबीपी न्यूज़ पुष्टि नहीं करता है. 

Thursday, May 20, 2021

Health Tips: कोरोना में खतरनाक साबित हो रही है डाइबिटीज, इस तरह कंट्रोल करें अपना ब्लड शुगर लेवल

खाना खाने के बाद मीठा खाना भला किसे पसंद नहीं होता. कई लोग थोड़ा कम मीठा खाते हैं तो वहीं कुछ लोग मीठा खाने के बहुत शौकीन होते है. लेकिन मोटे और डायबिटीज के मरीजों के लिए मीठा बहुत नुकसानदायक होता है. ऐसे लोग चीनी से परहेज करते हैं या कोई ऐसा विकल्प तलाशते हैं जिससे मुंह भी मीठा हो जाए और कोई दिकक्त भी न हो. मार्केट में आजकल ब्राउन शुगर, शहद, गुड़ और उससे बनी चीजें काफी चलन में है. डायबिटीज के मरीज शुगर फ्री का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि कुछ लोगों को चीनी की काफी क्रेविंग होती है. ऐसे में आपके लिए कोकोनट शुगर बेहतर ऑप्शन है. इसे नारियल के पेड़ से बनाया जाता है. जानते हैं इसके फायदे और बनाने का तरीका.कोकोनट शुगर कैसे बनती है-
 कोकोनट शुगर नारियल के पेड़ पर आने वाले फूलों के रस से बनती है. पहले इस रस को पेड़ से इकठ्ठा करते हैं फिर उबाल कर सारी नमी खत्म करके उसका सूखा पाउडर बनाया जाता है. अब इसे नैचुरली प्रोसेस करके चीनी के दाने जैसा बनाते हैं. अनप्रोसेस्ड होने की वजह से इसकी न्यूट्रिशियस वैल्यू काफी ज्यादा होती है. ये आपको मार्केट में कोकोनट पाम शुगर के नाम से मिल जाएगी. इसका रंग हल्का ब्राउन होता है जो गुड़ की शक्कर जैसी दिखती है. साउथ इंडिया में नारियल काफी मात्रा में होता है वहां के लोग इसका काफी इस्तेमाल करते हैं. 
साउथ इंडिया में कई तरह की मिठाइयों;में भी कोकोनट शुगर का उपयोग किया जाता है. अब इसे आप कहीं से भी खरीद सकते हैं. शुगर के मरीजों के लिए ये अच्छा ऑप्शन है.कोकोनट शुगर के फायदे-इस शुगर का सबसे बड़ा फायदा ये है कि ये नेचुरल तरीके से बनी होती है. इसमें प्रिजर्वेटिव की मात्रा काफी कम होती है. सादा चीनी के मुकाबले कोकोनट पाम शुगर में बहुत कम कैलोरी होती हैं इसमें विटामिन्स- मिनरल्स भी होते हैं. पाम शुगर में विटामिन बी-1, बी-12 और फॉलिक एसिड भी पाया जाता है. जिससे शरीर को कई फायदे मिलते हैं. कोकोनट शुगर में ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी सफेद चीनी और शहद से काफी कम पाया जाता है. ये डायबिटीज के मरीजों के लिए काफी अच्छी रहती है. इसमें ग्लाइसेमिकल इंडेक्स सिर्फ 35 होता है वहीं चीनी में ये 60 से भी ज्यादा होता है. कोकोनट पाम शुगर में प्रोबायोटिक और फाइबर भी होता है जिससे डाइजेशन अच्छा रहता है. आप चाय, दूध और मिठाइयों में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं.

जामुन के एक नहीं अनेक फायदे, Blackberry का शानदार देसी विकल्प है

अगर आपको अपने उबाऊ ब्रेकफास्ट को स्वादिष्ट बनाना है, तो एक जरिया है अपने प्लेट में काला जामुन शामिल करें. स्वाद का ताजा मौका देने के अलावा, जामुन पोषक तत्वों का भरपूर स्रोत भी है. कुछ लोगों का तो यहां तक कहना है कि ये 'एंटीऑक्सीडेंट्स का राजा' है. उसमें एंथोसायनिन होता है, इस तरह उम्र बढ़ने के खिलाफ मदद करता है. काला जामुन कैंसर, डीएनए क्षति के खिलाफ सुरक्षा देता है और दिल की बीमारी, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज को रोकता है और स्मृति से जुड़े काम को सुधारता है.जामुन के फायदे जानना चाहिए ये लो कैलोरी हाई पोषण होने के चलते घने पोषक तत्वों वाला फूड होता है. ब्लूबेरी को आसानी से काला जामुन के साथ बदला जा सकता है. भारतीय ब्लैकबेरी के नाम से परिचित काला जामुन 'देवताओं के फल' के रूप में बयान किया जाता है , गर्मी में उपलब्ध होता है, सूरज की तपिश से लड़ने के लिए अच्छा होता है. ये फल पॉलीफेनोलिक यौगिकों का समृद्ध स्रोत है. आयुर्वेद मजबूती से दिल, गठिया,अस्थमा, पेट दर्द, आंत में ऐंठन, पेट फूलना, पेचिश संबंधित कई स्थितियों के लिए इलाज में फल का समर्थन करता है. जामुन का मूत्रवर्धक प्रभाव किडनी से जहरीले पदार्थों को बाहर निकालता है, जबकि फाइबर की उच्च मात्रा पाचन में सहयोग करती है और मतली, उल्टी को रोकती है.मसूढ़े की सेहत के लिए भी फल बहुत अच्छा होने के साथ मुंहासे को रोकने में मदद करता है. कई रिसर्च से साबित हुआ है कि जामुन में अल्कालॉइड की अधिक मात्रा मौजूद होने की वजह से ये हाई शुगर लेव या हाइपोग्लाइसेमिया को काबू करने में प्रभावी है. फल के बीज से अर्क के अलावा, पत्तियां और छाल आपके शरीर में ब्लड शुगर लेवल की वृद्धि को कम करने में फायदेमंद हैं. काला जामुन का बीज उतना ही फायदेमंद है