24 जुलाई 2021, शनिवार को गुरु पूर्णिमा का पर्व है. ये पर्व आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा की तिथि को मनाया जाता है. गुरु पूर्णिमा का पर्व जीवन में गुरु के महत्व को बताता है. चाणक्य को आचार्य चाणक्य भी कहा जाता है. चाणक्य स्वयं एक योग्य शिक्षक थे. उनका संपूर्ण जीवन लोगो का मार्गदर्शन और शिक्षा प्रदान करने में व्यतीत हुआ. चाणक्य की शिक्षाएं आज भी लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं. चाणक्य की चाणक्य नीति की प्रांसगिकता आज भी कायम है. बड़ी संख्या में लोग आज भी चाणक्य की चाणक्य नीति का अध्ययन करते हैं और जीवन में आने वाली परेशानियों को दूर करते हैं. चाणक्य के अनुसार गुरु के अतिरिक्त इन लोगों का भी हमेशा सम्मान करना चाहिए-
पिता
चाणक्य के अनुसार पिता का सदैव सम्मान करना चाहिए. पिता अपनी संतान को योग्य बनाने के लिए त्याग करता है. विपरीत परिस्थियों में भी अपनी संतान को श्रेष्ठ बनाने के लिए यथासंभव परिश्रम करता है. पिता के समर्पण और त्याग से ही संतान का भविष्य बनता है. इसलिए पिता का हमेशा सम्मान करना चाहिए.
सच्चा मित्र-
चाणक्य के अनुसार उस मित्र का हमेशा सम्मान करें, जो आपके बुरे वक्त में आपकी मदद के लिए खड़ा रहता है. जो बुरे वक्त में साए की तरह साथ देते हैं. बुरे वक्त में जब सब साथ छोड़ जाते हैं तो वही साथ देता है जो आपको दिल से चाहता है. इसलिए ऐसे लोगों का हमेशा अहसान मानना चाहिए. इनका आदर और सम्मान करना चाहिए. ऐसे लोग जीवन में उपहार की तरह होते हैं.
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