काम
काम की अधिक भावना व्यक्ति को लक्ष्य से भटकाती है. इस कार्य में अधिक लिप्त होने से सफलता व्यक्ति से दूर हो जाती है..
क्रोध
श्रीमद्भगवात कथा में भगवान श्रीकृष्ण क्रोध को मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु बताया है. क्रोध में व्यक्ति अच्छे और बुरे का अंतर भूल जाता है.
परिश्रम करने से भय का नाश होता है. जब व्यक्ति नकारात्मक ऊर्जा से घि जाता है तो उसे भय सताने लगता है. भय सकारात्मक सोच से दूर होता है.
मोह
व्यक्ति को किसी चीज का अधिक मोह यानि लोभ नहीं करना चाहिए. मोह कई प्रकार के कष्टों को जन्म देता है, जिस कारण व्यक्ति की सफलता में बाधा आती है.
लोभ
लालच एक बुरी आदत है. इससे दूर ही रहना चाहिए. शास्त्रों में भी इससे दूर रहने की सलाह दी जाती है. लोभ व्यक्ति के सुख और चैन का नाश करता है.
अहंकार
गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं व्यक्ति को अहंकार का त्याग करना चाहिए. अहंकार गुण और प्रतिभा का भी नाश करता है. अहंकार भ्रम की स्थिति उत्पन्न करता है. अहंकार करने वालों को सम्मान प्राप्त नहीं होता है
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