समाज में ऐसे कई किस्से सुने देखे गए हैं कि साधारण से दिखने वाले अवसर ने व्यक्ति को असाधारण सफलता दिला दी. इसके विपरीत कई बड़े अवसरों ने लोगों को भटका दिया. वास्तविकता यह है कि जीवन सतत संघर्ष और सक्रियता का परिणाम है. इसमें जो मौके जिस समय बनें उन्हें पूरे मनोयोग से स्वीकार किया जाना चाहिए.
अवसर की महत्ता के अनुरूप ऊर्जा देने का भाव व्यक्ति को महान उपलब्धियों से वंचित करता है. महानता व्यक्ति को तभी प्राप्त होती है जब वह हर बार अपना शत-प्रतिशत देता है. व्यक्ति, परिस्थिति और अवसर से उसके प्रदर्शन में तिलभर कमी नहीं आती है.इसे सबसे बेहतर सिनेमा जगत से समझा जा सकता है. कई सिनेमा में देखा गया है कि अत्यल्प समय का चरित्र भी बड़ी छाप छोड़ने में सफल होता है. कारण, उसमें कलाकार ने अपनी अधिकाधिक ऊर्जा दी हुई होती है. यही भाव कार्य व्यापार में दिखाया जाना चाहिए.
जॉब में मन मुताबिक स्थिति न बनने पर कर्मचारी को निराशा ओढ़ने से बचकर उस कार्य को पूरे उत्साह से करना चाहिए. व्यापारी को व्यापार में हर समय शत-प्रतिशत जुटे रहना चाहिए. ऐसा करके ही बड़े उद्यम की ओर बढ़ा जा सकता है.
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