Tuesday, August 3, 2021

कहीं आप भी तो ऑफिस का काम करते वक्त गलत पोजीशन में नहीं बैठते? जानें इसके नुकसान

<p style="text-align: justify;"><strong>Correct Postures can prevent Back Pain:</strong> कोरोना महामारी के कारण बहुत से ऑफिस में अब 'वर्क फ्रॉम होम' (Work From Home) हो चुका है. ऑफिस में बैठकर घंटों काम करने वाले लोग यह अच्छी तरह से जानते हैं कि 8 से 9 घंटे लगातार काम करने से शरीर को कितना नुकसान पहुंचता है. काफी देर तक एक ही पोजीशन में बैठने से अक्सर पीठ और पैर में दर्द होने की समस्या होने लगती है. ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि हम पूरे दिन सही पोजीशन में बैठें और फिर काम करें.</p> <p style="text-align: justify;">ऑफिस में काम करते वक्त हम स्पेशल कुर्सी पर बैठते हैं जिसके कारण हमें पीठ दर्द की समस्या नहीं होती है. लेकिन, घर पर काम करते वक्त हम साधारण कुर्सी पर बैठते हैं जिससे बहुत से लोगों को कमर दर्द की शिकायत हो जाती है. लंबे वक्त तक घर में काम करने के लिए वर्क फ्रेंडली चेयर (Work Friendly Chair) और इंसान का कम्फर्टेबल (Comfortable) होना बेहद जरूरी है. घर में काम करते वक्त इस बात का खास ख्याल रखें कि आप प्लास्टिक की कुर्सी (Plastic Chair) पर बिलकुल ना बैठे. उस कुर्सी की जगह आप एर्गोनॉमिक्स या फ्लेक्सिबल कुर्सी का इस्तेमाल करें.</p> <p style="text-align: justify;">एक्सपर्ट्स के अनुसार फ्लेक्सिबल कुर्सी काम करते वक्त शरीर के तनाव को कम करके हमारे दिमाग को रिलैक्स करने में मदद करती है. एर्गोनॉमिक्स चेयर लंबे समय तक बैठने में हमारे पीठ को सपोर्ट करके उसे आराम दिलाने में मदद करता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कुर्सी पर बैठने का सही तरीका क्या है?</strong><br />काम करते वक्त इस बात का खास ख्याल रखें कि आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी होनी चाहिए. आप अपने दोनों पैरों को हमेशा जमीन पर रखकर बैठें. यह देखा गया है कि काम करते वक्त बहुत से लोगों में यह आदत होती है कि वह अपनी कुर्सी की ऊंचाई बढ़ा लेते हैं और पैर हवा में लटका देते हैं. यह करना बिलकुल भी ठीक नहीं है. ऐसा करने से कमर की हड्डी पर अधिक दबाव पड़ता है और पैरों में और दर्द होने लगता है. ज्यादा देर तक इस पोजीशन में बैठने से आंखों पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है. इसलिए काम 'वर्क फ्रॉम होम' में इस बात का खास ख्याल रखें कि आप सही पोजीशन में बैठकर अपना काम करें.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें-</strong></p> <p style="text-align: justify;"><a href="https://www.abplive.com/lifestyle/obese-seniors-can-prevent-heart-disease-by-leading-healthy-lifestyle-1948766"><strong>बुढ़ापे में है मोटापे का शिकार, लाइफस्टाइल में बदलाव से रह सकते हैं दिल की बीमारियों से दूर</strong></a></p> <p style="text-align: justify;"><a href="https://ift.tt/3iir6ld Tips: कोविड-19 और मानसून की बीमारियों के बीच कैसे करें अंतर, जानिए</strong></a></p> lifestyle https://ift.tt/2WOHr9c

जानिए Vitamin B1 की कमी से क्या हो सकता है, भूमिका, महत्व और फायदे भी समझें

<p style="text-align: justify;">विटामिन बी1 एक जरूरी पोषक तत्व है जिसकी हमारे शरीर को आवश्यकता होती है. हमारा शरीर खुद से उसे पैदा करने में सक्षम नहीं होता, इसलिए उसकी पूर्ति फूड्स और सप्लीमेंट्स के जरिए की जाती है. विटामिन बी1 को थायमिन भी कहा जाता है. शरीर के सही कामकाज की खातिर जरूरी है कि विटामिन बी1 की पर्याप्त मात्रा इस्तेमाल की जाए. &nbsp;</p> <p style="text-align: justify;">शारीरिक कामों में विटामिन बी1 अहम भूमिका अदा करता है. इसका काम फूड को ऊर्जा में बदलना, रेड ब्लड सेल पैदा करना और सेल्स के अंदर ऊर्जा को पहुंचाने का है. उसके बिना हमारा शरीर सही तरीके से काम करना बंद कर देगा. विटामिन बी1 पानी में घुलनशील पोषक तत्व है. विटामिन बी1 की हमारे शरीर में भूमिका और उसके कुछ फायदों को जानना चाहिए.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>इस वजह से विटामिन बी1 का है महत्व</strong><br />विटामिन बी1 की मौजूदगी हमेशा इस बात को सुनिश्चित करती है कि आपकी आंत स्वस्थ रहे और पेट में काफी हाइड्रोक्लोरिक एसिड का उत्पादन हो. ये आपके भोजन से शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों और मिनरल्स को अवशोषित करने में मदद भी करता है. ये शरीर को कार्बोहाइड्रेट्स और ग्लूकोज को तोड़ने और उनको ऊर्जा में बदलने की इजाजत देता है. इसलिए आपके शरीर में विटामिन बी1 का स्थिर लेवल हमेशा जरूरी है ताकि आप खुद को ऊर्जावान महसूस करते रहें.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>रेड ब्लड सेल्स को काबू में रखता है</strong><br />विटामिन बी1 रेड ब्लड सेल्स के उत्पादन में मुख्य भूमिका निभाता है जो ऑक्सीजन को शरीर के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाता है. ये सभी अंगों को सही तरीके से काम करने के लिए प्रयाप्त ऑक्सीजन की आपूर्ति को सुनिश्चित करता है. आरबीसी से बना ब्लड हमारे अंदरुनी सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा है. विटामिन बी1 की अहमियत का पता इसी से चलता है कि इसकी कमी से एनीमिया हो सकता है, जिसका मतलब है शरीर में रेड ब्लड सेल्स की मात्रा की कमी. एनीमिया कभी-कभी अंग क्षति का कारण बनता है. विटामिन बी1 आपके शरीर के लिए रेड ब्लड सेल्स उत्पादन को तय करता है ताकि सभी अंग अच्छी तरह से ऑक्सीजन युक्त रह सकें.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>इम्यून सिस्टम को बढ़ाता है</strong><br />विटामिन बी1 आपके इम्यून सिस्टम को बढ़ाता है और विभिन्न प्रकार की बीमारियों के खिलाफ शरीर को सुरक्षा देता है. ये इम्यून सिस्टम को प्रेरित कर रक्त प्रवाह में व्हाइट ब्लड सेल्स को जारी करने में मदद करता है. इससे हमारे शरीर को बैक्टीरिया और फंगस जैसे बीमारी का कारण बननेवाले रोगजनकों के खिलाफ लड़ने में मदद मिलती है. व्हाइट ब्लड सेल्स शरीर में किसी बाहरी तत्व को पहचानता है और फौरन उसे खत्म करता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Health Tips: कोविड-19 और मानसून की बीमारियों के बीच कैसे करें अंतर, जानिए" href="https://ift.tt/3C9HX1O" target="">Health Tips: कोविड-19 और मानसून की बीमारियों के बीच कैसे करें अंतर, जानिए</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="बुढ़ापे में है मोटापे का शिकार, लाइफस्टाइल में बदलाव से रह सकते हैं दिल की बीमारियों से दूर" href="https://ift.tt/3CkotaO" target="">बुढ़ापे में है मोटापे का शिकार, लाइफस्टाइल में बदलाव से रह सकते हैं दिल की बीमारियों से दूर</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3xpzSSS

Coronavirus: अगर नया वेरिएन्ट सामने नहीं आता है, तो हल्की होगी तीसरी लहर, अक्टूबर में आएगा पीक- रिसर्च

<p style="text-align: justify;">अगर कोरोना वायरस का तेजी से फैलनेवाला म्यूटेंट सामने नहीं आता है, तो तीसरी कोविड अक्टूबर और नवंबर के बीच मात्र एक लहर हो सकती है. तेजी से फैलनेवाले म्यूटेंट की सूरत में कोविड की तीसरी लहर पहली लहर के बराबर होगी. हालांकि, अगर कोरोना वायरस में म्यूटेंट होता जिसमें इम्यूनिटी से बचने की क्षमता होती है, तो तीसरी लहर का आकार महत्वपूर्ण हो सकता है. कोरोना की तीसरी लहर की संभावना का अनुमान महामारी के लिए सूत्र मैथेमेटिकल मॉडल से लगाया गया है.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कैसा होगा कोरोना की तीसरी लहर का स्वरूप?&nbsp;</strong></p> <p style="text-align: justify;">आईआईटी के शोधकर्ताओं का मानना है कि कोरोना की तीसरी लहर दूसरी लहर के जैसी डरावनी नहीं हो सकती. अगर कोरोना के नए वेरिएन्ट का हमला नहीं होता है, तो तीसरी लहर हलकी हो सकती है. गौरतलब है कि वैज्ञानिकों ने कोरोना की दूसरी लहर के चरम का करीब सटीक अनुमान लगाया था. उनका ये मैथेमेटिकल मॉडल इस महीने संक्रमण के मामलों की बढ़ोतरी को दर्शाता है. अनुमान है कि अक्तूबर में बदतर स्थिति में रोजाना एक लाख से ज्यादा मामले चरम पर पहुंच सकते हैं. राष्ट्रीय 'सुपर मॉडल' सूत्र में शामिल आईआईटी कानपुर के मनिंदर अग्रवाल ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, "अगस्त के अंत और पूरे सितंबर में मामूली बढ़ोतरी होगी क्योंकि लॉकडाउन उठा लिया गया है. ये किसी नए वेरिएन्ट की वजह से नहीं होगा. किसी नए वेरिएन्ट के बिना तीसरी लहर की गंभीरता कम होगी."</p> <p style="text-align: justify;"><strong>IIT के वैज्ञानिकों का मॉडल सूत्र से चलता है पता&nbsp;</strong></p> <p style="text-align: justify;">दैनिक मामलों का चरम बहुत कम हो सकता है यानी करीब मात्र 50,000. उसको स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया, "अगर तीसरी लहर आती है, तो अस्पताल पर बोझ पहली लहर की स्थिति के मुकाबले उससे भी कम होगा." शोधकर्ताओं ने विश्लेषण, ग्राफ को जुलाई के शुरू में जारी किया था, जिससे पता चलता है कि कुल संख्या आखिरकार अक्तूबर में चरम पर होने के बाद कम होने लगेगी और दिसंबर में नहीं के बराबर होने की उम्मीद है. नए मॉडल के मुताबिक, अच्छी खबर है कि है कि संभावित तीसरी लहर के कम गंभीर होने की संभावना है, लेकिन सुरक्षा को कम करने का कोई कारण नहीं है. कोविड-19 के उपयुक्त व्यवहार जारी रखा जाना चाहिए. फायदा हासिल करने के लिए टीकाकरण को जरूर तेज किया जाना चाहिए.</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="बुढ़ापे में है मोटापे का शिकार, लाइफस्टाइल में बदलाव से रह सकते हैं दिल की बीमारियों से दूर" href="https://ift.tt/3CkotaO" target="">बुढ़ापे में है मोटापे का शिकार, लाइफस्टाइल में बदलाव से रह सकते हैं दिल की बीमारियों से दूर</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Health Tips: कोविड-19 और मानसून की बीमारियों के बीच कैसे करें अंतर, जानिए" href="https://ift.tt/3C9HX1O" target="">Health Tips: कोविड-19 और मानसून की बीमारियों के बीच कैसे करें अंतर, जानिए</a>&nbsp;&nbsp;</strong></p> lifestyle https://ift.tt/37emGFM

पनीर के फायदे जानिए, इन तरीकों से अपनी डाइट में कर सकते हैं शामिल

<p style="text-align: justify;">पनीर सामान्य तौर पर प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत है, जबकि कार्बोहाइड्रेट्स में बहुत ही कम. इसलिए ये कम कार्बोहाइड्रेट डाइट पर रहनेवाले लोगों का स्वस्थ विकल्प है. हालांकि, पनीर में सैचुरेटेड फैट्स और सोडियम भी पाया जाता है, शरीर को दोनों की बहुत सीमित मात्रा में जरूरत होती है. अपने पोषण महत्व के कारण पनीर कई लिहाज से फायदेमंद है. ये ब्लड प्रेशर कम करनेवाला, मसल बनानेवाला, डायबिटीज का खतरा कम करनेवाला और हड्डियों को मजबूत करनेवाला समझा जाता है. शोधकर्ताओं का ये भी सुझाव है कि दिल की सेहत को ठीक करने के लिए रोजाना 40 ग्राम पनीर खाया जाए. ये प्रोबायोटिक्स की वजह से इम्यूनिटी और आंत के स्वास्थ्य को भी ठीक करने में मदद करता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>डाइट में पनीर को कैसे करें शामिल</strong><br />पनीर का स्वस्थ होना उसकी रेसिपी पर निर्भर करता है. संतुलित भोजन में मैक्रो और सूक्ष्म पोषक तत्वों की अच्छी मात्रा होनी चाहिए. पनीर के साथ स्वस्थ भोजन बनाते वक्त आप कुछ टिप्स का पालन कर सकते हैं.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>पनीर को सलाद में मिलाएं-</strong> अगर आपको सलाद नहीं पसंद है, तो उसका स्वाद बढ़ाने के लिए पनीर को मिलाना अच्छा जरिया है. अपने पनीर को क्यूब्स में काट कर उसे सलाद में मिलाएं.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ऑमलेट में पनीर को मिलाएं-</strong> स्वस्थ, प्रोटीन से भरपूर ब्रेकफास्ट के विकल्प की अगर आपको तलाश है, तो आप पनीर को शामिल कर सकते हैं. नियमित ऑमलेट या दूसरे तरह से अंडों में पनीर को मिलाने से ये न केवल समृद्ध बल्कि स्वादिष्ट भी बन जाएगा.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>रेड मीट की जगह पनीर को रखें-</strong> नन वेजिटेरियन के लिए अपनी डाइट में से किसी भी प्रकार के मीट को हटाना बहुत मुश्किल होता है. हालांकि, आप अपने दिल की खातिर सेवन को कम कर सकते हैं. रेड मीट स्पष्ट तौर पर हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ाता है. दिल की सेहत को खतरे में डाले बिना उसको पनीर से बदलने पर आपको स्वस्थ फैट्स और प्रोटीन प्राप्त करने में मदद मिलेगी.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>फलों के साथ पनीर खाएं-</strong> सही तरीके से फल और पनीर को शामिल करने से ये आपके लिए स्नैक का स्वस्थ विकल्प हो सकता है. मिसाल के तौर पर तरबूज, आम और सेब के साथ पनीर का अच्छा जोड़ है. आप इस विकल्प का इस्तेमाल कर सकते हैं.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="पाकिस्तान में 'चॉकलेट बिरयानी' की बिक्री का वीडियो वायरल, लोगों ने दिए ऐसे मजेदार रिएक्शन" href="https://ift.tt/2WSYNSt" target="">पाकिस्तान में 'चॉकलेट बिरयानी' की बिक्री का वीडियो वायरल, लोगों ने दिए ऐसे मजेदार रिएक्शन</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Health Tips: आपके बाथरूम से फैल सकती हैं बीमारियां, इन 5 चीजों को तुरंत हटा दें" href="https://ift.tt/2VtXA2U" target="">Health Tips: आपके बाथरूम से फैल सकती हैं बीमारियां, इन 5 चीजों को तुरंत हटा दें</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3ylmVut

बुढ़ापे में है मोटापे का शिकार, लाइफस्टाइल में बदलाव से रह सकते हैं दिल की बीमारियों से दूर

Lifestyle changes in Obese Seniors: जीवन में उम्र में एक पढ़ाव पर आने के बाद सभी लोगों को अपने स्वास्थ्य का बहुत ध्यान रखना पड़ता है. एक हेल्दी रूटीन फॉलो करने से ना सिर्फ मोटापे से ग्रस्त बुजुर्गों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है बल्कि वह निरोगी जीवन भी जीते हैं. यह बातें हम नहीं कह रहे हैं बल्कि, अमेरिका में छपे एक हेल्थ जनरल में यह दावे किए गए हैं. अमेरिका की प्रतिष्ठित हार्ट जनरल मैगजीन 'अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन' (American Heart Association) में छपी खबर के मुताबिक 65 साल की उम्र के बाद अगर आप मोटापे से ग्रस्त हैं तो लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव करके आप अपने दिल को बीमारियों से सुरक्षित रख सकते हैं.आपको बता दें कि इस रिपोर्ट के अनुसार 65 से अधिक उम्र के मोटे लोगों को कम से कम दिनभर में 200 कैलोरी एक्सरसाइज करके बर्न करनी चाहिए. 30 मिनट की एक्सरसाइज से आप 200 कैलोरी बर्न कर सकते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि आप व्यायाम अपनी शरीर की क्षमता के अनुसार ही करें और हफ्ते में चार दिन व्यायाम करने से धमनी की जकड़न (Aortic Stiffness) दूर होती है और हृदय स्वस्थ रहता है.'वेक फॉरेस्ट स्कूल ऑफ मेडिसिन' में प्रोफेसर टीना बर्कली ने बताया कि 65 से 79 के उम्र के मोटे लोगों में डेली एक्सरसाइज से धमनी की जकड़न का खतरा कम होता है. एक्सरसाइज करने के दौरान खून का बहाव शरीर में तेज हो जाता है जिससे धमनी की जकड़न दूर होती है और वह स्वस्थ बनती है. दिल को ठीक रखने के लिए मोटापे से ग्रस्त लोग हफ्ते में कम से कम चार दिन जरूर एक्सरसाइज करें. यह उनके दिल को स्वस्थ बनाता है और लंबा जीवन जीने में मदद करता है.

Health Tips: कोविड-19 और मानसून की बीमारियों के बीच कैसे करें अंतर, जानिए

<p style="text-align: justify;">कोरोना महामारी के बीच मानसून का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ा प्रभाव हो सकता है. जैसा कि हम सब जानते हैं मानसून राहत के साथ कई तरह की बीमारी भी लाता है. मानसून की बीमारियों के लक्षण कोविड-19 के लक्षणों जैसे हो सकते हैं, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है. इसलिए जरूरी है ये समझना कि दोनों पूरी तरह से अलग बीमारियां शरीर को कैसे प्रभावित करती हैं और उनमें समानता क्या है.<br />&nbsp;<br /><strong>मानसून की सामान्य बीमारियां&nbsp;</strong></p> <p style="text-align: justify;">मानसून में कई प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. मानसून की सबसे आम कुछ बीमारियों में वेक्टर जनित बीमारियां जैसे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, वायरल संक्रमण जैसे सामान्य जुकाम, वायरल बुखार और पानी से होनेवाला संक्रमण जैसे कॉलरा, टाइफॉयड बुखार हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कोरोना वायरस सांस की बीमारी है</strong></p> <p style="text-align: justify;">कोरोना वायरस श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है और आहिस्ता-आहिस्ता पूरे शरीर पर असर करता है. कोरोना वायरस को विभिन्न रूपों में बदलने के लिए जाना जाता है, इसलिए उसे बहरूपिया भी कहा जाता है. पहले श्वसन तंत्र पर कोरोना वायरस का हमला होता है, फिर मरीजों में लंग की दिक्कत का कारण भी बन सकता है, जिसके कारण खांसी, गले की खराश, स्वाद और गंध का नुकसान, सांस लेने में दुश्वारी जैसे लक्षण गंभीर कोविड-19 में देखे जाते हैं. असर और गंभीरता के संदर्भ में मानसून की बीमारियों से बिल्कुल अलग कोविड-19 की बीमारी है. हालांकि, लक्षणों के मामलों में दोनों के बीच खास समानताएं हैं.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Diabetes Control: डायबिटीज के मरीज को कॉफी पीनी चाहिए या नहीं? जानिए फायदे और नुकसान" href="https://ift.tt/3yqLuqg" target="">Diabetes Control: डायबिटीज के मरीज को कॉफी पीनी चाहिए या नहीं? जानिए फायदे और नुकसान</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="पाकिस्तान में 'चॉकलेट बिरयानी' की बिक्री का वीडियो वायरल, लोगों ने दिए ऐसे मजेदार रिएक्शन" href="https://ift.tt/2WSYNSt" target="">पाकिस्तान में 'चॉकलेट बिरयानी' की बिक्री का वीडियो वायरल, लोगों ने दिए ऐसे मजेदार रिएक्शन</a></strong></p> <p style="text-align: justify;">वेक्टर जनित बीमारियां अक्सर बुखार, थकान, जोड़ और मसल दर्द के साथ आती हैं, जो कोविड-19 के मरीजों में बेहद आम है. कोविड-19 और सामान्य जुकाम दोनों सांस की बीमारी हैं जिससे गले की खराश, खांसी, बुखार, बदन दर्द हो सकता है. वायरल बुखार और दूसरी बीमारियां जैसे टाइफॉयड और कॉलरा भी बुखार, मसल और जोड़ दर्द, थकान और कमजोरी, ठंड, चक्कर, पसीना, डिहाइड्रेशन, कमजोरी और भूख की कमी को बढ़ाते हैं, जो कोविड-19 के मरीजों में हो सकता है.</p> <p style="text-align: justify;">सामान्य जुकाम और कोविड-19 के बीच को अंतर करना बहुत दुश्वार होता है. दोनों की बीमारियां सांस की सेहत से जुड़ी हुई होती हैं, इसलिए लक्षण बहुत समान होते हैं, जो उन्हें अलग करना और भी कठिन बना देता है. हालांकि, जुकाम के लक्षण अचानक प्रभावित करते हैं और आहिस्ता-आहिस्ता खत्म हो जाते हैं, जबकि कोविड-19 के लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं और कई दिन और महीनों रह सकते हैं. इसलिए विशेषज्ञ किसी लक्षण दिखने की सूरत में जांच कराने की सलाह देते हैं.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;">कोविड-19 के अतिरिक्त खास लक्षण बीमारी के स्रोत को पहचान करने में आपकी मदद कर सकते हैं. सांस संबंधी दिक्कतें जैसे सूखी खांसी, गले की सूजन, गंध और स्वाद का नुकसान सभी कोविड-19 के लक्षण हैं, जो डेंगू के मरीजों में कम होता है. हालांकि, एक शख्स में डेंगू और कोविड दोनों की एक ही समय में पहचान हो सकती है.</p> <p style="text-align: justify;">मानसून के दौरान सामान्य जुकाम प्रमुख समस्या होती है, जबकि वेक्टर जनित बीमारियां जैसे डेंगू और मलेरिया बहुत आम होती हैं. इसलिए, अपने स्वास्थ्य और परिजनों की सुरक्षा के लिए कुछ उपाय कर सकते हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>खतरे को कम करने के लिए क्या करें?</strong></p> <ul> <li style="text-align: justify;">कूलर, अंधेरे और गंदे कोने में ताजा पानी को जमा न होने दें.&nbsp;</li> <li style="text-align: justify;">मच्छर भगानेवाली क्रीम का इस्तेमाल करें या बाहर छिड़काव करें.&nbsp;</li> <li style="text-align: justify;">पूरे बांह का कपड़ा पहनने से डेंगू के खतरे की रोकथाम हो सकता है.</li> <li style="text-align: justify;">कोविड के खतरे से बचने के लिए मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें.</li> <li style="text-align: justify;">भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से परहेज करें और उसके बजाय घर पर रहें.&nbsp;</li> <li style="text-align: justify;">खुद की और परिजनों की सेहत के लिए कोविड-19 का टीकाकरण कराएं.</li> </ul> lifestyle https://ift.tt/3C9HX1O

इन उपायों से आपके बाल झड़ेंगे नहीं | Yog Yatra

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