Saturday, July 31, 2021
दुनिया भर में डिमेंशिया के मामले 2050 तक हो सकते हैं तीन गुना, जानिए बचाव के उपाय
<p style="text-align: justify;">याद्दाश्त, समस्या हल करना और सोचने-समझने की क्षमता का कम होने को बताने के लिए डिमेंशिया शब्द का प्रयोग किया जाता है. दुनिया भर में उम्र दराज लोगों के बीच निर्भरता और विकलांगता के प्रमुख कारणों में से ये एक है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दुनिया भर में करीब पांच करोड़ लोगों को डिमेंशिया है, और करीब एक करोड़ नए मामले हर साल आ रहे हैं. इसको लेकर एक नई रिसर्च में भविष्यवाणी की गई है कि डिमेंशिया पीड़ितों की वैश्विक संख्या 2050 तक करीब तीन गुना तक हो सकती है. 27 जुलाई को अल्जाइमर एसोसिएशन इंटरनेशल कांफ्रेंस में पेश किए गए नए डेटा के मुताबिक, अनुमान लगाया गया है कि दुनिया भर में 15 करोड़ मिलियन से ज्यादा लोग डिमेंशिया के साथ रह रहे होंगे. 2019 में 5 करोड़ 57 लाख से बढ़ कर 2050 में संख्या के 15 से ज्यादा होने का अनुमान लगाया गया है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>डिमेंशिया के लिए उम्र जोखिम कारक</strong><br />डिमेंशिया के लिए उम्र सबसे मजबूत जोखिम कारक है और इस प्रकार ये मुख्य रूप से बुजुर्गों को प्रभावित करती है. अल्जाइमर एसोसिएशन के मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी मारिया कारिलो के हवाले से कहा गया, "मोटापा, डायबिटीज और सुस्त लाइफस्टाइल समेत युवाओं में डिमेंशिया के जोखिम कारक तेजी से बढ़ रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, 65 साल की उम्र से पहले लक्षणों की शुरुआत डिमेंशिया के नौ फीसद मामलों में योगदान देती है. डिमेंशिया विभिन्न बीमारियों और चोटों के नतीजे में हो सकती है जो दिमाग को जैसे अल्जाइमर या स्ट्रोक को प्रभावित करती है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>डिमेंशिया की जल्दी शुरुआत में बढ़ोतरी</strong><br />यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन स्कूल ऑफ मेडिसीन में शोधकर्ता एम्मा निकोलस और उनके साथियों ने वैश्विक डिमेंशिया के प्रसार का अध्ययन किया. इसके लिए, उन्होंने 1999 और 2019 के बीच इस्तेमाल किए गए डेटा को इस्तेमाल किया. उन्होंने पाया कि हर साल अनुमानित हर 100,000 लोगों में से 10 को डिमेंशिया 65 साल से पहले यानी जल्दी होती है. इसका मतलब हुआ वैश्विक सतह पर प्रति वर्ष डिमेंशिया की जल्दी शुरुआत के 350,000 नए मामले. कारिलो ने कहा कि अल्जाइमर की रोकथाम या धीमा करने, रोकने के लिए प्रभावी इलाज नहीं होने के चलते संख्या 2050 के बाद बढ़ेगी. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>डिमेंशिया का खतरा कैसे हो सकता कम </strong><br />रिसर्च के हवाले से विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया कि लोग नियमित व्यायाम करें, धूम्रपान नहीं करें, अल्कोहल के नुकसानदेह इस्तेमा्ल से परहेज करें, वजन पर नियंत्रण पाएं, स्वस्थ डाइट खाकर और स्वस्थ ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रोल और शुगर लेवल बनाए रख कर डिमेंशिया का खतरा कम कर सकते हैं. डिमेंशिया के अतिरिक्त जोखिम कारक में डिप्रेशन, शिक्षा की कमी, सामाजिक आइसोलेशन शामिल हैं. इन क्षेत्रों पर भी डिमेंशिया के खतरे को कम करने के लिए ध्यान देने की जरूरत है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="मेडिकल कॉफ्रेंस में महिलाओं की कम भागीदारी का क्या है कारण, रिसर्च में हुआ खुलासा" href="https://ift.tt/37dEhxw" target="">मेडिकल कॉफ्रेंस में महिलाओं की कम भागीदारी का क्या है कारण, रिसर्च में हुआ खुलासा</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="कोविड से उबरने के बाद बाल झड़ने की समस्या में इजाफा, डॉक्टरों ने बताया कारण और उपाय" href="https://ift.tt/3rKyHMv" target="">कोविड से उबरने के बाद बाल झड़ने की समस्या में इजाफा, डॉक्टरों ने बताया कारण और उपाय</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3ljJFYe
Coronavirus: डेल्टा वेरिएन्ट चिकनपॉक्स की तरफ फैल सकता है, पैदा कर सकता है ज्यादा गंभीर बीमारी- रिपोर्ट
<p>कोरोना वायरस का डेल्टा वेरिएन्ट दूसरे वेरिएन्ट के मुकाबले ज्यादा गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है और चिकनपॉक्स जितना आसानी से फैल सकता है. अमेरिकी मीडिया ने अमेरिकी स्वास्थ्य प्राधिकरण के आंतरिक दस्तावेज के हवाले से जानकारी दी. सेंटर फोर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के दस्तावेज से पता चलता है कि वैक्सीन का पूरा डोज ले चुके लोग डेल्टा वेरिएन्ट को उसी दर से फैला सकते हैं जितना वैक्सीन नहीं लगवानेवाले.</p> <p><strong>कोरोना का डेल्टा वेरिएन्ट खतरनाक रूप धारण कर सकता है</strong></p> <p>रिपोर्ट में डेल्टा स्ट्रेन को 'एक वेरिएन्ट के तौर पर उतना संक्रामक और बिल्कुल अलग कोरोना वायरस की तरह काम करनेवाला' बताया गया. टीकाकरण के बाद डेल्टा वेरिएन्ट से संक्रमित होनेवाले लोग टीकाकरण नहीं करवानेवालों के जैसा आसानी से वायरस फैला सकते हैं. डेल्टा वेरिएन्ट से संक्रमण वायु मार्ग में अल्फा वेरिेन्ट से संक्रमित होनेवालों के मुकाबले दस गुना वायरस ज्यादा पैदा करता है. दस्तावेज में अल्फा वेरिएन्ट को भी अत्यधिक संक्रामक माना गया है. लेकिन आंतरिक दस्तावज वेरिएन्ट का एक व्यापक और गंभीर दृष्टिकोण पेश करता है.</p> <p><strong>चिकनपॉक्स जितना आसानी से फैल सकता है ये वेरिएन्ट- रिपोर्ट</strong></p> <p>डेल्टा वेरिएन्ट मार्स, सार्स, इबोला, सामान्य जुकाम, मौसमी फ्लू और चेचक का कारण बननेवाले वायरस के मुकाबले ज्यादा फैलनेवाला है, और दस्तावेज के मुताबिक ये चेचक जितना संक्रामक है. दस्तावेज के कंटेट्स को पहली बार मंगलवार की शाम वाशिंगटन पोस्ट ने प्रकाशित किया. दस्तावेज में बताया गया है कि सीडीसी के लिए तत्काल अगला कदम ये 'स्वीकार करना है कि लड़ाई बदल चुकी है'. दस्तवाजे में रिसर्च को देखनेवाले एक वैज्ञानिक ने कहा कि उसका अंदाज सीडीसी के वैज्ञानिकों में देश भर में डेल्टा के फैलाव की चिंता को दर्शाता है. सीडीसी वेरिएन्ट पर अतिरिक्त डेटा को शुक्रवार को प्रकाशित कर सकती है. अधिकारी ने कहा, "सीडीसी सामने आनेवाले डेटा को लेकर बहुत चिंतित है और डेल्टा बहुत गंभीर खतरा है जिसके लिए अब काम करने की जरूरत है." विशेषज्ञों का कहना है कि फिर भी सीडीसी के आंकड़े बताते हैं कि वैक्सीन गंभीर बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने और वैक्सीन लगवा चुके लोगों में मौत को रोकने में अत्यधिक प्रभावी है. </p> <p><strong><a title="कोविड से उबरने के बाद बाल झड़ने की समस्या में इजाफा, डॉक्टरों ने बताया कारण और उपाय" href="https://ift.tt/3rKyHMv" target="">कोविड से उबरने के बाद बाल झड़ने की समस्या में इजाफा, डॉक्टरों ने बताया कारण और उपाय</a></strong></p> <p><strong><a title="Health Tips: शरीर में न होने दें ऑक्सीजन की कमी, ये फल और सब्जियां बढ़ाएंगे लेवल" href="https://ift.tt/3jns27x" target="">Health Tips: शरीर में न होने दें ऑक्सीजन की कमी, ये फल और सब्जियां बढ़ाएंगे लेवल</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3ytDuVv
Kitchen Tips: खाने में पड़ गया है ज्यादा नमक, इस आसान टिप्स को अपनाकर करें ठीक
<p style="text-align: justify;"><strong>How to Reduce Salt in Vegetable Curries: </strong>कहते हैं खाना बनाना किसी खूबसूरत पेंटिंग को बनाने जैसा है. जिस तरह उसमें सभी रंगों का बैलेंस होना बेहद जरूरी है, वैसे ही खाना बनाते वक्त हर मसाले का संतुलन भी आवश्यक है. अगर खाने में नमक या मसाले की मात्रा थोड़ी भी ज्यादा हो जाए तो खाने का स्वाद बिगड़ सकता है. कई बार जल्दबाजी में खाना बनाते वक्त नमक पड़ जाना एक आम समस्या है. नमक ज्यादा होने से खाने का स्वाद तो बिगड़ता ही है, साथ ही ये सेहत के लिए भी बहुत नुकसानदायक होता है. अगर आपको भी इस परेशानी से हमेशा दो-चार होना पड़ता है, तो हम आपको कुछ ऐसे आसान टिप्स बताने रहे हैं जिसे आजमाकर आप आसानी से सब्जी या दाल के नमक को कम कर सकती हैं. तो आइए जानते हैं उन टिप्स के बारे में-<br /> <br /><strong>आटे की गोलियों का करें इस्तेमाल</strong><br />अगर आपके घर पर मेहमान आए हैं और गलती से आपसे सब्जी या दाल में ज्यादा नमक पड़ गया है तो आप आटे की गोलियों का इस्तेमाल कर नमक कम कर सकती हैं. सबसे पहले आटा लें और उसकी छोटी-छोटी गोलियां बना लें. अब इसे दाल या सब्जी में डाल दें. ऐसा करने से दाल या सब्जी में पड़ा एक्स्ट्रा नमक निकल जाएगा.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>उबले हुए आलू का करें इस्तेमाल</strong><br />अगर आपकी सब्जी या दाल में नमक ज्यादा पड़ गया है तो उसमें उबले हुए आलू मिक्स करें. ऐसा करने से खाने में नमक कम हो जाएगा और साथ ही सब्जी की ग्रेवी भी गाढ़ी हो जाएगी. ये भी घर पर आजमाने का प्रभावी नुस्खा और आसान तरकीब है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>बेसन का करें इस्तेमाल</strong><br />अगर खाना पकाने के दौरान जल्दबाजी में नमक ज्यादा पड़ गया है तो इस ट्रिक से उसे ठीक कर सकती हैं. आप इसके लिए भुने हुए बेसन का इस्तेमाल कर सकती हैं. भुने हुए बेसन को मिलाने से खाने में नमक कम हो जाता है. बता दें कि भुने हुए बेसन का इस्तेमाल आप सूखी और ग्रेवी वाली दोनों सब्जियों में इस्तेमाल कर सकती हैं.</p> lifestyle https://ift.tt/3j8JGLP
मेडिकल कॉफ्रेंस में महिलाओं की कम भागीदारी का क्या है कारण, रिसर्च में हुआ खुलासा
<p style="text-align: justify;">मेडिकल कॉफ्रेंस में लैंगिक संतुलन के बावजूद महिलाओं की कम भागीदारी होती है. ये खुलासा प्रतिष्ठित पत्रिका लांसेट में प्रकाशित एक रिसर्च से हुआ है. शोधकर्ताओं ने पाया कि लैंगिक प्रतिनिधित्व के बावजूद मेडिकल और वैज्ञानिक कॉफ्रेंस की कार्यवाहियों में महिलाओं के भाग लेने की संभावना कम है. हालांकि, सम्मेलन के डिजाइन और बदलाव से महिला भागीदारी में काफी सुधार हुआ. शोधकर्ताओं ने ताजा विश्लेषण को एंडोक्रिनोलॉजी फोर सोसायटी के सालाना राष्ट्रीय कॉफ्रेंस के आधार पर पूरा किया. उन्होंने पाया कि कॉफ्रेंस का आयोजन चिकित्सकों और शोधकर्ताओं के पेशेवराना क्षमता को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>लैंगिक संतुलन के बावजूद महिलाओं की कॉफ्रेंस में कम भागीदारी</strong></p> <p style="text-align: justify;">रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ दशकों के दौरान लगभग आधे मेडिकल छात्रों में महिलाएं शामिल हैं, बावजूद इसके मेडिकल फैकल्टी के पदों पर उनका प्रतिनिधित्व साफ तौर पर कम है. इम्पीरियल कॉलेज लंदन की वरिष्ठ शोधकर्ता डॉक्टर विक्टोरिया सलेम ने टिप्पणी की कि इस असंतुलन को अब तक ठीक कर लिया जाना चाहिए था. उन्होंने कहा, "सिस्टम में बहुत अधिक जड़ता है जिसे रोल मॉडल के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है. अगर हमारे पास ज्यादा महिलाएं बात करनेवाली, प्रवक्ता और विशेषज्ञों के तौर पर काम करनेवाली नहीं होंगी, तो हम अगली पीढी को प्रेरित करने नहीं जा रहे हैं."</p> <p style="text-align: justify;"><strong>पुरुषों के सवाल 2 घंटे 54 मिनट, महिलाओं के सवाल 56 मिनट चले</strong></p> <p style="text-align: justify;">सलेम और उनके सहयोगियों ने 2017 और 2018 में आयोजित एंडोक्रिनोलॉजी फोर सोसायटी के विभिन्न सत्रों से आए सवालों और टिप्पणियों का विश्लेषण किया. हर साल, सम्मेलन में करीब 1,000 प्रतिनिधियों ने भाग लिया- जिनमें से लगभग आधी महिलाएं थीं. दोनों सत्रों की कार्यवाहियों में पुरुषों के सवाल दो घंटे 54 मिनट चले जबकि महिलाओं के सवाल 56 मिनट चले. लैंगिक संतुलन के बावजूद शोधकर्ताओं ने पाया कि महिलाओं ने कॉफ्रेंस में छोटे और कम सवाल पूछे, करीब 5 सवाल या टिप्पणियों में से मात्र एक महिलाओं की तरफ से आया. सलेम ने कहा, "इससे पता चलता है पुरुषों और महिलाओं के व्यवहार में अभी भी स्पष्ट फर्क है, चाहे इसका कारण कुछ भी हो, सोशल इंजीनियरिंग हो या जीव विज्ञान. हमें इस मामले को जरूर हल करना चाहिए और उन माध्यमों को शामिल करने पर ध्यान देना चाहिए जो विज्ञान के लिए समान पहुंच को सुनिश्चित करते हैं."</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कॉफ्रेंस में विविधता, समानता लाने के लिए शोधकर्ता प्रयास में जुटे</strong></p> <p style="text-align: justify;">2018 में शोधकर्ताओं ने कॉफ्रेंस में महिला भागीदारी को संतुलित करने के उद्देश्य से प्रयास किए. उन्होंने कॉफ्रेंस के आयोजकों के साथ ज्यादा महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने को सुनिश्चित करने पर काम किया. उन्होंने पाया कि महिलाओं के सत्र की अध्यक्षता करने से महिला दर्शकों के सवालों में बढ़ोतरी हुई. उसके अलावा, अगर कोई महिला सबसे पहले सवाल पूछती, तो एक महिला की तरफ से बाद की भागीदारी की संभावना बहुत बार बढ़ गई. रिसर्च के नतीजों से पता चलता है कि मामूली बदलाव का बड़ा असर हो सकता है. उसके आधार पर शोधकर्ता कॉफ्रेंसों को और अधिक सुलभ बनाने के लिए बदलाव करने जा रहे हैं, जिससे विविधता और समानता लाई जा सके.</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Health Tips: मानसून में हड्डियों को सेहतमंद रखने के लिए इन फूड्स को बनाएं डाइट का हिस्सा" href="https://ift.tt/2WEnrpH" target="">Health Tips: मानसून में हड्डियों को सेहतमंद रखने के लिए इन फूड्स को बनाएं डाइट का हिस्सा</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Fruits In Rainy Season: बारिश के मौसम में ये 5 फल जरूर खाएं, स्वस्थ और सेहतमंद रहेंगे" href="https://ift.tt/3rGSTz5" target="">Fruits In Rainy Season: बारिश के मौसम में ये 5 फल जरूर खाएं, स्वस्थ और सेहतमंद रहेंगे</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/37dEhxw
कोविड से उबरने के बाद बाल झड़ने की समस्या में इजाफा, डॉक्टरों ने बताया कारण और उपाय
<p style="text-align: justify;">कोविड-19 से उबरने के बाल झड़ने की शिकायत करनेवालों की संख्या बहुत ज्यादा हो गई है. दिल्ली में इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों ने इस मामले पर चिंता जताई है. प्रवक्ता के मुताबिक, आम तौर पर एक हफ्ते में बाल गिरने की शिकायत के 4-5 मामले दर्ज किए जाते थे. लेकिन मध्य मई से शिकायत बढ़ने लगी और एक रिपोर्ट बताती है कि उसके बाद से मामलों की संख्या दोगुनी हो गई.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>पोस्ट कोविड बाल क्यों झड़ते हैं?</strong></p> <p style="text-align: justify;">डॉक्टरों के मुताबिक, तनाव, पोषण की कमी और कोविड-19 से सूजन जैसे कुछ कारण बीमारी के पीछे हैं. सामान्य तौर पर कोविड-19 के मरीज को ठीक होने के एक महीने बाद बाल गिरने की समस्या का सामना होता है. डॉक्टरों का कहना है कि कुछ मामलों में संक्रमण काल के दौरान भी बाल झड़ना देखा गया. खानपान की आदतों में बदलाव से पोषण की कमी, संक्रमण के दौरान बुखार, तनाव, चिंता, हार्मोन में अचानक तब्दीली, कोविड-19 के बाद लगातार सूजन की प्रतिक्रिया अस्थायी बाल गिरने के कुछ कारण हैं.</p> <p style="text-align: justify;">इंद्रप्रस्थ अस्पताल में कॉस्मेटिक और प्लास्टिक सर्जरी के सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर शाहीन नूरयेजदान ने कहा, "हमने बाल गिरने से जुड़ी समस्याओं की शिकायत करनेवाले मरीजों की संख्या में दोगुनी बढ़ोतरी देखी है. उसमें पोस्ट कोविड सूजन का प्रमुख योगदान रहा है. खराब पोषण सेवन से होनेवाली कमी, वजन में अचानक बदलाव, हार्मोन का असंतुलन और कम विटामिन डी और बी 12 लेवल कोविड-19 के बाद बड़ी संख्या में बाल गिरने की कुछ प्रमुख वजह हैं."</p> <p style="text-align: justify;">कॉस्मेटॉलोजी और प्लास्टिक सर्जरी के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर कुलदीप सिंह ने बताया कि कोविड-19 के बाद बाल गिरना स्वभाव में अस्थायी है और उसका कारण टेलोजेन एफ्लुवियम है. ये कोविड-19 के दौरान बुखार और दूसरे लक्षणों से पीड़ित होने के बाद शरीर को झटके का नतीजा है. उन्होंने कहा कि आम तौर पर एक शख्स रोजाना 100 बाल तक खो सकता है, लेकिन ये टेलोजेन एफ्लुवियम के कारण रोजाना 300-400 तक बढ़ सकता है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>बाल झड़ने को कैसे करें कम</strong></p> <p style="text-align: justify;">डॉक्टरों का सुझाव है कि कोविड-19 से ठीक होने के बाद विटामिन्स और आयरन के प्राकृतिक खाद्य स्रोतों के साथ पौष्टिक डाइट खाया जाना चाहिए. आयरन की कमी बाल झड़ने को तेज कर सकती है, जबकि प्रोटीन से भरपूर, संतुलित डाइट बाल गिरने की समस्या को कम करती है. अगर पांच से छह सप्ताह तक पौष्टिक डाइट खाने के बाद भी अत्यधिक बालों का झड़ना बरकरार रहता है, तो डॉक्टर से मिलना चाहिए. लिहाजा, जरूरी है कि तनाव मुक्त रहें, मेडिटेशन करें, स्वस्थ भोजन खाएं, प्राकृतिक पौष्टिक सप्लीमेंट्स लें, बालों के लिए केमिकल्स से बचें और सुस्त लाइफस्टाइल का पालन करने से दूर रहें.</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Health Tips: मानसून में हड्डियों को सेहतमंद रखने के लिए इन फूड्स को बनाएं डाइट का हिस्सा" href="https://ift.tt/2WEnrpH" target="">Health Tips: मानसून में हड्डियों को सेहतमंद रखने के लिए इन फूड्स को बनाएं डाइट का हिस्सा</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Fruits In Rainy Season: बारिश के मौसम में ये 5 फल जरूर खाएं, स्वस्थ और सेहतमंद रहेंगे" href="https://ift.tt/3rGSTz5" target="">Fruits In Rainy Season: बारिश के मौसम में ये 5 फल जरूर खाएं, स्वस्थ और सेहतमंद रहेंगे</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3rKyHMv
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