Saturday, July 31, 2021

Chanakya Niti: इन बातों का रखें ध्यान, घर में हमेशा बना रहेगा लक्ष्मी जी का वास

<p style="text-align: justify;"><strong>Chanakya Niti</strong>: शास्त्रों में मां लक्ष्मी धन धान्य की देवी बताई गई हैं. मान्यता है कि जिस व्यक्ति पर मां लक्ष्मी की कृपा होती है, उसके घर पर धन-संपदा की कमी नहीं होती और अन्न भंडार भरे रहते हैं. लेकिन अगर लक्ष्मीजी रूठ जाएं तो व्यक्ति का पूरा जीवन गरीबी और बीमारी में बीतता है. घर में तनाव-क्लेश खत्म नहीं हो सकता है.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;">1. आचार्य चाणक्य के मुताबिक मूर्खों से बहस कर खुद को बुद्धिमान साबित करने या उनसे प्रशंसा सुनने से बेहतर है कि किसी ज्ञानी की डांट सुन ली जाए, क्योंकि उसकी डांट भी काफी कुछ सिखा देती है. चाणक्य का मानना था कि जिस घर में ज्ञानियों की कद्र होती है, मान सम्मान दिया जाता है, वहां मां लक्ष्मी खुद चलकर आती हैं.</p> <p style="text-align: justify;">2. जहां अन्न भंडारण सही ढंग से होता है और गरीब असहायों की मदद की जाती है, वहां लक्ष्मी की कृपा कभी खत्म नहीं होती है. जरूरतमंदों की मदद, अन्न का सम्मान और पशु पक्षियों को दाना खिलाने वालों के घर भी मनचाही तरक्की करता है.</p> <p style="text-align: justify;">3. घर की लक्ष्मी परिवार में रह रही महिलाएं मानी जाती हैं, जिस घर में उनका सम्मान होता है. पति और पत्नी के बीच एक दूसरे के प्रति आदर भाव होता है, वहां हमेशा शांति और धन लक्ष्मी बनी रहती हैं. ऐसी जगह पर धन की कमी कभी नहीं होती है.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;">4. नशा, द्वेष और भ्रष्टाचार की कमाई कभी नहीं रुक सकती. आचार्य कहते हैं कि गलत तरीके से कमाई गई कोई भी रकम आपको सदकमों में साथ नहीं आ सकती है. गलत तरीके से कमाई रकम हमेशा आपको बिना कोई लाभ दिए हाथ से निकल जाएगी.</p> <p style="text-align: justify;">&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;">इन्हें पढ़ें<br /><a title="Sawan 2021: तक्षकेश्वर नाथ मंदिर को क्यों कहा जाता है नागों का तीर्थ" href="https://ift.tt/3lnVHjc" target="">Sawan 2021: तक्षकेश्वर नाथ मंदिर को क्यों कहा जाता है नागों का तीर्थ</a></p> <p style="text-align: justify;"><a title="Kamika Ekadashi: सावन कामिका एकादशी दिलाती है पापों से छुटकारा" href="https://ift.tt/2V8oYDZ" target="">Kamika Ekadashi: सावन कामिका एकादशी दिलाती है पापों से छुटकारा</a></p> <p style="text-align: justify;">&nbsp;</p> lifestyle https://ift.tt/3zMcqRs

Healthy Liver: लिवर को डैमेज होने से बचाता है अश्वगंधा, फैटी लिवर की समस्या दूर करने में भी करता है मदद

<p style="text-align: justify;"><strong>Home Remedies For Liver:</strong> हम जो भी खाते-पीते हैं, सांस लेते हैं उससे हमारा लिवर प्रोसेस करता है. इसीलिए लिवर को शरीर का महत्वपूर्ण अंग माना जाता है. लिवर बॉडी से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का काम करता है. अगर शरीर में कहीं भी ब्लड का क्लॉट बनाने की जरूरत पड़ती है तो लिवर ही उसका काम करता है. हॉर्मोन्स को रेगुलेट करने में भी लिवर अहम रोल निभाता है. ऐसे में अगर आपको लिवर से जुड़ी परेशानी है या किसी भी तरह आपके लिवर को क्षति पहुंची है तो ये आपके स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकता है. कई रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि कोरोना वायरस से लिवर भी प्रभावित हो रहा है. ऐसे में आपको अपने लिवर को स्वस्थ रखने पर ध्यान देना चाहिए.</p> <p style="text-align: justify;">आज हम आपको एक आयुर्वेदिक हर्ब बता रहे हैं जो लिवर को स्वस्थ रखने में बहुत उपयोगी है. लिवर को हेल्दी रखने से लेकर फैटी लिवर की समस्या होने पर अश्वगंधा बहुत फायदेमंद है. आइये जानते हैं कि अश्वगंधा किस तरह लिवर को फायदा पहुंचाता है.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>लिवर को स्वस्थ रखता है अश्वगंधा</strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong>लिवर डैमेज से बचाता है-</strong> ज्यादातर एंटी-बायोटिक दवाएं लिवर को काफी नुकसान पहुंचाती हैं. ऐसे में अगर आप अश्वगंधा का सेवन करते हैं तो ये आपके लिवर को डैमेज होने से बचाता है. अश्वगंधा लिवर की कार्य प्रणाली को भी अच्छा बनाता है.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>लिवर को टॉक्सिन्स से सुरक्षित रखता है-</strong> आजकल की लाइफस्टाइल में अनहेल्दी खाने से शरीर में टॉक्सिन्स जमा हो जाते हैं. ये टॉक्सिन्स लिवर में एकट्ठा हो जाते हैं और लिवर फंक्शन को प्रभावित करते हैं. लेकिन अश्वगंधा का सेवन करने से लिवर हानिकारक टॉक्सिन्स के प्रभाव से बचता है. अश्वगंधा खाने से लिवर डिटॉक्स होता है.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>फैटी लिवर की समस्या कम करता है- &nbsp;</strong>जो लोग एल्कोहॉल का सेवन ज्यादा करते हैं उनके लिवर पर इसका हानिकारक असर पड़ता है, जिससे फैटी लिवर की समस्या हो जाती है. अगर आपको भी फैटी लिवर की समस्या है तो अश्वगंधा इस समस्या को कम करता है. अश्वगंधा बैली फैट, हाई कोलेस्ट्रॉल और पीसीओएस की समस्या में भी फायदा करता है.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>सूजन कम करता है-</strong> अगर आपके लिवर में सूजन है तो आपको अश्वगंधा का सेवन करना चाहिए. इसमें एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण पाए जाते हैं जिससे लिवर की सूजन कम हो जाती है. लिवर को हेल्दी रखने के लिए अश्वगंधा काफी फायदेमंद है. आपको अश्वगंधा का सेवन जरूर करना चाहिए. आप रात को सोने से पहले दूध के साथ अश्वगंधा का सेवन कर सकते है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer:</strong> इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों की एबीपी न्यूज़ पुष्टि नहीं करता है. इनको केवल सुझाव के रूप में लें. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें:</strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong> <a title="मानसून में हड्डियों को सेहतमंद रखने के लिए इन फूड्स को बनाएं डाइट का हिस्सा" href="https://ift.tt/2WEnrpH" target="">मानसून में हड्डियों को सेहतमंद रखने के लिए इन फूड्स को बनाएं डाइट का हिस्सा</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3ffs5B4

Safalta Ki Kunji : सफलता के लिए एकाग्रता से अवसरों को बनाएं आसान 

<p style="text-align: justify;"><strong>Safalta ki kunji :</strong> जीवन में सही अवसर, कठिन परिश्रम और शानदार परिणाम से ही सफलता का रास्ता खुलता है. मगर इन सबके बीच सबसे जरूरी बात वो है, जिसके जरिए अपने काम में फोकस करके ही शानदार परिणाम दे सकता है. जी हां, इस सफल सूत्र का नाम है मन की एकाग्रता. सिर्फ धार्मिक ही नहीं, इसके मानसिक और भौतिक पहलू भी बेहद महत्वपूर्ण हैं.</p> <p style="text-align: justify;">1. विद्वान कहते हैं कि एकाग्र मन हमें मिलने वाले अवसरों को अधिक आकर्षित करता है. इस कारण हम लक्ष्य पर खुद को केंद्रित करने में अधिक सक्षम बन पाते हैं. एकाग्र होकर हमारा मन हमारे वश में होता है, जिसके जरिए हमारी अंदर की छुपी शक्तियां जागृत होती हैं और हमारी खूबियां और क्षमताएं विकसित होती हैं.</p> <p style="text-align: justify;">2. मन को एकाग्र करने के कई तरीके हैं, जिसमें सबसे अधिक महत्वपूर्ण है ध्यान का सांस के साथ जोड़ना. ऐसा करने भर से मन पर अपना नियंत्रण बढ़ता है. किसी काम में ऐसा लगे कि अभी सांस पर ध्यान नहीं रखा जा सकता है तो उन कामों पर अपना ध्यान केंद्रित करें.</p> <p style="text-align: justify;">3. अधिक सोच विचार के बजाय दिनभर में किए जाने वाले कामों की लिस्ट बनाएं. प्राथमिकता के आधार पर कामों का सीक्वेंस रखें. कभी तात्कालिक वजहों से ध्यान भंग हो तो कुछ देर काम छोड़ दें, जबरदस्ती न करें.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;">4. ध्यान या एकाग्रता का अंतर भी समझने से एकाग्रता को हासिल करने में आसानी होगी. एकाग्रता किसी चीज़ पर ध्यान केंद्रित करने या पूरा ध्यान देने की क्रिया या शक्ति के रूप में परिभाषित की जा सकती है जबकि ध्यान में मन को केंद्रित करने के लिए विभिन्न तकनीक-प्रथाएं शामिल हो सकती हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें-&nbsp;</strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Sawan 2021: तक्षकेश्वर नाथ मंदिर को क्यों कहा जाता है नागों का तीर्थ" href="https://ift.tt/3lnVHjc" target="">Sawan 2021: तक्षकेश्वर नाथ मंदिर को क्यों कहा जाता है नागों का तीर्थ</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Kamika Ekadashi: सावन कामिका एकादशी दिलाती है पापों से छुटकारा" href="https://ift.tt/2V8oYDZ" target="">Kamika Ekadashi: सावन कामिका एकादशी दिलाती है पापों से छुटकारा</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3zRK2NK

48 फीसदी पैरेंटस टीकाकरण के बिना नहीं भेजना चाहते अपने बच्चों को स्कूल, सर्वे में खुलासा

<p style="text-align: justify;">करीब 48 फीसद अभिभावक अपने बच्चों को कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण कराए बिना स्कूल भेजने की इच्छा नहीं रखते हैं. 30 फीसद ने बताया कि कोविड-19 के मामले गिरकर शून्य हो जाएंगे, तब बच्चों को स्कूल भेजेंगे. ये खुलासा एक नए सर्वे में हुआ है. बच्चों को स्कूल भेजने पर अभिभावकों की तरफ से जाहिर की गई हिचकिचाहट के बीच कम्यूनिटी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने 1 अगस्त से क्लासेस की फिजिकल रूप से शुरुआत पर अभिभावकों की राय को समझने के लिए सर्वे किया.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>क्या है बच्चों को स्कूल भेजने पर अभिभावकों की राय?</strong></p> <p style="text-align: justify;">रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में शामिल 48 फीसद अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार नहीं थे जब तक कि उनका टीकाकरण नहीं हो जाता. लोकल सर्किल्स के संस्थापक सचिन टपारिया ने कहा कि 21 फीसद अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजन को तैयार दिखे जबकि सर्वे में शामिल एक फीसद ने बताया कि उनकी राय इस मामले पर कुछ नहीं है. सर्वे में देशभर के 361 जिलों के &nbsp;32,000 अभिभावकों की राय ली गई थी. नतीजे से पता चला कि 30 फीसद अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार हैं अगर कोरोना वायरस के मामले उनके जिलों में कम हो कर शून्य हो जाए.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>बिना टीकाकरण के 48 फीसद बच्चों को नहीं भेजना चाहते- सर्वे</strong></p> <p style="text-align: justify;">सर्वे में शामिल प्रतिभागियों की 68 फीसद संख्या पुरुषों की थी जबकि महिलाओं की तादाद 32 फीसद. वर्चुअल क्लास की तरफ वापसी से पढ़ने-पढ़ाने की कई समस्याएं हुई हैं विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र में. बड़ी संख्या में छात्रों को डेटा कनेक्टिविटी और स्मार्टफोन और लैपटॉप उपलब्ध नहीं हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने मंगलवार को बीजेपी सांसदों से कहा था कि बच्चों के लिए कोविड टीकाकरण की जल्द शुरुआत होने की संभावना है. देश भर में स्कूलों को पिछले साल मार्च में कोरोना का प्रसार रोकने के लिए बंद करने का आदेश दिया गया था.</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="दुनिया भर में डिमेंशिया के मामले 2050 तक हो सकते हैं तीन गुना, जानिए बचाव के उपाय" href="https://ift.tt/3ljJFYe" target="">दुनिया भर में डिमेंशिया के मामले 2050 तक हो सकते हैं तीन गुना, जानिए बचाव के उपाय</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Coronavirus: डेल्टा वेरिएन्ट चिकनपॉक्स की तरफ फैल सकता है, पैदा कर सकता है ज्यादा गंभीर बीमारी- रिपोर्ट" href="https://ift.tt/3ytDuVv" target="">Coronavirus: डेल्टा वेरिएन्ट चिकनपॉक्स की तरफ फैल सकता है, पैदा कर सकता है ज्यादा गंभीर बीमारी- रिपोर्ट</a></strong></p> <p>&nbsp;</p> lifestyle https://ift.tt/3xk3yki

दुनिया भर में डिमेंशिया के मामले 2050 तक हो सकते हैं तीन गुना, जानिए बचाव के उपाय

<p style="text-align: justify;">याद्दाश्त, समस्या हल करना और सोचने-समझने की क्षमता का कम होने को बताने के लिए डिमेंशिया शब्द का प्रयोग किया जाता है. दुनिया भर में उम्र दराज लोगों के बीच निर्भरता और विकलांगता के प्रमुख कारणों में से ये एक है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दुनिया भर में करीब पांच करोड़ लोगों को डिमेंशिया है, और करीब एक करोड़ नए मामले हर साल आ रहे हैं. इसको लेकर एक नई रिसर्च में भविष्यवाणी की गई है कि डिमेंशिया पीड़ितों की वैश्विक संख्या 2050 तक करीब तीन गुना तक हो सकती है. 27 जुलाई को अल्जाइमर एसोसिएशन इंटरनेशल कांफ्रेंस में पेश किए गए नए डेटा के मुताबिक, अनुमान लगाया गया है कि दुनिया भर में 15 करोड़ मिलियन से ज्यादा लोग डिमेंशिया के साथ रह रहे होंगे. 2019 में 5 करोड़ 57 लाख से बढ़ कर 2050 में संख्या के 15 से ज्यादा होने का अनुमान लगाया गया है.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>डिमेंशिया के लिए उम्र जोखिम कारक</strong><br />डिमेंशिया के लिए उम्र सबसे मजबूत जोखिम कारक है और इस प्रकार ये मुख्य रूप से बुजुर्गों को प्रभावित करती है. अल्जाइमर एसोसिएशन के मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी मारिया कारिलो के हवाले से कहा गया, "मोटापा, डायबिटीज और सुस्त लाइफस्टाइल समेत युवाओं में डिमेंशिया के जोखिम कारक तेजी से बढ़ रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, 65 साल की उम्र से पहले लक्षणों की शुरुआत डिमेंशिया के नौ फीसद मामलों में योगदान देती है. डिमेंशिया विभिन्न बीमारियों और चोटों के नतीजे में हो सकती है जो दिमाग को जैसे अल्जाइमर या स्ट्रोक को प्रभावित करती है.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>डिमेंशिया की जल्दी शुरुआत में बढ़ोतरी</strong><br />यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन स्कूल ऑफ मेडिसीन में शोधकर्ता एम्मा निकोलस और उनके साथियों ने वैश्विक डिमेंशिया के प्रसार का अध्ययन किया. इसके लिए, उन्होंने 1999 और 2019 के बीच इस्तेमाल किए गए डेटा को इस्तेमाल किया. उन्होंने पाया कि हर साल अनुमानित हर 100,000 लोगों में से 10 को डिमेंशिया 65 साल से पहले यानी जल्दी होती है. इसका मतलब हुआ वैश्विक सतह पर प्रति वर्ष डिमेंशिया की जल्दी शुरुआत के 350,000 नए मामले. कारिलो ने कहा कि अल्जाइमर की रोकथाम या धीमा करने, रोकने के लिए प्रभावी इलाज नहीं होने के चलते संख्या 2050 के बाद बढ़ेगी.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>डिमेंशिया का खतरा कैसे हो सकता कम&nbsp;</strong><br />रिसर्च के हवाले से विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया कि लोग नियमित व्यायाम करें, धूम्रपान नहीं करें, अल्कोहल के नुकसानदेह इस्तेमा्ल से परहेज करें, वजन पर नियंत्रण पाएं, स्वस्थ डाइट खाकर और स्वस्थ ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रोल और शुगर लेवल बनाए रख कर डिमेंशिया का खतरा कम कर सकते हैं. डिमेंशिया के अतिरिक्त जोखिम कारक में डिप्रेशन, शिक्षा की कमी, सामाजिक आइसोलेशन शामिल हैं. इन क्षेत्रों पर भी डिमेंशिया के खतरे को कम करने के लिए ध्यान देने की जरूरत है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="मेडिकल कॉफ्रेंस में महिलाओं की कम भागीदारी का क्या है कारण, रिसर्च में हुआ खुलासा" href="https://ift.tt/37dEhxw" target="">मेडिकल कॉफ्रेंस में महिलाओं की कम भागीदारी का क्या है कारण, रिसर्च में हुआ खुलासा</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="कोविड से उबरने के बाद बाल झड़ने की समस्या में इजाफा, डॉक्टरों ने बताया कारण और उपाय" href="https://ift.tt/3rKyHMv" target="">कोविड से उबरने के बाद बाल झड़ने की समस्या में इजाफा, डॉक्टरों ने बताया कारण और उपाय</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3ljJFYe

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