Tuesday, July 6, 2021
Guru Purnima : वर्षा ऋतु में ही गुरु पूर्णिमा मनाने की जानिए तीन बड़ी वजहें
<p style="text-align: justify;"><strong>Guru Purnima :</strong> सनातन धर्म में गुरु की महिमा माता-पिता के बाद सर्वोत्तम मानी गई है. आदिगुरु वेदव्यास की जयंती यानी आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा, व्यास पूर्णिमा और मुडिया पूनो कहा जाता है. माना जाता है कि जब पाप-अज्ञानता रूपी अंधेरा पूरी धरा और व्यक्ति को लगभग अंधा कर देता है तो गुरु चंद्रमा के रूप में उन्हें प्रकाश देते हुए सत्य का मार्ग दिखाते हैं. मगर इसका वर्षा ऋतु से खास संबंध है. </p> <p style="text-align: justify;">गुरु पूर्णिमा खास तौर पर वर्षा ऋतु में ही मनाने की खास वजह यह है कि इस समय वातावरण में न अधिक गर्मी होती है और न अधिक सर्दी. यह समय अध्ययन और अध्यापन और ज्ञान अर्जन के लिए पूरी तरह अनुकूल है. एकाग्रता बढ़ाने के साथ स्मरण शक्ति तीक्ष्ण होती है. यही वजह है कि शिष्य ज्ञान, शांति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने के लिए यही समय चुनते हैं. गुरु से मंत्र पाने के लिए यह दिन सबसे अच्छा माना जाता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>देश में ऐसे होती है गुरु पूर्णिमा</strong><br />बंगाल में साधु इस दिन सिर मुंडाकर परिक्रमा के लिए जाते हैं तो ब्रज क्षेत्र में इसे मुड़िया पूनो नाम से मनाया जाता है, इस दिन लोग गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करते हैं. एमपी के खंडवा में धूनी वाले बाबा की समाधि और उत्तराखंड के भवाली में बाबा नीम करौली के आश्रम में श्रद्धालुओं की खूब भीड़ उमड़ती है.</p> <ul> <li style="text-align: justify;">माता-पिता के आशीर्वाद से करें दिन की शुरुआत</li> <li style="text-align: justify;">गुरु पूर्णिमा के दिन की शुरुआत जीवन के प्रथम गुरु माता-पिता के आशीर्वाद से करनी चाहिए.</li> <li style="text-align: justify;">विद्यालयों और संस्थानों में छात्र गुरुजनों को सम्मान उपहार देकर आशीष प्राप्त करते हैं.</li> <li style="text-align: justify;">कई लोग अपने ईष्ट देव की आराधना कर अपने गुरु से आशीर्वाद मांगते हैं.</li> <li style="text-align: justify;">इस दिन भगवान वेद व्यास की पूजा कर हलवा प्रसाद बांटा जाना चाहिए.</li> <li style="text-align: justify;">संभव हो तो इस दिन किसी गरीब को भरपेट भोजन जरूरत कराना चाहिए.</li> <li style="text-align: justify;">गुरु ध्यान या दर्शन करें. उनसे मिलना संभव न हो तो मन से प्रणाम करें.</li> </ul> <p style="text-align: justify;"><strong>धर्मग्रन्थों की पूजा भी शुभफलदायक</strong><br />माना जाता है कि धर्मग्रंथ भी साक्षात् गुरु हैं. पूर्णिमा के दिन वेद व्यासजी के ग्रन्थों को पढ़कर जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए. रामचरितमानस, श्रीमद्भगवद्गीता पर पुष्प चढ़ाएं और इनका पाठ करें.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>इन्हें पढ़ें : </strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Ekadashi Paran : एकादशी व्रत में हरिवासर के समय पारण क्यों नहीं करनी चाहिए, जानिए" href="https://ift.tt/3hEIrmS" target="">Ekadashi Paran : एकादशी व्रत में हरिवासर के समय पारण क्यों नहीं करनी चाहिए, जानिए</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Hanuman Pooja: केले या पान के पत्ते पर चढ़ाए प्रसाद से बढ़ता है हनुमान पूजा का फल" href="https://ift.tt/3wmUaf7" target="">Hanuman Pooja: केले या पान के पत्ते पर चढ़ाए प्रसाद से बढ़ता है हनुमान पूजा का फल</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3dONgJj
Raksha Bandhan : इंद्र ने तप से मिला रक्षासूत्र बांधकर रोका दानवों का प्रकोप, जानिए किस्सा
<p style="text-align: justify;"><strong>RakshaBandhan :</strong> पुराणों के मुताबिक एक बार दानवों ने इंद्रलोक पर कब्जा करने के लिए देवताओं पर आक्रमण किया तो अपनी शक्ति से दानवों ने देवताओं को लगभग हराने की स्थिति में ला दिया. यह देखकर खुद असुरराज पुलोमा की पुत्री और देवराज इंद्र की पत्नी शुचि बेहद घबरा उठीं. उन्होंने पति इंद्र के प्राणों की रक्षा के लिए कठोर तप शुरू कर दिया. इससे उन्हें फल के तौर पर एक रक्षासूत्र मिला, जिसे शनिदेव ने श्रावण पूर्णिमा के दिन देवराज की कलाई पर बांध दिया. मान्यता है कि इस रक्षासूत्र के बांधते ही देवताओं की शक्ति चार गुना हो गई और भयंकर युद्ध में देवताओं ने दानवों को बुरी तरह रौंदकर विजयश्री प्राप्त की.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>लक्ष्मीजी ने पति की रक्षा के लिए वामन को बांधी राखी</strong><br />वामन पुराण की मान्यता के अनुसार जब विष्णुजी ने राजा बलि से उनका सबकुछ तीन पग में ही ले लिया. सिर पर पांव रखने से बलि पाताल में धंस गए. मगर उन्होंने वरदान के तौर पर भगवान विष्णु से उसके पाताल लोक में रहने की प्रार्थना की. मजबूरन विष्णुजी उनके साथ पाताल में जाना पड़ा, लेकिन इससे लक्ष्मीजी अत्यधिक व्याकुल हो गईं और वामन से भगवान को छुड़ाने के लिए रूप बदकर पातालपुरी जा पहुंचीं. यहां उन्होंने वामन को राखी बांधकर अपना भाई बना लिया. वामन ने रक्षा सूत्र बांधने के एवज में कुछ मांगने को कहा तो लक्ष्मीजी ने चतुराई से विष्णु को बैकुंठ भेजने की मांग रख दी. बहन की इच्छा देखते हुए वामन ने विष्णुजी को बैंकुठ जाने दिया. साथ ही यह वादा भी लिया कि चतुर्मास अवधि में विष्णुजी पाताल में ही निवास करेंगे. कहा जाता है कि तब से विष्णुजी चार माह तक पाताल में ही निवास रहते हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>मंत्र उच्चारण के साथ बांधें राखी</strong><br />पुराणों के अनुसार रक्षासूत्र उन सभी लोगों की कलाई पर बांधा जा सकता है, जिनकी आप रक्षा करना चाहते हैं. ध्यान रखने वाली बात है कि सिर्फ रक्षासूत्र बांधने से लाभ नहीं मिलता. इसे बांधते समय मंत्रों का सही उच्चारण भी जरूरी है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>राखी मंत्र :</strong><br />येन बद्धो बली राजा, दानवेंद्रो महाबलः!<br />तेनत्वां प्रतिबध्नामि, रक्षे! माचल! माचल!!</p> <p style="text-align: justify;"><strong>इन्हें पढ़ें : </strong><strong><a title="Ekadashi Paran : एकादशी व्रत में हरिवासर के समय पारण क्यों नहीं करनी चाहिए, जानिए" href="https://ift.tt/3hEIrmS" target="">Ekadashi Paran : एकादशी व्रत में हरिवासर के समय पारण क्यों नहीं करनी चाहिए, जानिए</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Hanuman Pooja: केले या पान के पत्ते पर चढ़ाए प्रसाद से बढ़ता है हनुमान पूजा का फल" href="https://ift.tt/3wmUaf7" target="">Hanuman Pooja: केले या पान के पत्ते पर चढ़ाए प्रसाद से बढ़ता है हनुमान पूजा का फल</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"> </p> lifestyle https://ift.tt/36dwTBJ
Krishan Leela : श्रीकृष्ण ने धरती पर बंद करवा दी थी इंद्र की उपासना
<p style="text-align: justify;"><strong>Krishan Leela :</strong> हिन्दू धर्मग्रंथों के मुताबिक इंद्र किसी देवता का अपना नाम न होकर उस पदवी को कहते हैं, जो स्वर्गलोक में देवताओं के राजा की पदवी है. इस गद्दी पर जो भी विराजमान होता है उसे इंद्र की उपाधि मिलती थी. मान्यता है कि अब तक 14 इंद्र हो चुके हैं, जिनमें यज्न, विपस्चित, शीबि, विधु, मनोजव, पुरंदर, बाली, अद्भुत, शांति, विश, रितुधाम, देवास्पति और सुचि आदि हैं.</p> <p style="text-align: justify;">यह भी माना जाता है कि इंद्र के पद पर जो भी बैठता है, उसे हमेशा सिंहासन छिनने का डर रहा, जिसकी वजह से वह किसी साधु और राजा खुद को ताकतवर नहीं बनने देता था. ऐसी कोशिश करने वालों को वह अप्सराओं से मोहित कर पथभ्रष्ट कर देता या राजाओं के यज्ञ के घोड़े चुरा लेता. ऐसी ही कृत्यों के चलते श्रीकृष्ण ने द्वापर में अवतार लिया तो ब्रज में इंद्र की पूजा ही बंद करवा दी.</p> <p style="text-align: justify;">कृष्ण के अवतार से पहले ब्रज में इंद्रोत्सव पूरे धूमधाम से मनता था. समय के साथ कृष्ण बड़े हुए तो बृजवासियों से कहा कि आपको ऐसे किसी व्यक्ति की पूजा नहीं करनी चाहिए, जो न ईश्वर हो, न ईश्वरतुल्य. इसके बजाय गाय की पूजा करनी चाहिए, जिससे सभी का जीवन चलता है. कृष्ण ने बृजवासियों को गोवर्धन पर्वत की उपासना के लिए प्रेरित किया. बृजवासियों ने कहा कि इंद्र की पूजा बंद की गई तो वे क्रोधित होकर बारिश बंद कर देंगे तो गायों को चारा कैसे मिलेगा. इस पर कृष्ण ने कहा, हम किसी ऐसे देवता की पूजा क्यों करें, जो हमें डराता है. हमें चढ़ावे और पूजा करनी ही है तो गोपोत्सव मनाएं, इंद्रोत्सव नहीं. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>भड़के इंद्र ने ला दिया जलप्रलय</strong></p> <p style="text-align: justify;">जब इसका पता देवराज इंद्र को चला तो उन्होंने बादलों से ब्रजवासियों पर प्रलय की तरह बारिश कराने का आदेश दिया, जिससे लोग डूब जाएं और क्षमा मांगने पर मजबूर हो जाएं. इंद्र के आदेश पर मूसलाधार बारिश शुरू हो गई, जो कई दिन तक चली. ब्रजवासी परेशान हो गए तो श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत अपनी अंगुली पर उठा लिया और सभी ब्रजवासियों को नीचे बुला लिया. पर्वत के नीचे आने पर ब्रजवासियों पर वर्षा-गर्जना का कोई असर नहीं हुआ. परेशान इंद्र ने श्रीकृष्ण से युद्ध छेड़ दिया, लेकिन जब उन्हें श्रीकृष्ण के अवतार होने का पता चला तो क्षमा मांग ली. मगर तब से धरती पर इंद्र की पूजा बंद हो गई और गोवर्धन पूजन शुरू हो गया. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>इन्हें पढ़ें : </strong><br /><strong><a title="Ekadashi Paran : एकादशी व्रत में हरिवासर के समय पारण क्यों नहीं करनी चाहिए, जानिए" href="https://ift.tt/3hEIrmS" target="">Ekadashi Paran : एकादशी व्रत में हरिवासर के समय पारण क्यों नहीं करनी चाहिए, जानिए</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Hanuman Pooja: केले या पान के पत्ते पर चढ़ाए प्रसाद से बढ़ता है हनुमान पूजा का फल" href="https://ift.tt/3wmUaf7" target="">Hanuman Pooja: केले या पान के पत्ते पर चढ़ाए प्रसाद से बढ़ता है हनुमान पूजा का फल</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"> </p> lifestyle https://ift.tt/3hCE7EM
Sawan 2021: सावन का पहला सोमवार, भगवान शिव को ऐसे करें प्रसन्न, इन बातों का रखें ध्यान
<p style="text-align: justify;"><strong>Sawan 2021 Date in India:</strong> सवान के महीने को बहुत ही पवित्र महीना माना गया है. सावन के महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है. सावन के महीने में पड़ने वाले सोमवार का विशेष महत्व बताया गया है. इसीलिए शिवभक्त सावन के महीने का इंतजार करते हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>सावन का महीना कब से शुरू हो रहा है? (Sawan 2021 Start Date)</strong><br />पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के बाद श्रावण का महीना आता है. इसे सावन का महीना भी कहते हैं. हिंदू कैलेंडर के अनुसार श्रावण मास को पंचवां महीना बताया गया है. सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है. इस महीने में पूजा करने से भगवान शिव बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं, और अपने भक्तों को कृपा प्रदान करते हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>सावन का पहला सोमवार (Sawan Somwar 2021)</strong><br />सावन का महीना 25 जुलाई 2021 रविवार से आरंभ हो रहा है. 26 जुलाई 2021 को सावन का पहला सोमवार पड़ रहा है. सावन मेें पहले सोमवार का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि सावन के महीने में पड़ने वाले सोमवार में व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. सावन के मास में सोमवार कब है, जानते हैं-</p> <ol style="text-align: justify;"> <li style="text-align: justify;">सावन का पहला सोमवार: 26 जुलाई 2021</li> <li style="text-align: justify;">सावन का दूसरा सोमवार: 2 अगस्त 2021</li> <li style="text-align: justify;">सावन का तीसरा सोमवार: 9 अगस्त 2021</li> <li style="text-align: justify;">सावन का चौथा सोमवार: 16 अगस्त 2021</li> </ol> <p style="text-align: justify;"><strong>सावन में सोमवार व्रत और शिव पूजा का महत्व</strong><br />सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है. सावन के सोमवार में व्रत रखने से जीवन में आने वाली परेशानियों से मुक्ति मिलती है. मान्यता है कि सोमवार का व्रत रखने से सुयोग्य वर की कामना भी पूर्ण होती है, इसके साथ ही विवाह संबंधी आने वाली बाधाएं भी दूर होती हैं. सोमवार के व्रत में विधि का पूर्ण ध्यान रखना चाहिए. सावन के सोमवार का व्रत पूरी श्रद्धा और भक्तिभाव से करना चाहिए. इस दिन भगवान शिव की प्रिय चीजों का भोग लगाना चाहिए. अभिषेक करने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें: </strong><br /><strong><a title="Weekly Horoscope 05 -11 July 2021: इस राशि के लोगों के लिए अच्छा रहेगा ये हफ्ता, जानें सभी राशियों का पूर्वानुमान" href="https://ift.tt/3hhJmLa" target="">Weekly Horoscope 05 -11 July 2021: इस राशि के लोगों के लिए अच्छा रहेगा ये हफ्ता, जानें सभी राशियों का पूर्वानुमान</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Shani Dev: शनि मकर राशि में है वक्री, मिथुन, तुला, धनु, मकर और कुंभ राशि वाले भूलकर भी न करें ये काम" href="https://ift.tt/2UowY2O" target="">Shani Dev: शनि मकर राशि में है वक्री, मिथुन, तुला, धनु, मकर और कुंभ राशि वाले भूलकर भी न करें ये काम</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/2Vc7lCZ
Luaki Juice: अद्भुत फायदों के लिए पीना चाहिए खाली पेट लौकी का जूस, जानिए बनाने के तरीके
<p style="text-align: justify;"><strong>Luaki Juice Benefits:</strong> निश्चित रूप से हरी सब्जियां पोषक तत्वों और विटामिन्स का खजाना हैं. लेकिन उसके पोषक तत्वों का आखिरी फायदा निचोड़ने के लिए आपको जूस की शक्ल में उसे इस्तेमाल करना चाहिए. लौकी ऐसी ही एक हैरतअंगेज सब्जी है. उसका जूस अप्रत्याशित रूप से आपका स्वास्थ्य बदल सकता है और तीन महीने के समय में सुधार सकता है. लौकी जूस पीने के अनगिनत स्वास्थ्य फायदे हैं. उसका शरीर पर प्रभाव ठंडा होता है, ये आपके ब्लड प्रेशर को काबू में रखता है. ये भूरे बाल और झुर्रियों से छुटकारा दिलाने में मदद कर सकता है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>लौकी का जूस घर पर कैसे बनाएं</strong><br />2 मध्यम आकार की लौकी लें, छिलका उतार लें, बीज निकाल लें और काट लें. एक चम्मच जीरा, 15-20 पुदीने की पत्तियां, 2-3 चम्मच नींबू का जूस, स्वाद के बराबर नमक तैयार रखें. ब्लेंडर में लौकी, अदरक, पुदीने की पत्तियां और जीरा को पीसें. आगे, एक प्याला पानी मिलाएं और 3-4 मिनट के लिए मिश्रण करें. अब, नींबू का रस और नमक को अच्छी तरह मिलाएं. जूस को छान कर रोजाना सुबह पीएं. सुबह में सबसे पहले उसे पीने से पूरे दिन के लिए आपको सेट कर सकता है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>दिल की सेहत को बढ़ाता है-</strong> 90 दिनों तक खाली पेट लौकी जूस पीने से आपका कोलेस्ट्रोल लेवल कम हो सकता है. इस सब्जी में ज्यादा घुलनशील डाइटरी फाइबर होता है, जो आपके ब्लड प्रेशर को काबू में भी रखेगा. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>वजन कम करने में मददगार-</strong> लौकी जूस कैलोरी और फैट्स में कम होता है, जो उसे वजन कम करने के लिए प्रभावी ड्रिंक बनाता है. उसके अलावा, ये फाइबर में अधिक होता है जो देर तक आपको संतुष्ट रखता है, इस तरह भूख लगने से आपको रोकता है. उसमें जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स जैसे विटामिन सी, विटामिन बी, विटामिन के, विटामिन ए, आयरन, पोटैशियम और मैग्नीज भी होते हैं. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>तनाव और डिप्रेशन को करे दूर-</strong> लौकी में चोलिन की अधिक मात्रा होती है- ये एक न्यूरोट्रांसमिटर है जो दिमाग के सेल्स को उचित काम में मदद करता है, इस तरह दिमागी बीमारी को रोकता है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>पेट की समस्या का करे इलाज-</strong> लौकी का जूस कब्ज की सहायता में मदद करता है और डायरिया का इलाज भी करता है. फाइबर तत्व और 98 फीसद पानी होने के कारण, ये आपके पाचन तंत्र को साफ करता है और मल त्याग को आसान बनाने में मदद करता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="सोने की असरदार आदतें आपकी इम्यूनिटी को करती हैं मजबूत, जानिए कैसे" href="https://ift.tt/3dMTVUd" target="">सोने की असरदार आदतें आपकी इम्यूनिटी को करती हैं मजबूत, जानिए कैसे</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Health Tips: आयुर्वेद के इन फूड नियमों के साथ करें अपने आंत की सेहत में सुधार" href="https://ift.tt/3xm9k5J" target="">Health Tips: आयुर्वेद के इन फूड नियमों के साथ करें अपने आंत की सेहत में सुधार</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/2V7f9Wt
Modi Cabinet Expansion: किस राज्य से कौन-कौन हैं दौड़ में, आज नए नाम भी आए सामने
<p style="text-align: justify;"><strong>Modi Cabinet Expansion:</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 जुलाई को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकते हैं. इस बार मंत्रिमंडल में करीब 17 से 22 नए मंत्री शामिल हो सकते हैं. इस दौरान कई मंत्रियों से अतिरिक्त प्रभार भी लिए जा सकते हैं. वहीं कई मंत्रियों की छुट्टी भी हो सकती है. मंत्रिमंडल विस्तार में चुनावी राज्यों का खासा ख्याल रखा जा सकता है. इस बीच जिन नेताओं की मंत्रिमंडल में शामिल होने को चर्चा हो रही है, वह एक एक करके दिल्ली पहुंच रहे हैं. जानिए किस राज्य से कौन-कौन दौड़ में हैं. आज नए नाम भी सामने आए हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कैबिनेट में कई पद खाली</strong></p> <div id="content-14" class="uk-card uk-card-default uk-card-body uk-padding-small livebloghtmlfinal" style="text-align: justify;"> <div> <div id="f1v74_tb" class="text-div news"> <div class="card_content"> <p>शिवसेना और अकाली दल के एनडीए से अलग होने और रामविलास पासवान और कई अन्य के निधन के बाद कई मंत्रियों के पद खाली हैं. अभी मोदी कैबिनेट में कुल 53 मंत्री ही हैं, जबकि संविधान के अनुसार मंत्रियों की संख्या अधिक से अधिक 79 हो सकती है.</p> </div> </div> </div> </div> <div id="content-1" class="uk-card uk-card-default uk-card-body uk-padding-small livebloghtmlfinal" style="text-align: justify;"> <div> <div id="f1v74_tb" class="text-div news"> <div class="card_content"> <p>JDU नेता उमेश कुशवाहा ने दावा किया है कि उनकी पार्टी के नेताओं को भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी. हालांकि उनकी पार्टी के कितने मंत्री बनेंगे अभी इसका खुलासा नहीं किया गया है. इस बीच बीजेपी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को दिल्ली से फोन करके बुलाया गया है. सिंधिया शाम तक दिल्ली पहुंच सकते हैं. इससे पहले सिंधिया ने उज्जैन के महाकाल मंदिर में माथा टेका और आशीर्वाद लिया. उन्होंने कहा कि महाकाल के मंदिर से सिंधिया का पुराना नाता रहा है. </p> <p><strong class="uk-margin-bottom uk-display-block">वरुण गांधी को भी कैबिनेट में जगह</strong></p> <div class="card_content"> <p>अपने आक्रामक तेवरों के लिए जाने जाने जाने वाले वरुण गांधी को भी कैबिनेट में जगह दी जा सकती है. वह उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से सांसद हैं. यूपी में अगले साल चुनाव होने हैं. ऐसे में यूपी के कोटे से वरुण को मोदी मंत्रिमंडल में शामिल क‍िया जा सकता है.</p> <div id="content-11" class="uk-card uk-card-default uk-card-body uk-padding-small livebloghtmlfinal"> <div> <div id="f1v74_tb" class="text-div news"> <div class="card_content"> <p>संभावित फेरबदल में कई मंत्रियों का बोझ कम किया जा सकता है. इन मंत्रियों में नरेंद्र सिंह तोमर, रविशंकर प्रसाद, डॉ. हर्षवर्धन, प्रकाश जावड़ेकर, पीयूष गोयल और प्रह्लाद जोशी से अतिरिक्त मंत्रालय का बोझ लिया जा सकता है.</p> <p><strong>इन चेहरों को मिल सकता है मौका</strong></p> <p><strong>उत्तर प्रदेश</strong></p> <ul> <li>तीन से चार मंत्री शामिल किए जाएंगे</li> <li>अपना दल से अनुप्रिया पटेल</li> </ul> <p><strong>बिहार</strong></p> <ul> <li>दो से तीन मंत्री शामिल होंगे</li> <li>बीजेपी- सुशील मोदी</li> <li>जेडीयू से RCP सिंह</li> <li>और एलजेपी से पशुपती पारस</li> </ul> <p><strong>मध्य प्रदेश</strong></p> <ul> <li>एक से दो मंत्री शामिल होंगे</li> <li>ज्योतिरादित्य सिंधिया</li> <li>राकेश सिंह</li> </ul> <p><strong>महाराष्ट्र</strong></p> <ul> <li>एक से दो मंत्री शामिल होंगे</li> <li>नारायण राणे</li> <li>हिना ग़ावित</li> <li>रणजीत नाइक निम्बलकर</li> </ul> <p><strong>राजस्थान</strong></p> <ul> <li>एक मंत्री शामिल हो सकता है</li> <li>जम्मू-कश्मीर - एक मंत्री बनाया जा सकता है</li> <li>लद्धाख- एक मंत्री शामिल हो सकता है</li> </ul> <p><strong>जम्मू-कश्मीर</strong></p> <ul> <li>एक मंत्री बनाया जा सकता है</li> </ul> <p><strong>लद्धाख</strong></p> <ul> <li>एक मंत्री शामिल हो सकता है</li> </ul> <p><strong>असम</strong></p> <ul> <li>एक से दो मंत्री शामिल</li> <li>सोनोवाल</li> </ul> <p><strong>पश्चिम बंगाल</strong></p> <ul> <li>शान्तनु ठाकुर</li> <li>निशीथ प्रामाणिक</li> </ul> <p><strong>ओडिशा</strong></p> <ul> <li>एक मंत्री</li> </ul> <p> </p> </div> </div> </div> </div> <div id="content-12" class="uk-card uk-card-default uk-card-body uk-padding-small livebloghtmlfinal"> <div class="uk-grid-small live-meta uk-grid"> </div> </div> </div> </div> </div> </div> </div> <h4 class="article-title " style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें-</strong></h4> <h4 class="article-title " style="text-align: justify;"><a href="https://ift.tt/2TxwlEo Cabinet Expansion: जानिए कौन-कौन से नेता दिल्ली पहुंचे और कौन शाम तक पहुंच जाएंगे</a></h4> <h4 style="text-align: justify;"><a href="https://www.abplive.com/news/india/expansion-of-modi-cabinet-postponed-for-a-day-decision-due-to-continuing-talks-with-coalition-parties-1936495">एक दिन के लिए टला मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार, गठबंधन दलों से बातचीत जारी रहने के चलते फैसला</a></h4> lifestyle https://ift.tt/3ysJVYs
Health Tips: कच्चा पपीता इस्तेमाल करने के ये हैं कुछ बेहतरीन फायदे, जानिए
<p style="text-align: justify;">पका पपीता के कई स्वास्थ्य फायदे हैं, लेकिन उसकी कच्ची शक्ल में भी स्वास्थ्य के हैरतअंगेज लाभ हैं. विटामिन्स ए, सी, ई, बी, एंजाइम्स और फाइटोन्यूट्रीयंट्स से भरपूर कच्चा पपीता मैग्नीशियम, पोटैशियम का भी अच्छा स्रोत होता है. क्या आप जानना चाहता हैं कच्चा पपीता कैसे आपके स्वस्थ रहने में मदद कर सकता है?</p> <p style="text-align: justify;"><strong>वजन कम करने में मदद करता है-</strong> पका पपीता के मुकाबले कच्चा पपीता में बहुत ज्यादा सक्रिय एंजाइम्स होते हैं. उसके दो सबसे मजबूत एंजाइम्स पपाइन और काइमोपैपेन हैं. ये दोनों एंजाइम्स भोजन से फैट, प्रोटीन्स और कार्बोहाइड्रेट्स को तोड़ने में मदद करते हैं. वास्तव में पेप्सीन की तुलना में पपाइन एंजाइम फैट्स को तोड़ने में ज्यादा प्रभावी पाया गया है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>डायबिटीज को सुधारने में मददगार-</strong> अगर आप डायबिटीज रोगी हैं, तो कच्चा पपीता आपके खाने के लिए बहुत उपयुक्त फल है. ये कच्चा फल डायबिटीज रोगियों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है. एक रिसर्च में पाया गया है कि कच्चे पपीता का जूस ब्लड ग्लूकोज लेवल को कम करने में मदद करता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>पाचन को सुधारता है-</strong> काइमोपैपेन, पपाइन के साथ अन्य एंजाइम्स और फाइटोन्यूट्रीयंट्स पाचन सुधारने में मदद करते हैं. ये मजबूत मिक्सचर शरीर से टॉक्सिन्स को छुटकारा दिलाने में मदद करने के लिए बहुत अच्छा है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कब्ज को ठीक करने में मददगार-</strong> फाइबर में अधिक होने के कारण कच्चा पपीता कब्ज को दुरुस्त करने के लिए बहुत अच्छा है. कच्चा पपीता में मौजूद एंजाइम्स विशेषकर लाटेकस आपके पेट को साफ करने में मदद करता है. फाइबर तत्व पानी को भी अवशोषित करता है और मल को नरम करने में मदद करता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>घाव को जल्दी ठीक करता है- </strong>कच्चा पपीता घाव भरने की प्रक्रिया को तेज करता है- प्रोटीज एंजाइम में अधिक होने के कारण ये फल घाव को तेजी से भरने में मदद करता है. उसके अलावा, कच्चा पपीता में महत्वपूर्ण पोषक तत्व जैसे मैग्नीशियम, पोटैशियम, विटामिन्स ए, सी, ई और बी भी होते हैं जो खास स्किन की स्थिति से छुटकारा दिलाने में मदद करता है और सूजन को शांत करता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="सोने की असरदार आदतें आपकी इम्यूनिटी को करती हैं मजबूत, जानिए कैसे" href="https://ift.tt/3dMTVUd" target="">सोने की असरदार आदतें आपकी इम्यूनिटी को करती हैं मजबूत, जानिए कैसे</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Health Tips: आयुर्वेद के इन फूड नियमों के साथ करें अपने आंत की सेहत में सुधार" href="https://ift.tt/3xm9k5J" target="">Health Tips: आयुर्वेद के इन फूड नियमों के साथ करें अपने आंत की सेहत में सुधार</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3jLYOAR
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