Saturday, July 3, 2021
Chanakya Niti: प्रेम संबंध में इन बातों का रखना चाहिए ध्यान, नहीं तो संबंध हो जाते हैं खराब
<p style="text-align: justify;"><strong>Chanakya Neeti In Hindi: </strong>चाणक्य नीति जीवन की सच्चाई को समझाने का प्रयास करती है. यही कारण है कि इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी चाणक्य नीति की उपयोगिता और प्रासंगिकता में कोई कमी नहीं आई है. चाणक्य नीति व्यक्ति को सफल बनाने के लिए प्रेरित करती है.</p> <p style="text-align: justify;">चाणक्य के अनुसार हर व्यक्ति जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहता है. लेकिन सफलता इतनी आसानी से प्राप्त नहीं होती है. इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना पड़ता है, जो लोग इन बातों का ध्यान रखते हैं, उन्हें सफलता अवश्य मिलती है. </p> <p style="text-align: justify;">प्रेम में अपार शक्ति होती है. प्रेम ही है जो सबको एक माला की तरह पिरो के रखने की क्षमता रखता है. जहां प्रेम समाप्त हो जाता है, वहां पर अराजकता व्याप्त हो जाती है. जीवन को सुंदर बनाने के लिए प्रेम अति आवश्यक है. प्रेम में सफलता तभी मिलती है जब व्यक्ति इंसानियत का अपनाता है. प्रेम जीवन का आधार है. इसे महसूस करना चाहिए. प्रेम संबंधों में कभी तनाव और दरार की स्थिति नहीं होनी चाहिए. प्रेम इससे कमजोर होता है. प्रेम संबंधों कैसे मजबूत बनाया जा सकता है, आइए जानते हैं-</p> <ul style="text-align: justify;"> <li><strong>आदर सम्मान में कमी न आने दें</strong><br />चाणक्य की मानें तो हर व्यक्ति का आदर सम्मान होता है. इस आदर सम्मान को कभी ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए. जब आदर सम्मान में कमी आती है तो प्रेम की रिश्ता कमजोर होता है. </li> <li><strong>अहंकार से मुक्त रहें</strong><br />चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को अहंकार से हमेशा दूर रहना चाहिए. अहंकार में व्यक्ति में स्वयं के हितों का ध्यान रखता है, दूसरों को कम वरियता देता है. इससे रिश्ता खराब होने की संभावना बढ़ जाती है.</li> <li><strong>दिखावा न करें</strong><br />चाणक्य के अनुसार प्रेम में किसी प्रकार का दिखावा नहीं करना चाहिए. दिखावा करने वाले व्यक्ति स्वार्थी कहलाते हैं. प्रेम में एक दूसरे के प्रति समर्पण का भाव रखना चाहिए. प्रेम में दिखावे की कोई जगह नहीं होती है.</li> </ul> <p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें</strong><br /><strong><a title="Budhaditya Yoga: सूर्य और बुध ग्रह की युति से बनता है बुधादित्य योग, जिसकी कुंडली में होता है उसे जीवन में मिलती है अपार सफलता" href="https://ift.tt/3yk1kSV" target="">Budhaditya Yoga: सूर्य और बुध ग्रह की युति से बनता है बुधादित्य योग, जिसकी कुंडली में होता है उसे जीवन में मिलती है अपार सफलता</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Yogini Ekadashi 2021: 5 जुलाई को है योगिनी एकादशी, इस दिन का जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पारण का समय" href="https://ift.tt/3jF8VHy" target="">Yogini Ekadashi 2021: 5 जुलाई को है योगिनी एकादशी, इस दिन का जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पारण का समय</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3hxQlOR
Mahabharat: कृष्ण की कृपा से नहीं बल्कि दुर्वासा के वरदान से बची थी द्रौपदी की लाज
<p style="text-align: justify;"><strong>Mahabharat :</strong> अपने क्रोध के लिए मशहूर दुर्वासा ऋषि पांडवों के आश्रम पहुंचे तो नदी में स्नान के दौरान उनके वस्त्र बह गए, इस पर द्रौपदी ने अपने आंचल का एक टुकड़ा उन्हें पहनने को दिया, जिससे खुश होकर दुर्वासा ने उन्हें वरदान दिया था कि ऐसा ही वस्त्र जरूरत पर उनके बहुत काम आएगा. </p> <p style="text-align: justify;">महाभारत काल में महर्षि दुर्वासा हस्तिनापुर आए तो उनके क्रोध के डर से दुर्योधन ने उनकी खूब सेवा की, लेकिन जब दुर्वासा उसे आशीर्वाद देकर लौटने लगे तो कुटिलता के चलते दुर्योंधन ने उन्हें जंगल में रह रहे पांडवों की कुटिया में जाकर आतिथ्य कराने का अनुरोध किया. दुर्योधन ने ही उन्हें वहां भेजा था और वह भी ऐसे समय जबकि द्रौपदी समेत सभी पांडव भोजन करने के बाद विश्राम कर रहे थे.</p> <p style="text-align: justify;">दुर्वासा अपने हजारों शिष्यों को लेकर पांडवों की कुटिया में पहुंच गए और द्रौपदी को भोजन तैयार करने का आदेश देकर स्नान के लिए नदी में चले गए. इस दौरान कुटिया में रखा अक्षय पात्र खाली हो चुका था. ऐसे में कृष्ण ने पहुंचकर उसमें से चावल का एक टुकड़ा खाकर डकार ली, जिससे नदी में पड़े-पड़े ही दुर्वासा समेत उनके हजारों शिष्यों का पेट भर गया.</p> <p style="text-align: justify;">इस दौरान स्नान करते समय महर्षि दुर्वासा का वस्त्र नदी के बहाव में बह गया. कुछ ही दूर नदी में द्रौपदी भी स्नान कर रहीं थीं, उन्हें शर्मिंदगी महसूस होते देखकर द्रौपदी ने तत्काल अपने आंचल से एक टुकड़ा फाड़कर दुर्वासा ऋषि को दे दिया. इससे खुश होकर महर्षि ने द्रौपदी को वरदान दिया कि यह वस्त्रखण्ड बढ़कर एक दिन तुम्हारी लज्जा को बचाएगा. चौपड़ के दौरान दांव पर लगाए जाने के बाद हार पर द्रौपदी का चीरहरण किया गया तो द्रौपदी ने श्रीकृष्ण का आह्वान किया तो दुर्वासा से मिला वरदान उनके काम आया और उनकी साड़ी इतनी लंबी होती गई कि उसे खींचते-खींचते दुशासन भरी सभा में बेहोश हो गया.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: </strong></p> <p style="text-align: justify;"><a title="शनिवार के दिन करें ये उपाय तो खुल जायेगी किस्मत, बढ़ेगा मान -सम्मान और सुख समृद्धि" href="https://ift.tt/3qKwaSj" target=""><strong>शनिवार के दिन करें ये उपाय तो खुल जायेगी किस्मत, बढ़ेगा मान -सम्मान और सुख समृद्धि</strong></a></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Mahabharat : गुस्से में चलाई ब्रह्मशिरा के चलते आज भी भटक रहा है अश्वत्थामा" href="https://ift.tt/3qF87nA" target="">Mahabharat : गुस्से में चलाई ब्रह्मशिरा के चलते आज भी भटक रहा है अश्वत्थामा</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3xeBi3i
Immunity Booster Fruits: इम्यूनिटी बढ़ाने वाले 5 सबसे सस्ते फल, स्वाद और सेहत से भरपूर
<p style="text-align: justify;">बारिश के मौसम में बीमारियां और इंफेक्शन के चांस ज्यादा बढ़ जाते हैं. मानसून में हमारी इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है. ऐसे में आपको अपनी डाइट में कुछ ऐसी चीजों को शामिल करना जरूरी है, जिससे आपको रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने में मदद मिले. वहीं कोरोना की तीसरी लहर से बचने के लिए भी आपको अपनी इम्यूनिटी को मजबूत करना होगा. इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए सही खान-पान और विटामिन सी से भरपूर भोजन बहुत जरूरी है. विटामिन सी से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और आप स्वस्थ रहते हैं. आज हम आपको बेहद सस्ते और विटामिन सी से भरपूर फलों के बारे में बता रहे हैं. आप इन्हें आसानी से अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>आम- </strong>स्वाद से भरपूर आम इम्यूनिटी बढ़ाने का काम भी करता है. आम से करीब 122 मिलीग्राम विटामिन सी मिलता है. आम में विटामिन ए भी काफी पाया जाता है. जो आंखों की रोशनी के लिए अच्छा है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>अमरूद- </strong>विटामिन सी से भरपूर बहुत ही सस्ता और पौष्टिक फल है. अमरूद में संतरे से भी ज्यादा विटामिन सी होता है. इससे आपकी इम्यूनिटी मजबूत होती है. एक मीडियम अमरूद में 200 ग्राम पोषक तत्व होते हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>पपीता- </strong>पपीता पाचन के लिए सबसे अच्छा फल है. इसके अलावा पपीता में विटामिन सी भी काफी मात्रा में पाया जाता है. पपीता खाने से रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. एक कप पपीता में आपको 88 मिलीग्राम पोषक तत्व मिलते हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>स्ट्रॉबेरी- </strong>स्ट्रॉबेरी में भी काफी विटामिन सी पाया जाता है. स्ट्रॉबेरीज में एंटीऑक्सिडेंट गुण और कई दूसरे पोषक तत्व पाए जाते हैं. इस सीजन में आपको स्ट्रॉबेरी मिल जाते हैं. अगर आप एक कप स्ट्रॉबेरी खाते हैं तो इससे आपके शरीर को 100 मिलीग्राम विटामिन सी मिलता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कीवी- </strong>विटामिन सी से भरपूर एक कीवी में करीब 85 मिलीग्राम विटामिन सी होता है. कीवी में विटामिन के और ई भी काफी मात्रा में होता है. एक कीवी कई और पोषक तत्वों से भी भरपूर है जो आपके स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: </strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="ये आम खाद्य पदार्थ भी बना सकते हैं आपको एलर्जी का शिकार, जानिए लक्षण" href="https://ift.tt/3ApPN6f" target="">ये आम खाद्य पदार्थ भी बना सकते हैं आपको एलर्जी का शिकार, जानिए लक्षण</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/2Un9FGV
मेकअप के साथ भी मेकअप के बाद भी, खूबसूरत दिखती हैं ये हसीनाएं, ऐसे रखती हैं स्किन का ध्यान
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Krishna leela: कृष्ण की ईजाद की गई कलरीपायट्टु कला बन गई मार्शल आर्ट्स
<p style="text-align: justify;"><strong>Krish leela :</strong> श्रीकृष्ण अपने काल के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर होने के साथ द्वंद्व-मल्ल युद्ध में भी माहिर थे. श्रीकृष्ण के धनुष का नाम 'सारंग' था तो खड्ग 'नंदक', गदा 'कौमौदकी' और शंख 'पाञ्चजन्य' था, यह गुलाबी था. महाभारत युद्ध के दौरान श्रीकृष्‍ण के पास दो रथ थे, कई अस्त्र-शस्त्र से लैस कृष्णजी के पास महाभारतकाल की सबसे विशाल और खतरनाक सेना थी. मगर बाल्यकाल में कालयवन समेत बाकी राक्षसों से द्वंद्व के दौरान उन्होंने युद्ध कौशल की कला कलरीपायट्टु खोजी. इसके उपयोग से ही वह खुद को कालयवन से अपनी रक्षा कर पाए. बिना अस्त्र-शस्त्रों के लड़ी जाने वाली इस विधा को कालांतर में मार्शल आर्ट माना गया.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ऐसे थे योद्धा कृष्ण </strong><br />एक पालक और न्यायकर्ता के रूप में श्रीकृष्ण के कई रूप दिखते हैं, लेकिन योद्धा के तौर पर कम. ऐसे में यह जानना रोचक है कि बतौर योद्धा श्रीकृष्ण का धारण करते थे. पौराणिक कथाओं के अनुसार कृष्ण के पास दो बहुत दिव्य रथ गरूड़ध्वज और जैत्र थे. गरुड़ध्वज पर सारथी के रूप में दारुक थे तो इस रथ में चलने वाले अश्वों का नाम शैव्य, सुग्रीव, मेघपुष्प था. दूसरे रथ जैत्र पर जैत्र नामक सेवक भी था. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>गरुड़ध्वज से ही रुक्मिणी हरण कर लाए थे कृष्ण</strong><br />श्रीमद्भागवत महापुराण में उल्लेख है कि गरुड़ध्वज रथ बेहद तेज गति से चलने वाला रथ था, रुक्मिणी हरण इसी रथ से किया गया था. यह रथ आंधी के वेग समान मंदिर के पास क्षणभर के लिए रुका. इतने में श्रीकृष्ण ने राजकुमारी रुक्मिणी को तुरंत रथ पर बिठा लिया और रथ के अश्व पूरे वेग से लगभड़ उड़ चले. माना जाता है कि श्रीकृष्ण गरुड़ध्वज रथ स्वर्ग से लाए थे. आधुनिक बिहार के राजगीर में कुछ जगहें हैं, जिनका रिश्ता महाभारत काल से है, इनमें एक हैं श्रीकृष्ण के रथ के निशान, इसे लेकर प्रचलित है कि श्रीकृष्ण महाभारत काल के दौरान रथ लेकर स्वर्ग से यही उतरे थे.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: </strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="शनिवार के दिन करें ये उपाय तो खुल जायेगी किस्मत, बढ़ेगा मान -सम्मान और सुख समृद्धि" href="https://ift.tt/3qKwaSj" target="">शनिवार के दिन करें ये उपाय तो खुल जायेगी किस्मत, बढ़ेगा मान -सम्मान और सुख समृद्धि</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Mahabharat : गुस्से में चलाई ब्रह्मशिरा के चलते आज भी भटक रहा है अश्वत्थामा" href="https://ift.tt/3qF87nA" target="">Mahabharat : गुस्से में चलाई ब्रह्मशिरा के चलते आज भी भटक रहा है अश्वत्थामा</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3dF1yMs
Monsoon Recipes: बारिश में गर्मागरम चाय के साथ खाएं केले के चिप्स, ये है झटपट तैयार करने की रेसिपी
<p style="text-align: justify;">बारिश के मौसम में अगर आपको अदरक वाली गर्मागरम चाय के साथ क्रिस्पी बनाना चिप्स खाने को मिल जाएं, तो मौसम का मज़ा दोगुना हो जाएगा. पीले रंग के केले से बने चिप्स वैसे तो सभी पसंद होते हैं. लेकिन केरल और तमिलनाडु में ये सबसे ज्यादा खाए जाते हैं. आप इन्हें व्रत-उपवास में भी खा सकते हैं. इसके लिए आप केले के चिप्स बनाते वक्त इसमें सेंधा नमक का उपयोग करें. आप चाहें तो इन्हें बिना नमक के बनाकर ऊपर से नमक डालकर भी खा सकते हैं. बच्चे हों या बड़े ये चिप्स सभी को खूब पसंद आते हैं. ऐसे में आप इन्हें घर पर बड़ी ही आसानी से तैयार कर सकते हैं. जानते हैं केले के चिप्स बनाने की रेसिपी. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>केले के चिप्स की रेसिपी </strong><br />1- सबसे पहले इसके लिए आपको 2 सख्त और कच्चे पीले केले लेने होंगे. केले के चिप्स बनाते वक्त सही केले का चुनाव बहुत जरूरी है.<br />2- अब इन केले में छिलके पर एक जैसी दूर पर हल्के स्लिट्स (light slits) बना दें. <br />3- अब केले के किनारे निकाल दें और धीरे से हाथ से छिलके को हटा दें. <br />4- अब एक बर्तन में नमक और 4 टेबल-स्पून पानी डालकर मिलाकर रखे लें. <br />5- एक नॉन स्टिक कड़ाही में तेल गर्म करें, अब इसमें एक स्लाइसर से केले की स्लाइस करते हुए डाल दें. <br />6- जब केले की स्लाइस 1-2 मिनट तक पक जाएं तो कड़ाही में 1 टेबल-स्पून नमक-पानी का घोल डालकर मिला दें. अब इसे 1-2 मिनट तक पकने दें.<br />7- अब आप मीडियम आचं पर कलछी से हिलाते हुए इन्हें कुरकुरा होने तक पकाएं. <br />8- जब तेल-पानी के छींटों की आवाज बंद हो जाए. एक टिशू पेपर पर केले के चिप्स निकाल लें.<br />9- इसी तरह से सारे केले के चिप्स को आप तलकर ठंडा होने पर किसी एयरटाइट डब्बे में रख लें.<br />10- चाय के साथ कुरकुरे केले के चिप्स का लुत्फ उठाएं. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a title="स्वाद और सेहत से भरपूर अंकुरित मूंग और हरे प्याज की टिक्की, जानिए बनाने की सिंपल रेसिपी" href="https://ift.tt/3y8yWTM" target="">स्वाद और सेहत से भरपूर अंकुरित मूंग और हरे प्याज की टिक्की, जानिए बनाने की सिंपल रेसिपी</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3AsnOTx
Ramayana: हनुमानजी ने लिखी थी पहली रामायण, लेकिन इस कारण फेंक दी थी समुद्र में
<p style="text-align: justify;"><strong>Ramayana:</strong> रामायणकाल की घटनाओं के बारे में जानने समझने और पढ़ने के लिए हमारे पास वाल्मीकि रामायण और गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस प्रचलित हैं. पहली रामायण वाल्मीकिजी ने लिखी थी, लेकिन शास्त्रों के अनुसार सबसे पहली राम कथा अनंतभक्त हनुमानजी ने लिखी थी, जिसे उन्होंने अपने नाखूनों से एक चट्टान पर लिख दिया था, इसे हनुमद रामायण कहा गया.</p> <p style="text-align: justify;">लंका विजय के बाद श्रीराम अयोध्या में लौटकर राजपाट संभाल लेते हैं. कुछ दिन यहां रहकर श्रीराम की सेवा के बाद हनुमानजी हिमालय जाकर वहां शिव तपस्या में लीन हो जाते हैं. इस दौरान वे रोजाना अपने पास मौजूद एक शिला पर नाखून से रामायण कथा लिखते रहे. कई वर्षों के बाद तपस्या और रामायण कथा दोनों पूरी हो गई, जो कालांतर में हनुमद रामायण कही गई. इसके बाद महर्षि वाल्मीकि ने वाल्मीकि रामायण लिखी और उसे मन में लेकर भगवान शिव को समर्पित करने के लिए कैलाश धाम पहुंच गए. यहां उन्हें पहले से हनुमानजी मौजूद मिले. यहां शिला पर नाखूनों से उकेरी हनुमद रामायण देखकर वे निराश हो गए, बजरंगबली ने उनसे मायूसी की वजह पूछी तो महर्षि ने कहा कि मैंने कठिन परिश्रम से रामायण लिखी, लेकिन आपकी रामायण देखकर लगता है कि अब मेरी लिखी रामायण को महत्व नहीं मिलेगा. आपने वह सब कुछ लिख दिया है, जिसके आगे मेरी रामायण कहीं नहीं टिक रही. यह सुनकर हनुमानजी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि चिंता ना करें, इतना कहकर बजरंगबली ने हनुमद रामायण लिखी शिला एक कंधे पर तो दूसरे पर महर्षि वाल्मीकि को बिठा लिया. हजारों मील दूर ले समुद्र में उन्होंने अपनी लिखी हनुमद रामायण राम को समर्पित करते हुए फेंक दी. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>फिर गुणगान लिखने के लिए जन्म लूंगा हनुमान</strong><br />महर्षि वाल्मीकि ने कहा कि रामभक्त आप धन्य हैं. आपकी महिमा के गुणगान के लिए मुझे एक और जन्म लेना होगा. मैं वचन देता हूं कि कलियुग में मैं एक और रामायण लिखने के लिए जन्म लूंगा. वह रामायण आम लोगों की भाषा में होगी. माना जाता है कि कलियुग में रामचरितमानस लिखने वाले गोस्वामी तुलसीदासजी महर्षि वाल्मीकि का ही दूसरा जन्म थे. रामचरितमानस लिखने से पहले उन्होंने हनुमान चालीसा लिखी, फिर हनुमानजी का गुणगान करते हुए उनकी प्रेरणा से अपनी रामचरितमानस पूरी की.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कालीदास के काल में बहकर आई पट्टालिका </strong><br />कालीदास के काल में एक पट्टालिका समुंदर किनारे मिली तो उसे सार्वजनिक जगह रख दिया गया, जहां विद्यार्थी उस पर लिखी लिपि समझ और पढ़ सकें. समझा जाता है कि कालीदास ने उसे समझ लिया था, वह जान गए थे कि यह पट्टालिका का हनुमान जी की लिखी हनुमद रामायण का ही अंश है, जो समुद्र के पानी के साथ बहते हुए उन तक पहुंच गई थी.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: </strong><br /><strong><a title="शनिवार के दिन करें ये उपाय तो खुल जायेगी किस्मत, बढ़ेगा मान -सम्मान और सुख समृद्धि" href="https://ift.tt/3qKwaSj" target="">शनिवार के दिन करें ये उपाय तो खुल जायेगी किस्मत, बढ़ेगा मान -सम्मान और सुख समृद्धि</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Mahabharat : गुस्से में चलाई ब्रह्मशिरा के चलते आज भी भटक रहा है अश्वत्थामा" href="https://ift.tt/3qF87nA" target="">Mahabharat : गुस्से में चलाई ब्रह्मशिरा के चलते आज भी भटक रहा है अश्वत्थामा</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/2TxxkUL
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