Saturday, July 3, 2021
Ramayana: हनुमानजी ने लिखी थी पहली रामायण, लेकिन इस कारण फेंक दी थी समुद्र में
<p style="text-align: justify;"><strong>Ramayana:</strong> रामायणकाल की घटनाओं के बारे में जानने समझने और पढ़ने के लिए हमारे पास वाल्मीकि रामायण और गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस प्रचलित हैं. पहली रामायण वाल्मीकिजी ने लिखी थी, लेकिन शास्त्रों के अनुसार सबसे पहली राम कथा अनंतभक्त हनुमानजी ने लिखी थी, जिसे उन्होंने अपने नाखूनों से एक चट्टान पर लिख दिया था, इसे हनुमद रामायण कहा गया.</p> <p style="text-align: justify;">लंका विजय के बाद श्रीराम अयोध्या में लौटकर राजपाट संभाल लेते हैं. कुछ दिन यहां रहकर श्रीराम की सेवा के बाद हनुमानजी हिमालय जाकर वहां शिव तपस्या में लीन हो जाते हैं. इस दौरान वे रोजाना अपने पास मौजूद एक शिला पर नाखून से रामायण कथा लिखते रहे. कई वर्षों के बाद तपस्या और रामायण कथा दोनों पूरी हो गई, जो कालांतर में हनुमद रामायण कही गई. इसके बाद महर्षि वाल्मीकि ने वाल्मीकि रामायण लिखी और उसे मन में लेकर भगवान शिव को समर्पित करने के लिए कैलाश धाम पहुंच गए. यहां उन्हें पहले से हनुमानजी मौजूद मिले. यहां शिला पर नाखूनों से उकेरी हनुमद रामायण देखकर वे निराश हो गए, बजरंगबली ने उनसे मायूसी की वजह पूछी तो महर्षि ने कहा कि मैंने कठिन परिश्रम से रामायण लिखी, लेकिन आपकी रामायण देखकर लगता है कि अब मेरी लिखी रामायण को महत्व नहीं मिलेगा. आपने वह सब कुछ लिख दिया है, जिसके आगे मेरी रामायण कहीं नहीं टिक रही. यह सुनकर हनुमानजी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि चिंता ना करें, इतना कहकर बजरंगबली ने हनुमद रामायण लिखी शिला एक कंधे पर तो दूसरे पर महर्षि वाल्मीकि को बिठा लिया. हजारों मील दूर ले समुद्र में उन्होंने अपनी लिखी हनुमद रामायण राम को समर्पित करते हुए फेंक दी. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>फिर गुणगान लिखने के लिए जन्म लूंगा हनुमान</strong><br />महर्षि वाल्मीकि ने कहा कि रामभक्त आप धन्य हैं. आपकी महिमा के गुणगान के लिए मुझे एक और जन्म लेना होगा. मैं वचन देता हूं कि कलियुग में मैं एक और रामायण लिखने के लिए जन्म लूंगा. वह रामायण आम लोगों की भाषा में होगी. माना जाता है कि कलियुग में रामचरितमानस लिखने वाले गोस्वामी तुलसीदासजी महर्षि वाल्मीकि का ही दूसरा जन्म थे. रामचरितमानस लिखने से पहले उन्होंने हनुमान चालीसा लिखी, फिर हनुमानजी का गुणगान करते हुए उनकी प्रेरणा से अपनी रामचरितमानस पूरी की.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कालीदास के काल में बहकर आई पट्टालिका </strong><br />कालीदास के काल में एक पट्टालिका समुंदर किनारे मिली तो उसे सार्वजनिक जगह रख दिया गया, जहां विद्यार्थी उस पर लिखी लिपि समझ और पढ़ सकें. समझा जाता है कि कालीदास ने उसे समझ लिया था, वह जान गए थे कि यह पट्टालिका का हनुमान जी की लिखी हनुमद रामायण का ही अंश है, जो समुद्र के पानी के साथ बहते हुए उन तक पहुंच गई थी.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: </strong><br /><strong><a title="शनिवार के दिन करें ये उपाय तो खुल जायेगी किस्मत, बढ़ेगा मान -सम्मान और सुख समृद्धि" href="https://ift.tt/3qKwaSj" target="">शनिवार के दिन करें ये उपाय तो खुल जायेगी किस्मत, बढ़ेगा मान -सम्मान और सुख समृद्धि</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Mahabharat : गुस्से में चलाई ब्रह्मशिरा के चलते आज भी भटक रहा है अश्वत्थामा" href="https://ift.tt/3qF87nA" target="">Mahabharat : गुस्से में चलाई ब्रह्मशिरा के चलते आज भी भटक रहा है अश्वत्थामा</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/2TxxkUL
Coronavirus: डेल्टा वेरिएन्ट के लक्षण कोविड के परंपरागत लक्षणों से कैसे अलग हैं? जानें
<p style="text-align: justify;">हमें कोविड से घिरी दुनिया में रहते हुए अब 18 महीने से ज्यादा का वक्त हो गया है. लेकिन वक्त गुजरने के साथ कोरोना वायरस विकसित हो रहा और उसके सबसे सामान्य लक्षणों में भी बदलाव आ रहे हैं. उभरते आंकड़े दिखाते हैं कि वायरस के डेल्टा स्वरूप से संक्रमित लोग उन लक्षणों से बिल्कुल अलग अनुभव कर रहे हैं जिन्हें वैश्विक महामारी की शुरुआत में कोविड के साथ जोड़ कर देखा गया था.</p> <p style="text-align: justify;">ऑस्ट्रेलिया में कोविड के नए मामलों के लिए ये स्वरूप जिम्मेदार है और दुनिया भर में बहुत तेजी से फैल रहा है. वायरस इंसान को किस तरह बीमार करता है, ये दो अहम कारकों पर निर्भर करता है- वायरल कारकों में वायरस की खुद की प्रतिकृत बनाने की गति, संचरण के माध्यम और अन्य शामिल हैं. वायरस के विकास के साथ वायरल कारक बदल जाते हैं. पोषक (वायरस से संक्रमित व्यक्ति) कारक व्यक्ति विशेष पर आधारित होते हैं. आयु, लिंग, दवाइयां, आहार, व्यायाम, स्वास्थ्य एवं तनाव सभी पोषक कारकों को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए जब भी हम वायरस के संकेतों एवं लक्षणों की बात करते हैं, तो हम साधारणतया सामान्य लक्षणों और संकेतों की बात कर रहे होते हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>परंपरागत बनाम डेल्टा स्ट्रेन</strong></p> <p style="text-align: justify;">उन्हें निर्धारित करने के लिए हमें व्यक्तिगत मामलों से सूचनाएं एकत्र करनी होती हैं. उनके आंकड़े एकत्र करना या उनका विश्लेषण हमेशा आसान नहीं होता. उदाहरण के लिए, बुजुर्गों में युवाओं से अलग लक्षण हो सकते हैं और अस्पतालों से मरीजों की जानकारी लेना जीपी क्लिनिक के मरीज से मिली सूचना से अलग हो सकता है. अब सवाल उठता है कि डेल्टा स्वरूप के समान संकेत एवं लक्षण क्या हैं? मोबाइल ऐप के जरिए खुद रिपोर्ट करने वाली प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए, ब्रिटेन से हासिल डेटा जाहिर करते हैं कि कोविड के आम लक्षण अब बदल गए हैं, जिसे हम वायरस से परंपरागत तौर पर जोड़कर देखते हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कैसे दोनों के हैं अलग लक्षण?</strong></p> <p style="text-align: justify;">बुखार और खांसी हमेशा से कोविड के सबसे आम लक्षण रहे हैं, सिरदर्द एवं गले में दर्द पारंपरिक रूप से कुछ लोगों में दिखता था, लेकिन नाक बहना पूर्व के मामलों में दुर्लभ था. सूंघने की शक्ति चली जाना मूल रूप में बेहद आम था, अब नौंवे स्थान का लक्षण बन गया है. लक्षणों के इस तरह से विकसित होने के पीछे कुछ कारण हो सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि आंकड़े अस्पताल जाने वाले मरीजों से मिल रहे थे जिनके बीमार होने की संभावना ज्यादा थी और अधिक आयु वर्ग के लोगों के टीकाकरण की उच्च दर होने की वजह से युवा लोगों में कोविड के मामले अब ज्यादा दिखने के साथ मध्यम लक्षण भी दिख रहे हैं.</p> <p style="text-align: justify;">इसकी वजह वायरस में क्रमिक विकास और डेल्टा स्वरूप की विभिन्न विशेषताएं भी हो सकती हैं. लेकिन लक्षण क्यों बदल रहे हैं, इसका सटीक जवाब निर्धारित करना मुश्किल हो रहा है. हमें डेल्टा स्वरूप के बारे में और जानने की जरूरत है, लेकिन इन उभरते आंकड़ों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि ये दिखाते हैं कि जिसे हम मामूली सर्दी-जुकाम मान रहे हैं, बहती नाक और गले में दर्द कोविड-19 का लक्षण हो सकता है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Alert! सोने के समय की इन खतरनाक आदतों को फौरन क्यों रोकना है जरूरी? जानिए" href="https://ift.tt/3Amx9fD" target="">Alert! सोने के समय की इन खतरनाक आदतों को फौरन क्यों रोकना है जरूरी? जानिए</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="क्या है Cytomegalovirus और कोविड-19 के मरीजों को कैसे कर रहा प्रभावित? जानें" href="https://ift.tt/3ygizEE" target="">क्या है Cytomegalovirus और कोविड-19 के मरीजों को कैसे कर रहा प्रभावित? जानें</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3hgkTpI
Jagannath Yatra: क्यों निकाली जाती है भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा, क्या है खासियत
<p style="text-align: justify;"><strong>Jagannath Yatra :</strong> पौराणिक कथाओ के आधार पर कई लोगों का मानना है कि श्रीकृष्ण की बहन एक बार सुभद्रा अपने मायके लौटती हैं तो अपने भाइयों कृष्ण और बलराम से नगर भ्रमण की इच्छा जताती हैं, तब कृष्ण, बलराम और सुभद्रा के साथ रथ से नगर घूमने जाते हैं, तभी से रथ यात्रा का प्रारंभ माना गया है.</p> <p style="text-align: justify;">दूसरी किवदंती है कि गुंडीचा मंदिर स्थित देवी श्रीकृष्ण की मौसी हैं, यह तीनों भाई-बहन को अपने घर आने का निमंत्रण देती है. ऐसे में श्रीकृष्ण, बलराम और सुभद्रा के साथ मासी के घर 10 दिन आए हैं.</p> <p style="text-align: justify;">तीसरी किवदंती है कि श्रीकृष्ण के मामा कंस उन्हें मथुरा बुलाते हैं. इसके लिए कंस गोकुल में सारथि के साथ रथ भिजवाता है. कृष्ण भाई बहन के साथ रथ से मथुरा जाते है, तब से रथ यात्रा की शुरुआत हुई. हालांकि, कुछ लोग यह भी मानते हैं कि इस दिन कृष्ण ने कंस का वध किया था और बड़े भाई बलराम के साथ प्रजा को दर्शन देने के लिए मथुरा में रथ यात्रा की.</p> <p style="text-align: justify;">चौथी किवदंती के मुताबिक कृष्ण की रानियाां माता रोहिणी से रासलीला सुनाने को कहती हैं. माता को लगता है कि कृष्ण की गोपीयों के साथ रासलीला के बारे सुभद्रा को नहीं सुनना चाहिए, इसलिए वो उसे कृष्ण, बलराम के साथ रथ यात्रा पर भेज देती हैं. तभी वहां नारदजी आते हैं और तीनों को साथ देखकर खुश हो जाते हैं. प्रार्थना करते है कि तीनों के दर्शन ऐसे हर हर साल हों. तब से तीनों के दर्शन होते हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कृष्ण का शव लेकर समंदर में कूद जाते हैं बलराम-सुभद्रा</strong><br />कहा जाता है कि श्रीकृष्ण की मौत के बाद उनका पार्थिव शरीर द्वारिका लाया जाता है तो बलराम भाई की मृत्यु से दुखी होकर कृष्ण के शरीर समेत समुद्र में कूद जाते है, पीछे-पीछे सुभद्रा भी कूद जाती है. इस दौरान भारत के पूर्व स्थित पुरी के राजा इंद्रद्विमुना को सपना आता है कि कृष्ण का शरीर समुद्र में तैर रहा है, उसे यहां कृष्ण की विशाल प्रतिमा बनवानी चाहिए और मंदिर बनवाना चाहिए. स्वप्न में देवदूत बताते हैं कि कृष्ण के साथ, बलराम, सुभद्रा की लकड़ी की प्रतिमा बनाएं और श्रीकृष्ण की अस्थियों को प्रतिमा के पीछे छेद कर रखा जाए.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>अधूरी मूर्ति छोड़कर चले जाते हैं विश्वकर्मा</strong><br />राजा का सपना सच होता है और समुद्र से कृष्ण की अस्थियां मिल गईं. वह सोच रहा था कि उनकी प्रतिमा कौन बनाएगा. मभी शिल्पकार विश्वकर्मा बढ़ई के रूप में आते है लेकिन काम से पहले सभी केा चेताते हैं कि उन्हें काम के वक़्त परेशान नहीं किया जाये, नहीं तो वे बीच में काम छोड़ कर चल देंगे. कुछ माह बाद भी मूर्ति नहीं बन पाई तो उतावली के चलते राजा इन्द्रद्विमुना उनके कमरे का दरवाजा खोल देते है, ऐसा होते ही विश्वकर्मा गायब हो जाते है. मूर्ति उस समय पूरी नहीं बन पाती है, लेकिन राजा ऐसे ही मूर्ति स्थापित कर देते है, वो पहले मूर्ति के पीछे कृष्ण की अस्थियां रखकर मंदिर में विराजमान कर देते हैं. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें: </strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="शनिवार के दिन करें ये उपाय तो खुल जायेगी किस्मत, बढ़ेगा मान -सम्मान और सुख समृद्धि " href="https://ift.tt/3qKwaSj" target="">शनिवार के दिन करें ये उपाय तो खुल जायेगी किस्मत, बढ़ेगा मान -सम्मान और सुख समृद्धि </a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Mahabharat : गुस्से में चलाई ब्रह्मशिरा के चलते आज भी भटक रहा है अश्वत्थामा" href="https://ift.tt/3qF87nA" target="">Mahabharat : गुस्से में चलाई ब्रह्मशिरा के चलते आज भी भटक रहा है अश्वत्थामा</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3Akvzet
Budhaditya Yoga: सूर्य और बुध ग्रह की युति से बनता है बुधादित्य योग, जिसकी कुंडली में होता है उसे जीवन में मिलती है अपार सफलता
<p style="text-align: justify;"><strong>Rajyog In Kundli:</strong> जन्म कुंडली में सूर्य और बुध ग्रह की युति से एक राजयोग का निर्माण होता है, जिसे बुधादित्य योग कहा जाता है. यह राजयोग व्यक्ति को जीवन में सफलता प्रदान करता है. ज्योतिष शास्त्र में जिन राजयोग के बारे में बताया गया है, उसमे से एक बुधादित्य योग भी है. इस योग को अत्यंत शुभ योग माना गया है. सूर्य और बुध की युति से इस शुभ योग का निर्माण होता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>सूर्य ग्रह का स्वभाव</strong><br />इस राजयोग के बारे में जानने से पहले सूर्य और बुध ग्रह के स्वभाव के बारे में जान लेते हैं. सूर्य को ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों का राजा कहा गया है. सूर्य को ग्रहों का अधिपति भी कहा जाता है. सूर्य को आत्मा का कारक बताया गया है. सूर्य की शुभता से व्यक्ति को उच्च पद, मान सम्मान और लोकप्रियता की प्राप्ति होती है. सूर्य ग्रह को सिंह राशि का स्वामी बताया गया है. सूर्य मेष राशि में उच्च और तुला राशि में नीच के हो जाते हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>बुध ग्रह का स्वभाव</strong><br />नवग्रहों में बुध ग्रह को राजकुमार कहा गया है. ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि प्रदान करने वाला ग्रह भी माना गया है. बुध के शुभ होने पर व्यक्ति की भाषा और बोली मधुर होती है. व्यापार आदि में अच्छी सफलता प्राप्त होती है. मिथुन और कन्या राशि के स्वामी बुध ही हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>बुधादित्य का फल</strong><br />बुधादित्य योग जब वृष, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, कुंभ लग्न में हो तो व्यक्ति प्रभावशाली होता है. ऐसे व्यक्तियों को दूसरों को निर्देश देना अच्छा लगता है. ऐसे लोग अच्छे प्रशासक, बॉस और लीडर साबित होते हैं. बुधादित्य योग सभी लग्न और राशियों में अलग अलग शुभ फल प्रदान करता है. जिस कुंडली में यह योग होता है, वह जीवन में सफलता प्राप्त करता है. इस योग को शुभ बनाए रखने के लिए सूर्य देव को रविवार को जल अर्पित करना चाहिए. इसके साथ बुधवार को गणेश जी की पूजा करनी चाहिए.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें</strong><br /><strong><a title="Sawan 2021: सावन के महीने में है नाग पंचमी का पर्व, जानें डेट, मुहूर्त और महत्व" href="https://ift.tt/3xctf7d" target="">Sawan 2021: सावन के महीने में है नाग पंचमी का पर्व, जानें डेट, मुहूर्त और महत्व</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Chaturmas 2021: आषाढ़ी पूर्णिमा से चातुर्मास का होगा आरंभ, पूजा,पाठ और अध्ययन के लिए है उत्तम समय" href="https://ift.tt/3Am3DXC" target="">Chaturmas 2021: आषाढ़ी पूर्णिमा से चातुर्मास का होगा आरंभ, पूजा,पाठ और अध्ययन के लिए है उत्तम समय</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3yk1kSV
घर से कई तरह के कीड़े-मकोड़ों को बिना कीटनाशक इस्तेमाल किए भगाएं दूर, ये तेल करेंगे मदद
कई बार बारिश के दिनों में कीड़े-मकोड़े घर की समस्या बन जाते हैं. ये समस्या उन घरों के लिए और भी बड़ी हो जाती है, जहां छोटे बच्चे होते हैं. घर की सफाई के बावजूद उनसे छुटकारा पाना घरवालों के लिए काफी दुश्वार हो जाता है. लेकिन कुछ लोग हो सकते हैं कि इन जहरीले कीड़े-मकोड़ों को हटाने के लिए घर में रेपेलेंट बच्चों और उनके स्वास्थ्य को देखते हुए नहीं लाना चाहते होंगे. अगर आप भी कीड़े-मकोड़ों को दूर भगाने के लिए जहरीले कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं, तब आप खास प्रकार के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं.
पुदीने का तेल-
कीटनाशक के तौर पर आप पुदीने के तेल को भी इस्तेमाल में ला सकते हैं. ये तेल चींटियों, मकड़ियों और उड़ने वाले कीड़ों को दूर करने में आपकी मदद करेगा. इसके लिए आप पानी में पुदीने का तेल मिलाकर घर में छिड़काव करें. आप इस तेल को कपास की गेंद में डालकर दरवाजों और खिड़कियों के पास रख दें.
नीम का तेल- आप कीड़े-मकोड़ों से छुटकारा के लिए नीम का तेल इस्तेमाल कर सकते हैं. उसमें एंटी फंगल और बैक्टीरिया रोधी तत्व होते हैं जो घर से कीड़े-मकोड़ों को दूर करने में मदद करेंगे. इसके लिए, आधा बाल्टी पानी में सात से आठ चम्मच नीम का तेल मिक्स करें और इससे फर्श पर पोछा करें. लेकिन अगर आप उसका इस्तेमाल दिन में कई बार करना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको एक स्प्रे बोतल को दो ग्लास पानी में सात-18 चम्मच नीम का तेल मिलाकर भरना होगा. फिर इसका समय-समय पर घर पर छिड़काव करते रहें.
चाय के पेड़ का तेल-. मकड़ी, मक्खियां और तिलचट्टों समेत कीड़े-मकोड़ों को भगाने के लिए चाय के पेड़ का तेल इस्तेमाल करें. इस तेल में बैक्टीरिया रोधी और सूजन रोधी गुण पाए जाते हैं, जिसके कारण कीट-पतंग भागेंगे. उसके लिए, दो ग्लास पानी में दो चम्मच चाय के पेड़ का तेल मिक्स करें. फिर उसे स्प्रे बोतल में भरकर घर में छिड़काव करें. अगर आप चाहते हैं, तो उसका छिड़काव किचन के काउंटर और कपड़ों पर भी कर सकते हैं.&
Clothes Care In Monsoon: क्या बारिश में आपके कपड़ों से बदबू आती है? इन उपायों से मिनटों में करें दूर
<p style="text-align: justify;">मॉनसून में कपड़े की देखभाल करना किसी चुनौती से कम नहीं. हालांकि, बरसात की फुहारें हर किसी को लुभाती हैं, लेकिन ये मौसम कुछ समस्याओं के कारण मूड खराब कर देता है. उसमें से एक कपड़ों से बदबू का आना है. इस मौसम का माहौल अत्यधिक नम होने के कारण कपड़ों से जल्दी बदबू आने लगती है. कभी-कभी बदबू से इस्तेमाल के कपड़ों का पहनना मुश्किल हो जाता है. समस्या के पीछे का कारण बैक्टीरिया का विकास है. ऐसी स्थिति में, बदबूदार कपड़े पहनने से स्किन की बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है. अगर आप भी बारिश की इस समस्या से मुश्किल में हैं, तो कुछ टिप्स का पालन कर आप कपड़ों की दुर्गंध को हटा सकते हैं. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>मॉनसून सीजन में कपड़ों की देखभाल के आसान उपाय</strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong>रोजना सफाई की जरूरत-</strong> पसीने से तर कपड़ों को कभी स्टोर न करें. उनकी रोजाना सफाई बहुत महत्वपूर्ण है. अगर आप ऐसे कपड़े जमा करते हैं या उनको सफाई के बिना अलमारी में रखते हैं, तो इसके चलते आपके दूसरे कपड़ों से भी दुर्गंभ आने लगेगी. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>सिरका और बेकिंग सोडा का इस्तेमाल-</strong> बरसाते के दिनों में अगर धोने के बाद कपड़ों से बदबू आती है, तब आपको बेकिंग सोडा या बदबू हटाने के लिए इस्तेमाल करें. स्पष्ट अंतर देखने के लिए कपड़ों से आ रही दुर्गंध को खत्म करने के लिए डिटर्जेंट के साथ बेकिंग सोडा या सिरका को अपनाएं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>हवा में कपड़ों को सुखाएं-</strong> जब कभी आप कपड़ों को धोएं, तो सुखाने के लिए ऐसी जगह तलाश करें जहां पर्याप्त हवा हो. आप फैन की हवा में भी बरसात के दौरान कपड़ों को सुखा सकते हैं. ऐसा करने से आपके कपड़ों से बदबू नहीं आएगी. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>नींबू रस का इस्तेमाल-</strong> इस मौसम में अत्यधिक नमी के कारण भीगे कपड़े दुर्गंध देने लगते हैं. ऐसी स्थिति में, अगर आप कपड़ों की धुलाई करते वक्त नींबू के रस का इस्तेमाल करते हैं, तो कपड़ों से बदबू नहीं आएगी और ये ताजा रहेंगे. </p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="वजन कम करने के लिए रस्सी कूद या दौड़ने में से कौनसा विकल्प है ज्यादा बेहतर? जानिए" href="https://ift.tt/3jB0g9a" target="">वजन कम करने के लिए रस्सी कूद या दौड़ने में से कौनसा विकल्प है ज्यादा बेहतर? जानिए</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="पपीते की पत्ती का जूस इन वजहों से करें इस्तेमाल, जानिए हैरतअंगेज फायदे और बनाने के तरीके" href="https://ift.tt/3ygizEE" target="">पपीते की पत्ती का जूस इन वजहों से करें इस्तेमाल, जानिए हैरतअंगेज फायदे और बनाने के तरीके</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3ymYXP5
Alert! सोने के समय की इन खतरनाक आदतों को फौरन क्यों रोकना है जरूरी? जानिए
<p style="text-align: justify;">दिन भर की भागदौड़, अत्यधिक तनाव और लगातार स्क्रीन के संपर्क में रहने के कारण हमारी आंखों में जलन महसूस होती है और सिर दर्द होता है. ऐसी स्थिति में हमारा पसंदीदा समय सोने का समय होता है. आखिर बिस्तर पर जाना और सो जाना कितना राहत देनेवाला होता है, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता. लेकिन, कुछ लोगों के लिए बिस्तर पर फौरन जाते ही नींद एक सपना बन जाती है. क्या आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो थक तो बहुत जाते हैं, लेकिन बिस्तर पर जाने के बाद नींद मुश्किल हो जाती है?</p> <p style="text-align: justify;">आप असहज रूप से अपने बिस्तर पर करवटें बदल रहे हैं और नींद के लिए प्रार्थना कर रहे हैं? नींद की तलाश में खुद को रात काटनेवाला घोषित करने या नींद की समस्या के लिए डॉक्टर के पास जाने से पहले, अपनी दिनचर्या को टटोलिए. बिस्तर पर जाने से पहले कई ऐसे काम हम करते हैं जो हमारी नींद के लिए बेहद नुकसानदेह होती हैं. अगर आप भी ऐसा कर रहे हैं, तो इन खतरनाक आदतों को फौरन छोड़ दें. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>शाम में धूम्रपान-</strong> दिन में लंबे काम के बाद अगर आप थक गए हैं और आपको बिस्तर पर जाने के लिए एक कश की जरूरत हो सकती है. लेकिन, ये मामूली कश रातों की नींद हराम करने का मुख्य कारण हो सकता है. तंबाकू में सक्रिय एक घटक निकोटीन का आप सेवन कर रहे हैं. निकीटोन एक उत्तेजक है और इस तरह इस प्रकार अधिक बार अनिद्रा का कारण नहीं बन सकता. न सिर्फ नींद ही नहीं, बल्कि धूम्रपान नींद की अन्य समस्या जैसे स्लीप एपनिया भी पैदा कर सकता है. अगर आपको सोने में दुश्वारी आ रही है और आप एक स्मोकर हैं, तो जान लीजिए नींद और धूम्रपान दोनों एक साथ नहीं चल सकते. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>फोन का इस्तेमाल-</strong> सोने से पहले फोन नहीं इस्तेमाल करने की सलाह आपने निश्चित रूप से सुनी होगी. लेकिन, सही जानकारी के अभाव में आप बिस्तर पर अभी भी फोन का इस्तेमाल कर रहे होंगे. आपको जानना चाहिए फोन या डिजिटल डिवाइस से किरणों का उत्सर्जन होता जिसका इस्तेमाल सोने से पहले नहीं करना चाहिए. बिस्तर पर लेटे हुए फोन को चेक करना आपके दिमाग को सक्रिय रखता है और उसे आराम करने से रोकता है. दूसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात, फोन से निकलनेवाली किरणें मेलाटोनिन लेवल को दबा देती हैं. ये हार्मोन आपकी स्लीप साइकिल में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसलिए, अगर मेलाटोनिन लेवल की कमी होगी, तो निश्चित रूप से नींद लेने में आप सक्षम नहीं हो पाएंगे. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>शाम के वक्त कैफीन-</strong> आप घर से काम कर रहे होंगे और आपको विशेष रूप से शाम को मौसम के अनुकूल नहीं रहने और काम के बहुत ज्यादा दबाव से निपटने के लिए कैफीन की जरूरत हो सकती है. एक कप कैफीन की शक्ति आपको सक्रिय रखती है. लेकिन, कैफीन का इस्तेमाल न सिर्फ काम के घंटों में आपको सक्रिय रखता है बल्कि सोने की कोशिश के दौरान भी असर दिखाता है! कैफीन हमारे दिमाग को सतर्क और जागरुक रखता है, जो हमारी स्लीप साइकिल में बाधा का कारण बनती है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>देर रात वर्कआउट-</strong> वर्कआउट निश्चित रूप से आपके शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए अच्छा है. वास्तव में, जिस दिन आप व्यायाम करते हैं, आपके एक बच्चे की तरह सोने की संभावना ज्यादा होती है. लेकिन, दिन के आखिरी पहर, 7 बजे के बाद सख्त वर्कआउट का आपके स्लीप पैटर्न पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है. ये आपके स्थिर दिल की धड़कन को बाधित करेगा जबकि आपको लगेगा कि देर रात तक वर्कआउट करने से आप थक गए हैं और नींद आपसे चंद कदम दूर है. ये आपके दिल की धड़कन को बढ़ा देगा और आपका शरीर ज्यादा सक्रिय हो जाएगा. हालांकि, टहलना या घूमना हानिकारक नहीं है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="पपीते की पत्ती का जूस इन वजहों से करें इस्तेमाल, जानिए हैरतअंगेज फायदे और बनाने के तरीके" href="https://ift.tt/3yhUYDB" target="">पपीते की पत्ती का जूस इन वजहों से करें इस्तेमाल, जानिए हैरतअंगेज फायदे और बनाने के तरीके</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Food Allergy: ये आम खाद्य पदार्थ भी बना सकते हैं आपको एलर्जी का शिकार, जानिए लक्षण" href="https://ift.tt/3ApPN6f" target="">Food Allergy: ये आम खाद्य पदार्थ भी बना सकते हैं आपको एलर्जी का शिकार, जानिए लक्षण</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3Amx9fD
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