Tuesday, June 29, 2021
Ramayan: सरोवर से निकली मोहिनी के बालों से बाली तो गले से जन्मे थे सुग्रीव
<p style="text-align: justify;"><strong>Ramayan :</strong> पौराणिक कथाओं के अनुसार सुमेरु पर्वत पर ब्रम्हा जी का कोर्ट था. यह 100 योजन विस्तृत क्षेत्र में फैला था. एक बार तपस्या करते हुए ब्रम्हा जी की आंख से आंसू की दो बूंद गिर रही थी तो ब्रम्हा जी ने हाथ से पोंछ दिया. तब एक बूंध धरती पर गिर गई, जिससे एक वानर का जन्म हुआ. तब उन्होंने वानर से कहा- तुम इस पहाड़ की चोटी पर रहोगे. कुछ समय बाद यह अच्छा होगा. इस पर वानर वहीं रहकर रोज ब्रम्हाजी को पुष्प अर्पित करता रहा.</p> <p style="text-align: justify;">काफी दिन बाद एक दिन रीछराज वहां से गुजरे, उन्हें तेज प्यास लगी थी तो तालाब में झुक कर पानी पीने लगे. इस दौरान वहां एक परछाई दिखाई दी. उन्हें लगा कि कोई दुश्मन मारने वाला है तो वे तालाब में कूद गए. लेकिन जब निकले एक खूबसूरत युवती में बदल चुके थे. इसी बीच इंद्र और सूर्यदेव वहां से गुजर रहे थे, उनकी नजर सुंदर युवती पर पड़ी तो दोनों ही मोहित हो गए. इसके चलते इंद्र की मणि सुंदरी के सिर पर जा गिरी, जिससे एक वानर का जन्म हुआ. चूंकि वानर का जन्म युवती के बालों से हुआ था, इसलिए नाम बाली पड़ा. जबकि सूर्य की मणि उस युवती के गले पर जा गिरी, इस कारण एक और वानर का जन्म हुआ जो कि सुग्रीव कहलाया. हालांकि दोनों भाई एक जैसे दिखते थे, यही वजह थी कि वध के समय राम को सुग्रीव की पहचान करने के लिए गले में माला डालनी पड़ी थी.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>बाली को मिला हार, सुग्रीव हनुमान उपहार</strong></p> <p style="text-align: justify;">इंद्र ने बाली को एक सोने का हार दिया, जबकि सूर्य ने सुग्रीव को हनुमान के रूप में सच्चा मित्र और रक्षक दिया. इसके बाद वह युवती दोबारा रीछराज में बदल गई. इसलिए रीछराज बाली और सुग्रीव दोनों की मां और पिता हैं. रीछराज ब्रम्हाजी के पास गए और उन्होंने किष्किन्धा जाने को कहा, वहां रीछराज ने बड़े बेटे बाली को राजा बना दिया. कुछ समय बाद उनकी मृत्यु हो गई.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>इन्हें भी पढ़ें: </strong></p> <p style="text-align: justify;"><a title="Chanakya Niti : जीवन में ये छह बातें बिना आग के ही शरीर को जला देती हैं" href="https://ift.tt/3AaczPx" target="">Chanakya Niti : जीवन में ये छह बातें बिना आग के ही शरीर को जला देती हैं</a></p> <p style="text-align: justify;"><a title="Sawan Shivratri Puja 2021 Date: कब है श्रावण शिवरात्रि पूजा? जानें जलाभिषेक का समय, मुहूर्त व पूजा विधि" href="https://ift.tt/3w3Mxu0" target="">Sawan Shivratri Puja 2021 Date: कब है श्रावण शिवरात्रि पूजा? जानें जलाभिषेक का समय, मुहूर्त व पूजा विधि</a></p> lifestyle https://ift.tt/3A9oFsf
Safalta Ki Kunji : सफलता के लिए लक्ष्य नहीं, विश्वास-समर्पण को बनाएं हथियार
<p style="text-align: justify;"><strong>Safalta Ki Kunji : </strong>चाणक्य नीति बताती है कि कर्म क्षेत्र में सफलता के लिए व्यक्ति को लक्ष्य नहीं, अपनी पसंद, विश्वास और समर्पण को हथियार बनाना चाहिए. यदि आप किसी क्षेत्र में अप्रत्याशित सफलता चाहते हैं तो इसके लिए कतई लक्ष्य न रखें, अपने रुझान, समर्पण और उत्सुकता को बनाए रखने से ही यकीन मानिए खुद-ब-खुद सफलता मिलनी शुरू हो जाएगी. लक्ष्य आपको तनाव, क्षमता में कमी और प्रतिद्वंद्विता की बेचैनी से भर देगा. आप शीर्ष का सफर तय कर पाएंगे. </p> <p style="text-align: justify;">एक विद्वान बताते हैं कि मुझे सफलता का कोई मंत्र नहीं पता है, लेकिन असफलता का मूल मंत्र हर वक्त मस्तिष्क में बसा है. सभी को खुश करने का प्रयास ही असफलता का पहला द्वार है. सफलता सिर्फ अत्यधिक परिश्रम चाहती है. शॉर्टकट क्षणिक सुख देंगे, स्थाई सफलता के लिए लक्ष्य नहीं, समर्पण-संकल्प और विश्वास अनिवार्य है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>काम की शुरुआत से पहले तय करें ये बातें</strong><br /><strong>सहजता :</strong> कामकाज में सहजता का भाव जरूरी है. अन्यथा लक्ष्य से दूर हुए तो मानसिक अवसाद या तनाव घेर सकता है. <br /><strong>सावधानी :</strong> आप का समर्पण और विश्वास आपके कर्म के जरिए आपके भाग्य को नए सिरे से लिखता है. सहयोगियों को समर्थन और कार्य वितरण में सावधानी जरूरी है.<br /><strong>संकल्प :</strong> हम प्राय: भाग्य को कोसने लगते हैं, लेकिन समझना जरूरी है कि भाग्य भी साहसी व्यक्ति का साथ देता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>इन्हें भी पढ़ें: </strong></p> <p style="text-align: justify;"><a title="Mangal Dosh: कुंडली में क्या होता है मंगल दोष? जानें इसके निवारण के महत्वपूर्ण उपाय" href="https://ift.tt/3y3gAn1" target="">Mangal Dosh: कुंडली में क्या होता है मंगल दोष? जानें इसके निवारण के महत्वपूर्ण उपाय</a></p> <p style="text-align: justify;"><a title="Owl the ride of Lakshmi Maa: माता लक्ष्मी ने क्यों बनाया उल्लू पक्षी को अपनी वाहन? जानें पौराणिक कहानी" href="https://ift.tt/2UOQbeB" target="">Owl the ride of Lakshmi Maa: माता लक्ष्मी ने क्यों बनाया उल्लू पक्षी को अपनी वाहन? जानें पौराणिक कहानी</a></p> lifestyle https://ift.tt/3wdNXT3
हैदराबाद की ये लड़की बनी फूड डिलीवरी एक्जीक्यूटिव, वजह आपको जरूर करेगी प्रभावित
<p style="text-align: justify;">दिहाड़ी मजूदर की बेटी ने पुरुष प्रधान पेशे में कदम रख न सिर्फ अपनी पढ़ाई पूरी करने की ठान ली है बल्कि अपने परिवार का भी गुजर बसर कर रही है. हैदराबाद में फूड डिलीवरी एक्जीक्यूटिव के तौर पर काम करनेवाली ममेडिपल्ली रचना की कहानी संघर्ष, समर्पण और कड़ी मेहनत की मिसाल है. तेलंगाना के वारंगल जिला की रहनेवाली बेटी ममेडिपल्ली रचना होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरा करने आई थी. लेकिन, एक तरफ पढ़ाई का खर्च सहन करने में असमर्थता और दूसरी तरफ परिजनों की गरीबी रचना की राह में रोड़े बनकर खड़ी थी.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>पुरुष-प्रधान पेशे में गरीब की लड़की ने रखा कदम</strong></p> <p style="text-align: justify;">पढ़ाई का खर्च और परिजनों की जिम्मेदारी पूरा करने के लिए शुरू में उसने दरवाजे-दरवाजे दूध पहुंचाना शुरू किया. रचना ने कहा, "मैंने सरकारी स्कूल में 12वीं तक की पढ़ाई फ्री में की. आगे पढ़ाई जारी रखने की मेरी दृढ़ इच्छा थी और अपने स्कूल टीचर की सलाह पर मैं हैदराबाद में होटल मैनेजमेंट डिप्लोमा कोर्स में दाखिला ले पाने में सक्षम हो पाई." उसने आगे बताया कि शुरू में उसने दूध की दुकान पर नौकरी की जहां उसे दूध वितरित करने के लिए सुबह चार बजे उठना पड़ता था और फिर क्लास में शिरकत करना होता था. उसने कहा, "महीने के आखिर में मैं घर 9 हजार रुपए ले जाती थी जिसमें से 3 हजार मेरे रूम का किराया चुकता होता था और बाकी रकम अपने माता-पिता के लिए वापस घर भेज देती थी. मेरे पास मात्र एक हजार रुपए जरूरी सामान को पूरा करने के लिए होता था, शहर में मेरे लिए गुजर-बसर करना मुश्किल था."</p> <p style="text-align: justify;"><strong>पढ़ाई और परिवार दोनों की जिम्मेदारी कर रही पूरा</strong></p> <p style="text-align: justify;">हालांकि, जब कोविड-19 की महामारी शुरू हुई, तो रचना ने अपने परिवार का साथ देने के लिए फूड डिलीवरी की नौकरी करने का फैसला किया. ये पेशा आम तौर पर पुरुष प्रधान समझा जाता है. उसने कहा, "मुझे ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म से इस नौकरी के बारे में जानकारी मिली और फूड डिलीवरी एक्जीक्यूटिव के तौर पर शामिल हो गई." उस वक्त से लेकर अब तक, रचना फूड डिलीवरी एक्जीक्यूटिव के तौर पर काम कर अपने परिवार, पढ़ाई और खुद का खर्चा चला रही है. जब उसके भविष्य की योजनाओं के बारे में पूछा गया, तो रचना ने बताया कि जैसे ही उसके होटल मैनेजमेंट का कोर्स पूरा हो जाता है, ट्रेनिंग लेकर स्थायी नौकरी हासिल करने की कोशिश करेगी. उसने कहा, "मैंने ये काम सिर्फ खुद के लिए और माता-पिता की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए किया है." </p> lifestyle https://ift.tt/3doPWND
Mahabharat : रुक्मणि को मंडप से उठा ले गए कृष्ण और देखता रह गया शिशुपाल
<p style="text-align: justify;"><strong>Mahabharat :</strong> महाभारत कथा में भले ही शिशुपाल के वध की कथा रोचक मानी जाती है, लेकिन इससे भी अधिक रोचक उसके जन्म की घटनाएं हैं. कहा जाता है शीशपाल का जब जन्म हुआ था तो तीन आंख और चार हाथ के साथ जन्मा था. ऐसे में माता-पिता ने उसे असुर शक्ति समझकर त्यागना ठीक समझा, तभी एक आकाशवाणी हुई, जिसमें बताया कि कोई दिव्य पुरुष की गोद में आते ही शिशुपाल सामान्य रूप में आ जाएगा. <br /><br />एक बार श्रीकृष्ण बुआ के घर गए तो उनके पुत्र शिशुपाल को कृष्ण ने स्नेहवास गोद में बिठा लिया, तभी शिशुपाल के अतिरिक्त अंग एक आंख, दो हाथ गायब हो गए तब उनके माता-पिता को वह आकाशवाणी याद आई, जिसके अनुसार विधि अनुसार वही व्यक्ति उनके बेटे की मृत्यु का कारण बनेगा, इस पर व्यथित कृष्ण की बुआ ने वचन ले लिया कि कृष्ण शिशुपाल का वध नहीं करेंगे. ऐसा करने से कृष्ण मना तो नहीं कर पाए, लेकिन बुआ को दुखी नहीं करना चाहते थे तो वचन दे दिया कि वह शीशपाल की सौ गलतियों को क्षमा कर देंगे. वध करना पड़ा तो भी शिशुपाल बैकुंठधाम को प्राप्त करेगा. <br /><br />इधर युवा हो रहे शिशुपाल का विवाह राजकुमार रुक्मा ने अपनी बहन रुक्मणी से तय किया था, लेकिन रुक्मणी सिर्फ श्रीकृष्ण को चाहती थीं और उनसे ही विवाह करना चाहती थीं. इस बीच रुक्मणी के विवाह के सारे आयोजन हो चुके थे, तब कृष्ण रुक्मणी को महल में मंडप से भगा कर ले गए और खुद विवाह कर लिया. इस अपमान से शिशुपाल कृष्ण से जलभुन गया. वह उन्हें भाई न मानकर शत्रु मान बैठा. <br /><br /><strong>सम्मान पर देने लगा गालियां</strong><br />युधिष्ठिर के युवराजाभिषेक में कृष्ण को सबसे पहले भेंट आदि से सम्मानित किया गया तो शिशुपाल अपनी शत्रुता के चलते क्रोध से भर कर उन्हें अपशब्द बोलते लगा. कृष्ण बुआ और उसकी मां को दिए वचन के चलते चुप रहे लेकिन जैसे ही शिशुपाल ने सौ अपशब्द पूरे किए और 101वां शब्द कहा, कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र का आवाहन कर उसका वध कर डाला.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>इन्हें भी पढ़ें: </strong><br /><a title="Mangal Dosh: कुंडली में क्या होता है मंगल दोष? जानें इसके निवारण के महत्वपूर्ण उपाय" href="https://ift.tt/3y3gAn1" target="">Mangal Dosh: कुंडली में क्या होता है मंगल दोष? जानें इसके निवारण के महत्वपूर्ण उपाय</a></p> <p style="text-align: justify;"><br /><a title="Owl the ride of Lakshmi Maa: माता लक्ष्मी ने क्यों बनाया उल्लू पक्षी को अपनी वाहन? जानें पौराणिक कहानी" href="https://ift.tt/2UOQbeB" target="">Owl the ride of Lakshmi Maa: माता लक्ष्मी ने क्यों बनाया उल्लू पक्षी को अपनी वाहन? जानें पौराणिक कहानी</a></p> lifestyle https://ift.tt/3qw7fSi
Chanakya Niti : जीवन में ये छह बातें बिना आग के ही शरीर को जला देती हैं
<p style="text-align: justify;"><strong>Chanakya Niti:</strong> आचार्य चाणक्य मानते थे कि व्यक्ति की सफलता परिश्रम और संकल्प की दिशा से तय होती है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण बातें ऐसी भी हैं जो व्यक्ति से जुड़ जाएं या व्यक्ति इनके संपर्क में आए तो व्यक्ति खुद को असहाय, लज्जित और पीड़ा से भरा महसूस करता है. यही मनोदशा उसके शरीर को भीतर से जला देती हैं. इन परिस्थितियों से निकलने के लिए पूरे जतन की जरूरत होती है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>पत्नी वियोग :</strong> सामंजस्य की कमी या मृत्युवश पत्नी वियोग आपके लिए नुकसानदेह हो सकता है. संबंधों में सुधारते हुए या नए संबंधों से जुड़ना ही सफल निदान है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>अपनों से बेइज्जत होना :</strong> भले ही आप परिवार के छोटे सदस्य हों, कार्यस्थल पर कनिष्ठ हो, अपनों से बेइज्जती मन व्यथित बनाती है. आत्मसम्मान-निर्णय की स्थिति मजबूत बनाएं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>बचा ऋण:</strong> जीवन में बड़े कार्य के लिए संस्था, साहूकार या व्यक्ति से ऋण लेना पड़ सकता है, उसे चुकाने के प्रयास में कमी कष्टकारी है. ठोस कार्ययोजना से ही यह दूर हो सकेगा.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>दुष्ट राजा या वरिष्ठ की सेवा:</strong> यह ऐसी मनोदशा है, जिससे व्यक्ति स्वयं सुनिश्चित नहीं कर सकता, मगर निदान के लिए बुद्धि, विवेक और संयम सक्षम कारगर हथियार हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>गरीबी या दरिद्रता:</strong> अपनी सभी जरूरत पूरी करना अधिकांश के लिए संभव नहीं है, लेकिन संकल्प भाव से प्रयास जरूर लाभकारी हैं. ऐसे समाज में बने रहना भी प्रगति में बाधक है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ऐसे मित्रों पर विश्वास विनाशकारी</strong><br />आचार्य चाणक्य कहते हैं विश्वास नीति आपकी सफलता का द्योतक है, लेकिन यह उन परिस्थिति या व्यक्ति पर निश्चित है जो आपके साथ हो. आचार्य के मुताबिक एक बुरे व्यक्ति या मित्र पर कभी विश्वास न करें, यह अनंत सत्य है, परंतु एक अच्छे मित्र पर भी आगाध विश्वास नहीं करना चाहिए. यदि वह आप से रुष्ट हुआ तो आपके सभी राज से पर्दा हटा देगा. </p> <p style="text-align: justify;"> </p> lifestyle https://ift.tt/3AaczPx
कोरोना से उबर चुके लोगों को क्या मॉडर्ना या फाइजर की वैक्सीन का मात्र एक डोज है पर्याप्त? जानें रिसर्च
<p style="text-align: justify;">शोधकर्ताओं का कहना है कि जो लोग कोविड-19 से ठीक हो चुके हैं, उनको वैक्सीन के सिर्फ एक डोज की जरूरत हो सकती है. रिसर्च के मुताबिक, दूसरे डोज ने कोरोना वायरस के खिलाफ अतिरिक्त इम्यूनिटी पैदा नहीं की. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया लॉस एंजिल्स के शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग कोरोना वायरस से पूर्व में संक्रमित हो चुके थे, उनको दो डोज वाली वैक्सीन के मात्र एक डोज से कोविड-19 के खिलाफ पर्याप्त इम्यून रिस्पॉन्स हासिल हुआ.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>पूर्व के कोरोना संक्रमण पर वैक्सीन का एक डोज की जरूरत </strong></p> <p style="text-align: justify;">उन्होंने ये भी पता लगाया कि दूसरे डोज से कोरोना वायरस के खिलाफ अतिरिक्त सुरक्षा नहीं मिली. रिसर्च के लिए टीम ने पूर्व में कोविड-19 से संक्रमित 36 लोगों को शामिल किया और 26 लोगों में वायरस का ज्ञान इतिहास नहीं था. हर प्रतिभागियों को या तो फाइजर-बायोएनटेक या मॉडर्ना की कोविड-19 वैक्सीन का एक डोज लगाया गया. शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन 26 लोगों में कोरोना की हिस्ट्री नहीं थी, उन सभी में एंटीबॉडी लेवल पहले डोज के बाद हल्के संक्रमण वाले के बराबर विकसित हुआ. लेकिन जो लोग कोविड-19 को मात दे चुके थे, उन सभी 36 लोगों में एंटीबॉडी लेवल मात्र एक डोज से बुरी तरह संक्रमित मरीजों के समान पैदा हुआ. उससे ज्यादा दिलचस्प घटना ये हुई कि दूसरा डोज लगवाने के बाद एंटीबॉडी लेवल में कोई बढ़ोतरी नहीं देखी गई.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>दूसरे डोज से नहीं या नहीं के बराबर मिला फायदा- रिसर्च </strong></p> <p style="text-align: justify;">यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया लॉस एंजिल्स स्कूल ऑफ मेडिसीन ने बयान में कहा، "हमारे डेटा बताते हैं कि कोई शख्स अगर पूर्व में कोरोना से संक्रमित हो चुका है, तो उसको पहली एमआरएनए तकनीक आधारित टीकाकरण के बाद बड़ा रिस्पॉन्स मिलता है और दूसरे डोज से या तो कोई फायदा नहीं या नहीं के बराबर फायदा होगा. वैक्सीन का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने और गैर जरूरी साइड-इफेट्स से बचने के लिए जन स्वास्थ्य नीति में इस पहलू से बदलाव पर विचार किया जा सकता है."</p> <p style="text-align: justify;">पूर्व के रिसर्च से पता चला था कि कोविड-19 से मिलनेवाली स्वाभाविक एंटीबॉडीज एक शख्स को दस महीनों तक वायरस से सुरक्षा दे सकती है. एक अन्य रिसर्च में पाया गया था कि मॉडर्ना की कोविड-19 वैक्सीन का मात्र एक डोज लगवाने वालों को 28 दिनों बाद कोरोना वायरस से संक्रमित होने का 95 फीसद कम खतरा हो गया. हालांकि, ताजा रिसर्च से खुलासा होता है कि 85 दिनों बाद एंटीबॉडीज लेवल में स्वाभाविक तौर पर 90 फीसद की कई आ गई, चाहे मरीजों को पूर्व में कोरोना वायरस ने अपनी चपेट में लिया था या नहीं. इसका मतलब हुआ कि तीसरे बूस्टर डोज की किसी मौके पर जरूरत हो सकती है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ अभी भी कोविड-19 वैक्सीन के दोनों डोज लगवाने की सिफारिश करते हैं, चाहे किसी को पूर्व में संक्रमण हुआ है या नहीं. </p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Skin Care Tips: दाने और मुंहासे हैं खूबसूरती के दुश्मन, किचन की इन सामग्रियों से करें सफाया" href="https://ift.tt/3h9CgXG" target="">Skin Care Tips: दाने और मुंहासे हैं खूबसूरती के दुश्मन, किचन की इन सामग्रियों से करें सफाया</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Diabetes Tips: डायबिटीज रोगी इन नियमों का करें पालन, स्वस्थ ब्लड शुगर लेवल होगा मेंटेन" href="https://ift.tt/3wdyItj" target="">Diabetes Tips: डायबिटीज रोगी इन नियमों का करें पालन, स्वस्थ ब्लड शुगर लेवल होगा मेंटेन</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"> </p> lifestyle https://ift.tt/3w1CfdN
Skin Care Tips: दाने और मुंहासे हैं खूबसूरती के दुश्मन, किचन की इन सामग्रियों से करें सफाया
<p style="text-align: justify;">स्किन की समस्याओं में मुहांसे और दाने बहुत आम हैं और उसका सामना करीब हर उम्र के लोगों को करना पड़ता है. ये आम तौर से स्किन में सूजन या पेट में टॉक्सिसिटी के कारण होता है. आपकी डाइट आपकी अधिकतर स्किन समस्याओं को काबू करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है. डेयरी के इस्तेमाल से बचा जाना चाहिए क्योंकि ये इंसुलिन रिस्पॉन्स उभारने का काम करता है. किचन के कुछ सामान दानों से छुटकारा दिलाने में आपकी मदद कर सकते हैं और जादुई तौर पर उसे हटाते हैं. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>नींबू-</strong> नींबू को दानों के चमत्कारी इलाज के तौर पर बताया जाता रहा है. नींबू में साइट्रिक एसिड गुण रोगाणु रोधक के तौर पर काम करता है. नींबू का रस स्किन पर बैक्टीरिया की संख्या कम करने में मदद करता है. आगे चलकर ये आपको दानों से छुटकारा दिलाता है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>शहद-</strong> कच्चा शहद का इस्तेमाल कर आप दानों से मुक्ति पा सकते हैं क्योंकि उसमें प्रभावी रोगाणु रोधी गुण होते हैं जो आगे बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकने में मदद करता है. शहद में सूजन रोधी गुण पाए जाने की वजह से ये लालिमा और सूजन की रोकथाम में मदद करता है. लालिमा और सूजन मुंहासे और दानों के साथ आम हैं. शहद हाइड्रोजन पेरोक्साइड के कम लेवल को रिलीज करता है जो स्किन को डिसइंफेक्ट करने में मदद करता है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>हल्दी-</strong> हल्दी का इस्तेमाल लंबे समय से दानों और मुंहासों के इलाज में किया जाता रहा है क्योंकि उसमें औषधीय और चिकित्सकीय गुण होता है. करक्यूमिन यौगिकों की मौजूदगी के कारण ये दानों से छुटकारा दिलाने में मदद करता है. उसमें रोगाणु रोधी, सूजन रोधी और बैक्टीरिया रोधी गुण होने के कारण बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकने में मदद मिलती है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>एलोवेरा-</strong> एलोवेरा में बैक्टीरिया रोधी गुण पाए जाते हैं और ये प्रभावी तरीके से आपके चेहरे के निशान या दानों का इलाज कर सकता है. उसका ऐंटिफंगल गुण स्किन की सूजन का इलाज करने में मददगार है. एलोवेरा पौधे में मैग्नीशियम लैक्टेट के कारण दानों से पैदा होनेवाली खुजली को रोकने में मदद मिलती है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Pregnancy Tips: प्रेगनेन्सी में बरतें विशेष सावधानी, इन खाद्य पदार्थों का न करें सेवन" href="https://ift.tt/3hfIGVs" target="">Pregnancy Tips: प्रेगनेन्सी में बरतें विशेष सावधानी, इन खाद्य पदार्थों का न करें सेवन</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="बेली फैट घुलाने में ये आसान व्यायाम हैं बेहद प्रभावी, आज ही अपने वर्कआउट प्लान में करें शामिल" href="https://ift.tt/3jp5Qvm" target="">बेली फैट घुलाने में ये आसान व्यायाम हैं बेहद प्रभावी, आज ही अपने वर्कआउट प्लान में करें शामिल</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3h9CgXG
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