Monday, June 7, 2021

दही के साथ इन खाद्य सामग्रियों को तुरंत खाना छोड़ दें, वरना सेहत के लिए हो सकता है जोखिम

<p style="text-align: justify;">दही का स्थान ज्यादातर भारतीय घरों में प्रमुख है. उसे गर्म पराठा, मीठी लस्सी, शीतल चाशनी या अन्य भोजन के साथ खाया जाता है. उसका इस्तेमाल रायता, दही चावल, दही वड़ा में भी किया जाता है. दूध से दही एक खास विधि के जरिए बनाया जाता है. लैक्टोबैसिलस नामक बैक्टीरिया दही बनने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>दही स्वास्थ्य फायदों से भरपूर-</strong> लैक्टोबैसिलस बैक्टीरिया दूध में मौजूद लैक्टोज को लैक्टिक एसिड में बदल देते हैं, जो हमारे पेट के लिए बेहद फायदेमंद होता है. अच्छे बैक्टीरिया बीमारी से हमारी रक्षा करने का काम करते हैं. फॉस्फोरस, कैल्शियम, विटामिन बी-2, विटामिन बी-12, मैग्नीशियम और पोटैशियम में भी दही भरपूर है. दही में प्रोबायोटिक पाचन सिस्टम के उचित काम में मदद करता है. लेकिन, दही को खास फूड सामग्रियों के साथ नहीं मिलाया जाना चाहिए. गलत फूड के साथ दही को मिलाना जोखिम भरा हो सकता है और आपकी स्किन के साथ स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>दही के साथ न करें इन फूड का सेवन</strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong>मछली-</strong> मछली के साथ दही खाने से परहेज करें क्योंकि दोनों फूड प्रोटीन में अधिक होते हैं. विशेषज्ञों की सलाह है कि दो प्रोटीन युक्त सामग्री को एक साथ नहीं मिलाया जाना चाहिए. उससे अपच और पेट से जुड़ी समस्या हो सकती है. &nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>दूध-</strong> दूध और दही नन वेजिटेरियन प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं, दोनों एक ही परिवार जैसे पशु स्रोत प्रोटीन से आते हैं. इसलिए, दोनों का एक साथ सेवन नहीं किया जाना चाहिए. उससे डायरिया, एसिडिटी, ब्लोटिंग और गैस की समस्या हो सकती है.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>उरद की दाल-</strong> एक रिपोर्ट के मुताबिक, उरद दाल के साथ दही का इस्तेमाल आपके पाचन सिस्टम को खराब कर सकता है. दोनों फूड सामग्रियों को एक साथ मिलाकर सेवन करने से अपच, डायरिया और ब्लोटिंग का खतरा रहता है.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>प्याज-</strong> रायता की शक्ल में लोग अक्सर दही और प्याज का इस्तेमाल करते हैं. अगर आपकी भी आदत है, तो तत्काल छोड़ देें क्योंकि दही का स्वभाव ठंडा होता है, जबकि प्याज शरीर में गर्मी पैदा करने के लिए जाना जाता है. ये मिश्रण चकता, सोरायसिस, खुजली और स्किन एलर्जी का कारण बन सकता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>आम-</strong> प्याज और दही की तरह, आम का दही के साथ मिलाना शरीर में ठंड और गर्म की स्थिति पैदा कर सकता है, जिससे स्किन की समस्या हो सकती है और पूरे शरीर में जहरीले पदार्थ पैदा हो सकते हैं. ये भी कहा जाता है कि रात में दही का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. प्रोटीन और ऊर्जा में अधिक होने की वजह से दही कफ बढ़ा सकता है.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="रात में अच्छी नींद को बढ़ाने के लिए सोने से पहले क्या खाएं? जानिए ये हैं टॉप फूड्स" href="https://www.abplive.com/lifestyle/what-to-eat-before-bedtime-to-promote-sound-sleep-at-night-here-are-top-foods-1923574">रात में अच्छी नींद को बढ़ाने के लिए सोने से पहले क्या खाएं? जानिए ये हैं टॉप फूड्स</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="क्या वास्तव में एक दिन में एक सेब डॉक्टर को रखता है दूर? जानिए हकीकत है या फसाना" href="https://www.abplive.com/lifestyle/does-an-apple-a-day-keep-the-doctor-aaway-know-whether-it-is-fact-or-fiction-1923515">क्या वास्तव में एक दिन में एक सेब डॉक्टर को रखता है दूर? जानिए हकीकत है या फसाना</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3uSv876

Jyeshtha Amavasya 2021 Date: इस बार की ज्येष्ठ अमावस्या क्यों है खास? जानें तिथि, पूजा विधि एवं धार्मिक महत्व

<p style="text-align: justify;"><strong>Jyeshtha Amavasya 2021 Date: </strong>पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को ज्येष्ठ अमावस्या के नाम से जाना जाता है. हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों के बीच ज्येष्ठ अमावस्या विशेष महत्त्व रखता है. ज्येष्ठ अमावस्या इस बार 10 जून को होगी. दरअसल इस बार यह बेहद ख़ास हो रही है क्योंकि इस दिन ही यानी 10 जून को वर्ष 2021 का पहला सूर्य ग्रहण लग रहा है और इसी दिन वट सावित्री व्रत का पर्व भी मनाया जाएगा. इसके अलावा इसी दिन शनि जयंती भी मनाई जायेगी.<strong> &nbsp;</strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong>ज्येष्ठ</strong> <strong>अमावस्या</strong> <strong>की</strong> <strong>तिथि</strong></p> <p style="text-align: justify;">पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि 9 जून 2021 दिन बुधवार को दोपहर 01 बजकर 57 मिनट से शुरू हो रही है और इसका समापन अगले दिन यानी 10 जून दिन गुरुवार को शाम 04 बजकर 20 मिनट पर है. &nbsp;चूंकि स्नान, दान और व्रत आदि के लिए अमावस्या की उदय तिथि 10 जून को प्राप्त हो रही है. इस लिए ज्येष्ठ अमावस्या का पर्व एवं व्रत 10 जून को होगा. हिंदू धर्म में अमावस्या से जुड़े धार्मिक कृत्य इसी दिन किये जायेंगे.</p> <div class="news_content" style="text-align: justify;"><a href="https://ift.tt/3gf5B2z Vrat 2021: आज है प्रदोष व्रत, इस कथा को पढ़ने-सुनने से भगवान शिव होंगे प्रसन्न, जानें पूजा विधि एवं क्या खाएं</strong></a></div> <p style="text-align: justify;"><strong>ज्येष्ठ</strong> <strong>अमावस्या</strong> <strong>का</strong> <strong>धार्मिक</strong> <strong>महत्त्व</strong></p> <p style="text-align: justify;">धार्मिक मान्यता के अनुसार, अमावस्या के दिन नदी स्नान, दान, व्रत और पूजा-पाठ से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है. पितरों की तृप्ति के लिए पिंडदान और श्राद्धकर्म इस दिन करना बेहद शुभ माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण और उनकी उपासना की जाती है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ज्येष्ठ</strong> <strong>अमावस्या</strong> <strong>की</strong> <strong>पूजा</strong> <strong>विधि</strong></p> <p style="text-align: justify;">अमावस्या के दिन प्रात: काल पवित्र नदी, जलाशय अथवा कुंड आदि में स्नान करें. उसके बाद तांबे के पात्र में जल, लाल चंदन और लाल रंग के पुष्प डालकर सूर्य देव को अर्घ्य करें. &nbsp;इसके बाद यथाशक्ति किसी गरीब व्यक्ति को दान-दक्षिणा दें. अमावस्या के दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए उपवास भी करें. आप चाहें तो पानी में गंगा जल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं. &nbsp;यह भी उत्तम रहेगा.</p> <div class="uk-grid-collapse uk-grid"> <div class="uk-width-3-5 fz20 p-10 newsList_ht uk-first-column" style="text-align: justify;"><a href="https://ift.tt/3fUMuMn Grahan: 10 जून को ऐसे दिखेगा रिंग ऑफ फायर का अद्भुत नजारा, जानें किस राशि में लगेगा सूर्य ग्रहण और प्रभाव</strong></a></div> <div class="uk-width-2-5 uk-position-relative uk-padding-remove-left" style="text-align: justify;">&nbsp;</div> </div> lifestyle https://ift.tt/3fZWrbv

Coronavirus: लंबे समय तक ICU में रहने से डायबिटीज का खतरा, मरीजों के लिए ये है सलाह

<p style="text-align: justify;">कोविड-19 का इलाज कर रहे स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया है कि मरीजों को डायबिटीज का भी सामना करना पड़ रहा है. उनका ये भी कहना है कि ये बीमारी उन लोगों में भी देखी जा रही है जो पहले से डायबिटिक नहीं थे. उन्होंने नई परेशानी को कोविड-19 के कारण हुई डायबिटीज का नाम दिया है.</p> <p style="text-align: justify;">एम्स के मेडिसीन विभाग में तैनात डॉक्टर नीरज निश्चल ने बताया कि जिन लोगों में डायबिटीज के लक्षण कभी नहीं थे, उनमें भी संक्रमण के बाद तेजी से शुगर लेवल बढ़ने का मामला देखा गया है. हालांकि, ऐसे मामले बहुत कम हैं. इससे पहले, कोरोना से गंभीर बीमार मरीजों को ठीक होने के बाद शुगर बढ़ने और ब्लॉकेज होने से हार्ट अटैक की चेतावनी दी जा चुकी है.</p> <p style="text-align: justify;">दक्षिण दिल्ली निवासी नीरज अपना उदाहरण देते हुए बताते हैं, "पहले मुझे डायबिटीज का लक्षण नहीं था. अप्रैल के पहले सप्ताह में कोरोना की चपेट में आया. गंभीर संक्रमण की वजह से दो सप्ताह तक मुझे आईसीयू में रहना पड़ा. इलाज के दौरान पता चला कि मेरा शुगर लेवल बढ़ा हुआ है. अस्पताल से डिस्चार्ज होकर जब घर आया, तो शुगर का लेवल और भी ज्यादा हो गया."&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;">फोर्टिस अस्पताल में हार्मोन रोग विशेषज्ञ डॉक्टर श्वेता बुडयाल का कहना है, "कोरोना वायरस के कारण भी शुगर बढ़ सकता है क्योंकि वायरस सीधे तौर पर पैंक्रियाज में इंसुलिन उत्पादित करनेवाली कोशिकाओं को प्रभावित करता है." 4 जून को दिल्ली सरकार ने आदेश जारी कर बताया कि आईसीयू से छुट्टी पा चुके ऐसे मरीजों को ग्लूकोमीटर उपलब्ध कराया जा सकता है, जिनके ब्लड में शुगर का लेवल अधिक पाया गया है. ग्लूकोमीटर उपकरण के साथ 50 स्ट्रिप मिलेगी, जिससे मरीज शुगर की जांच कर सकते हैं. &nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कोविड-19 से उबर चुके लोगों के लिए सलाह</strong><br />कोरोना संक्रमित मरीज को अपने शुगर लेवल की जांच करानी चाहिए. यहां तक कि अगर डॉक्टर भी भूल जाए, तो खुद शुगर टेस्ट कराएं..&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;">क्वारंटीन में रह रहे लोगों के लिए तो विशेष तौर पर शुगर लेवल की जांच कराना आवश्यक हो है. शुगर लेवल 70-180 के बीच होना चाहिए.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;">डॉक्टरों की सलाह है कि कोविड-19 से ठीक होने पर 180 दिनों के अंदर शुगर लेवल का नियंत्रण बेहद जरूरी है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="World Food Safety Day 2021: जानिए इतिहास, तारीख, थीम और जागरुकता बढ़ानेवाले कोट्स" href="https://ift.tt/3fZeJJM Food Safety Day 2021: जानिए इतिहास, तारीख, थीम और जागरुकता बढ़ानेवाले कोट्स</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="कोविड-19 महामारी ने स्क्रीन पर बिताने वाले समय को बढ़ाकर कैसे किया नींद को खराब, जानिए" href="https://www.abplive.com/lifestyle/covid-19-pandemic-led-to-increased-screen-time-more-sleep-problems-study-1923529">कोविड-19 महामारी ने स्क्रीन पर बिताने वाले समय को बढ़ाकर कैसे किया नींद को खराब, जानिए</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/34RYEiI

Pradosh Vrat 2021: आज है प्रदोष व्रत, इस कथा को पढ़ने-सुनने से भगवान शिव होंगे प्रसन्न, जानें पूजा विधि एवं क्या खाएं

<p style="text-align: justify;"><strong>Som Pradosh Vrat 2021: </strong>आज 07 जून को ज्येष्ठ मास का पहला सोम प्रदोष व्रत है. प्रदोष जब सोमवार को होता है, तब उसे सोम प्रदोष व्रत कहते हैं. प्रदोष व्रत हर त्रयोदशी तिथि में रखा जाता है. यह तिथि भगवान शिव को समर्पित होती है. जिन लोगों को चंद्रमा नुकसान पहुंचा रहें, उन्हें प्रदोष व्रत रखना चाहिए. धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में शांति और मन वांछित फल प्राप्त होता है. मान्यता है कि निःसंतान दम्पत्तियों को संतान प्राप्ति के लिए प्रदोष व्रत को जरूर रखना चाहिए.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>सोम</strong> <strong>प्रदोष</strong> <strong>व्रत</strong> <strong>विधि</strong></p> <p style="text-align: justify;">धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक की जाती है. यही प्रदोष काल होता है. शुभ मुहूर्त में पूजा के लिए पूजा स्थल पर माता पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें. उसके बाद&nbsp; शिवजी को बेलपत्र, भांग, मदार पुष्प, धतूरा, श्वेत पुष्प, मौसमी फल, शहद, गाय का दूध और गंगा जल अर्पित करें. महिलाएं मां पार्वती को लाल चुनरी और सुहाग का सामान चढ़ाएं. तत्पश्चात आरती करें और प्रसाद वितरण करें.</p> <div class="uk-grid-collapse uk-grid" style="text-align: justify;"> <div class="uk-width-3-5 fz20 p-10 newsList_ht uk-first-column"><a href="https://ift.tt/3fUMuMn Grahan: 10 जून को ऐसे दिखेगा रिंग ऑफ फायर का अद्भुत नजारा, जानें किस राशि में लगेगा सूर्य ग्रहण और प्रभाव</strong></a></div> </div> <p style="text-align: justify;"><strong>सोम</strong> <strong>प्रदोष</strong> <strong>व्रत</strong> <strong>कथा</strong></p> <p style="text-align: justify;">पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में एक विधवा ब्राह्मणी अपने पुत्र के साथ रहती थी और भीख मांगकर अपना एवं अपने पुत्र का पालन पोषण करती थी. एक दिन घर लौटते समय उसे रास्ते में घायल अवस्था में एक बालक मिला. वह बालक विदर्भ का राजकुमार था. शत्रु सैनिकों ने उसके राज्य पर नियंत्रण कर बालक के पिता को बंदी बना लिया और बालक को घायल अवस्था में वहीं छोड़ दिया. अब राजकुमार ब्राह्मणी -पुत्र के साथ उसके घर रहने लगा.</p> <p style="text-align: justify;">एक दिन अंशुमति नामक एक गंधर्व कन्या ने राजकुमार को देखा तो वह उस पर मोहित हो गई. कुछ दिनों बार भगवान शिव ने अंशुमति के माता-पिता को स्वप्न में आदेश दिया कि वे राजकुमार और अंशुमति का विवाह कर दें. उन्होंने ऐसा ही किया.</p> <p style="text-align: justify;">ब्राह्मणी प्रदोष व्रत करने के साथ ही भगवान शंकर की पूजा-पाठ भी किया करती थी. इसके प्रभाव और गंधर्वराज की सेना की सहायता से राजकुमार ने विदर्भ से शत्रुओं को खदेड़ दिया और पिता को शत्रुओं के चंगुल से मुक्त कराया. <strong>&nbsp;</strong>राजकुमार ने ब्राह्मणी-पुत्र को अपना प्रधानमंत्री बनाया.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>प्रदोष</strong> <strong>व्रत</strong> <strong>में</strong> <strong>क्या</strong> <strong>खाएं</strong></p> <p style="text-align: justify;">जानकारों के अनुसार, प्रदोष व्रत के समय सिर्फ हरे मूंग का सेवन करना चाहिए. उपवास के दौरान फलाहार करना ज्यादा उचित है.</p> <div class="uk-grid-collapse uk-grid"> <div class="uk-width-3-5 fz20 p-10 newsList_ht uk-first-column" style="text-align: justify;"><a href="https://ift.tt/3ilVv2A Vastu Tips: कुत्ते पालना निसंतान दंपत्तियों के लिए माना जाता है बेहद शुभ, घर में जल्द गूंजेगी किलकारियां</strong></a></div> </div> lifestyle https://ift.tt/34U5t3f

World Food Safety Day 2021: जानिए इतिहास, तारीख, थीम और जागरुकता बढ़ानेवाले कोट्स

विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस हर साल 7 जून को मनाया जाता है. इस मौके पर खाद्य जनित बीमारियों को नियंत्रित करने, पता लगाने और रोकथाम के प्रयास पर रोशनी डाली जाती है. 7 जून, 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने बदलते विषयों के साथ विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस को सालाना उत्सव के रूप में इस तारीख पर मनाने का एलान किया. विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से शुरू की गई पहल है. पहले उत्सव की सफलता से उत्साहित होकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जागरुकता फैलाने के लिए त्योहार जारी रखने का फैसला किया भोजन और आवास जिंदगी की अहम जरूरत हैं. हर शख्स धरती पर अपने वजूद के लिए कपड़ा, भोजन, पानी, हवा पर निर्भर है. भोजन हमारे शरीर में विकास को बनाए रखने के लिए आवश्यक पोषक तत्व, कार्बोहाइड्रेट्स, फैट्स और प्रोटीन उपलब्ध कराता है. ये विशेष दिन खाद्य सुरक्षा, मानव स्वास्थ्य, आर्थिक उन्नति, कृषि, बाजार में पहुंच, पर्यटन और टिकाऊ विकास में योगदान देता है.
विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2021: इतिहास और तारीख विश्व स्वास्थ्य संगठन खाद्य जनित रोगों के बोझ को पहचानता है, जिसका असर सभी उम्र के लोगों पर होता है, विशेषकर निम्न आय वाले देशों के लोग और 5 साल से नीचे के बच्चे. इसलिए, 7 जून को 2018 से हर साल खास दिन को मनाए जाने का एलान किया गया. पिछले साल दुनिया की स्वास्थ्य एसेंबली ने खाद्य सुरक्षा के लिए वैश्विक प्रयासों को मजबूत करने के लिए एक और प्रस्ताव पास किया जिससे खाद्य जनित बीमारी के बोझ को कम किया जा सके. संबंधित संगठनों और सदस्य देशों के सहयोग से विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस संयुक्त रूप से मनाया जाता है. आज के दिन विश्व स्वास्थ्य संगठन वैश्विक सतह पर खाद्य जनित बीमारी को कम करने का प्रयास करता है.विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2021 का थीम.विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के लिए इस साल का विषय 'सुरक्षित भोजन आज स्वस्थ कल के लिए' है जो सुरक्षित भोजन खाने और पैदा करने पर फोकस करता है. भोजन का सुरक्षित होना लोगों, धरती और अर्थव्यस्था को तत्काल और लंबे समय में फायदा पहुंचाता है.विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के जागरुकता बढ़ानेवाले कोट्स

क्या आप इम्यून रिस्पॉन्स कम करनेवाली दवा ले रहे हैं? जानें कोविड-19 वैक्सीन लगवाने पर कैसा होगा असर

<p style="text-align: justify;">कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर निर्धारित दवाओं का इस्तेमाल कोविड-19 की गंभीरता और अस्पताल में भर्ती होने के खतरे को बढ़ा सकता है. इसके अलावा, शोधकर्ताओं का कहना है कि ये दवाएं कोविड-19 के असर को भी कम कर सकती हैं. हम बात कर रहे हैं शरीर के सामान्य इम्यून रिस्पॉन्स को कम करनेवाली दवाओं के बारे में जिनका आम तौर से ऑटो इम्यून रोगों जैसे रूमेटाइड गठिया और ल्यूपस का इलाज करने में इस्तेमाल होता है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम हमला कर स्वस्थ कोशिकाओं को नष्ट कर देता है. इम्यून रिस्पॉन्स कम करनेवाली दवाओं का निर्माण मरीज के टिश्यू पर इस हमले को रोकने के लिए होता है. ऑटो इम्यून रोगियों का आम तौर पर सूजन कम करनेवाली दवाइयों से इलाज किया जाता है.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;">ऑटो इम्यून बीमारी में शरीर अपने इम्यून सिस्टम और स्वस्थ्य कोशिकाओं पर ही हमला करने लगता है. दूसरी तरफ, शरीर का इम्यून सिस्टम अंगों और टिश्यू को नुकसान पहुंचाने लगता है, तो शरीर में जलन और सूजन होने लगती है. उस स्थिति को ल्यूपस बीमारी के रूप में जाना जाता है. ये दवाइंया ऑर्गन ट्रांसप्लांट के वक्त प्रत्यारोपित अंग पर हमले से इम्यून सिस्टम को रोकने के लिए भी निर्धारित की जाती हैं. खास प्रकार की कीमोथेरेपी भी इम्यून सिस्टम को दबा सकती है. हालांकि, इन दवाइयों का इस्तेमाल पुरानी स्थिति वाले लोगों के साथ सीमित है, लेकिन इम्यून रिस्पॉन्स कम करनेवाली एक आम इस्तेमाल की दवा स्टेरॉयड चिंता का कारण है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>स्टेरॉयड कोविड वैक्सीन के लिए शरीर के रिस्पॉन्स को कम कर सकती हैं</strong></p> <p style="text-align: justify;">स्टेरॉयड, जिसे कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स भी कहा जाता है, सूजन रोधी दवाइयां हैं और उनका इस्तेमाल सूजन वाली स्थितियों की श्रेणी का इलाज करने के लिए किया जाता है. ये दवाएं इम्यून सिस्टम की गतिविधि को भी कम करती हैं. डेक्सामेथासोन और प्रेडनिसोन जैसे स्टेरॉयड अर्थराइटिस, कोलाइटिस, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, स्किन समस्या, एलर्जी और साइनस संक्रमण के लिए निर्धारित की जा सकती हैं. सबूत बताते हैं कि संक्षिप्त कोर्स और स्टेरॉयड के कम भी डोज संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकते हैं और शरीर के रिस्पॉन्स को वैक्सीन के लिए कम कर सकते हैं. मिशिगन मेडिसीन की तरफ से किए गए रिसर्च में कहा गया है कि सामान्य इम्यून रिस्पॉन्स को कम करनेवाली दवाओं का इस्तेमाल करने से कोविड-19 टीकाकरण में धीमा, कमजोर रिस्पॉन्स हो सकता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कोविड-19 वैक्सीन और इम्यून रिस्पॉन्स को कम करनेवाली दवाएं</strong></p> <p style="text-align: justify;">इन मरीजों के बीच वैक्सीन का असर बढ़ाने के लिए विशेषज्ञ दो तरीकों का सुझाव देते हैं या तो इम्यून रिस्पॉन्स को कम करनेवाले उपचार के समय में बदलाव या इन मरीजों को वैक्सीन का बूस्टर डोज देना. उन्होंने कहा है कि टीकाकरण के समय दवा को रोक देने से शरीर वैक्सीन के लिए रिस्पॉन्स करने और कोरोना वायरस के खिलाफ सुरक्षा बनाने का समय मिल जाता है. सबसे अहम बात ये है कि कोविड-19 टीकाकरण को इम्यून रिस्पॉन्स कम करनेवाली दवाएं शुरु करने से कम से कम दो सप्ताह पहले पूरा कर लिया जाए. इसलिए, सलाह योग्य है कि&nbsp; इम्यून रिस्पॉन्स को कम करनेवाले उपचार में देरी के फायदे और खतरों के बारे में अपने डॉक्टर से चर्चा करें.</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="कोविड-19 महामारी ने स्क्रीन पर बिताने वाले समय को बढ़ाकर कैसे किया नींद को खराब, जानिए" href="https://www.abplive.com/lifestyle/covid-19-pandemic-led-to-increased-screen-time-more-sleep-problems-study-1923529">कोविड-19 महामारी ने स्क्रीन पर बिताने वाले समय को बढ़ाकर कैसे किया नींद को खराब, जानिए</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="मोटापे से पीड़ित लोगों में लॉन्ग कोविड इफेक्ट का खतरा ज्यादा, जानें क्या कहती है रिसर्च" href="https://www.abplive.com/lifestyle/how-obesity-may-increase-the-risk-of-long-term-complications-of-covid-19-understand-by-research-1923470">मोटापे से पीड़ित लोगों में लॉन्ग कोविड इफेक्ट का खतरा ज्यादा, जानें क्या कहती है रिसर्च</a></strong></p> <p style="text-align: justify;">&nbsp;</p> <div id="taboola-mid-article-thumbnails" class=" trc_related_container trc_spotlight_widget trc_elastic trc_elastic_thumbnails-m " data-placement-name="Mid Article Thumbnails"> <div class="trc_rbox_container"> <div> <div id="trc_wrapper_98133" class="trc_rbox thumbnails-m trc-content-sponsored "> <div id="trc_header_98133" class="trc_rbox_header trc_rbox_border_elm"> <div class="trc_header_ext">&nbsp;</div> </div> </div> </div> </div> </div> lifestyle https://ift.tt/2T54fzq

रात में अच्छी नींद को बढ़ाने के लिए सोने से पहले क्या खाएं? जानिए ये हैं टॉप फूड्स

<p style="text-align: justify;">फूड आपके स्लीपिंग पैटर्न को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है और अच्छी रात की नींद बिना रात भर रुके सुनिश्चित कर सकता है. अगर आप रात के 2 से 3 बजे तक जागनवालों में से हैं, तो ये टिप्स आपके लिए है. पर्याप्त नींद न मिलना अगले दिन हमें सुस्त और कम उत्पादक बनाता है. नींद को हम खोना बर्दाश्त नहीं कर सकते और किसी भी शख्स को नींद की पर्याप्त मात्रा की जरूरत होती है जो कम से कम 6-8 घंटे के बीच है.&nbsp;नियमित रूप से सोने का तरीका समग्र सेहत के लिए महत्वपूर्ण क्योंकि ये हमारे ऊर्जा लेवल को बनाए रखने और तनाव लेवल को कम करने में मदद करता है. इसलिए, सोने से पहले अपनी डाइट में कुछ श्रेष्ठ फूड शामिल करना चाहिए.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>बादाम-</strong> बादाम में मेलाटोनिन की उच्च खुराक होती है जो नींद और जगाते रहनेवाले चक्र को को नियंत्रित करने में मदद करता है. बादाम को सुपर फूड कहा जाता है जो अत्यंत सेहतमंद होता है और उसका इस्तेमाल स्वस्थ स्नैक के तौर पर भी किया जा सकता है. &nbsp; &nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>गर्म दूध-</strong> गर्म दध रात में अच्छी नींद पाने के उपाय के रूप में बहुत आम है. आप एक ग्लास गर्म दूध पी सकते हैं और सर्दी में उसे बेहतर पाचन नतीजों और शरीर में इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए हल्दी पाउडर के साथ शामिल कर सकते हैं. दूध में नींद को बढ़ानेवाले यौगिक पाए जाते हैं जो आपके नींद के तरीके को नियंत्रित करने में मदद करता है.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>अखरोट-</strong> अखरोट कुछ यौगिक रात में बेहतर नींद को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं. उसमें मेलाटोनिन, सेरोटोनिन और मैग्ननीशियम शामिल होता है. अखरोट को सोते समय या देर रात कुतरने के लिए स्वस्थ स्नैक के तौर पर भी खाया जा सकता है.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>केला-</strong> केला पोटैशियम और मैग्नीशियम से भरपूर होता है जो मांसपेशियों को आराम देने के लिए जाना जाता है. उसमें एमिनो एसिड एल-ट्रिप्टोफैन भी होता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="क्या वास्तव में एक दिन में एक सेब डॉक्टर को रखता है दूर? जानिए हकीकत है या फसाना" href="https://www.abplive.com/lifestyle/does-an-apple-a-day-keep-the-doctor-aaway-know-whether-it-is-fact-or-fiction-1923515">क्या वास्तव में एक दिन में एक सेब डॉक्टर को रखता है दूर? जानिए हकीकत है या फसाना</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="मोटापे से पीड़ित लोगों में लॉन्ग कोविड इफेक्ट का खतरा ज्यादा, जानें क्या कहती है रिसर्च" href="https://www.abplive.com/lifestyle/how-obesity-may-increase-the-risk-of-long-term-complications-of-covid-19-understand-by-research-1923470">मोटापे से पीड़ित लोगों में लॉन्ग कोविड इफेक्ट का खतरा ज्यादा, जानें क्या कहती है रिसर्च</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3vXQUHL