Sunday, June 6, 2021
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कोविड-19 महामारी ने स्क्रीन पर बिताने वाले समय को बढ़ाकर कैसे किया नींद को खराब, जानिए
<p style="text-align: justify;">कोविड-19 महामारी के दौरान शाम में स्क्रीन पर बिताए गए ज्यादा समय से लोगों की नींद की गुणवत्ता नकारात्मक तरीके से प्रभावित हुई. ये खुलासा एक नई रिसर्च में हुआ है और नतीजों को स्लीप नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है. शोधकर्ताओं ने बताया कि इटली में लॉकडाउन की अवधि के दौरान रोजाना इंटरनेट ट्रैफिक में वृद्धि पिछले साल के उसी समय की तुलना में करीब दोगुनी हो गई.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कोविड-19 महामारी ने लोगों के स्क्रीन टाइम को बढ़ाया</strong></p> <p style="text-align: justify;">इटली में पहले राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के तीसरे और सातवें सप्ताह में शोधकर्ताओं ने वेब आधारित 2,123 नागरिकों का सर्वेक्षण किया. लॉकडाउन के तीसरे सप्ताह (25 मार्च-28, 2020) में किए गए सर्वेक्षण में नींद की गुणवत्ता और इनसोमनिया के लक्षणों का दो तरीकों से मूल्यांकन किया गया. लॉकडाउन के सातवें सप्ताह (अप्रैल 21-27 2020) के दूसरे मूल्यांकन सर्वे में सोने से पहले दो घंटा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल की जानकारी ली गई. उसके अलावा, नींद से जुड़े सवालों को दोहराया गया.</p> <p style="text-align: justify;">शोधकर्ताओं ने कहा कि 92.9 फीसद प्रतिभागियों ने अपने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस इस्तेमाल में पहले और दूसरे सर्वे के बीच बढ़ोतरी की जानकारी दी. इन प्रतिभागियों में नींद की गुणवत्ता कम हो गई, अनिद्रा के लक्षणों में बढ़ोतरी और बाद में कुल नींद का समय छोटा पाया गया. 7.1 प्रतिभागियों ने पहले और दूसरे सर्वे के बीच शाम के स्क्रीन समय में कमी की बात बताई और इसके विपरीत नींद की गुणवत्ता में सुधार और इनसोमनिया के कम लक्षणों की जानकारी दी.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>स्क्रीन पर बिताए अधिक समय से नींद प्रभावित- रिसर्च</strong></p> <p style="text-align: justify;">जिन प्रतिभागियों के स्क्रीन टाइम में किसी तरह का बदलाव नहीं आया, उनकी नींद की आदतों में कोई परिवर्तन नहीं दिखाई दिया. इस ग्रुप की नींद की गुणवत्ता सबसे अच्छी थी और पहले सर्वे के नतीजों में इनसोमनिया के सबसे कम लक्षण पाए गए. उससे पता चला कि लॉकडाउन ने उन लोगों की नींद की स्थितियों को खराब किया जो पहले ही खराब नींद की गुणवत्ता से जूझ रहे थे. शोधकर्ता डॉक्टर फेडेरिको सलफी ने कहा, "सोने से पहले के घंटों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का अत्यधिक इस्तेमाल महामारी के इमरजेंसी से पहले हमारे समाज की आदत में गहराई तक समाई हुई थी, विशेषकर युवा लोगों के बीच.</p> <p style="text-align: justify;">हमारे विचार में सोशल डिस्टेंसिंग की वर्तमान अवधि ने आग में ईंधन का काम किया." एक अन्य शोधकर्ता प्रोफेसर मिशेल फेरेरा ने बताया, "लॉकडाउन अवधि के दौरान नींद में रुकावट का समय और स्क्रीन की आदतों के बीच मजबूत संबंध का सबूत मिलता है. इसलिए अब, पहले से ज्यादा, शाम में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के संपर्क का खतरा बताने के लिए जन जागरुकता बढ़ाना नींद से जुड़े आम स्वास्थ्य को बचाने में जरूरी हो गया है." फरेरा का कहना है कि ये नियम वर्तमान और भविष्य की दोनों महामारी पर लागू होता है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक तकनीक का दखल हमारी रोजाना की रूटीन में ज्यादा होगा.</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="मोटापे से पीड़ित लोगों में लॉन्ग कोविड इफेक्ट का खतरा ज्यादा, जानें क्या कहती है रिसर्च" href="https://www.abplive.com/lifestyle/how-obesity-may-increase-the-risk-of-long-term-complications-of-covid-19-understand-by-research-1923470">मोटापे से पीड़ित लोगों में लॉन्ग कोविड इफेक्ट का खतरा ज्यादा, जानें क्या कहती है रिसर्च</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Dog Vastu Tips: कुत्ते पालना निसंतान दंपत्तियों के लिए माना जाता है बेहद शुभ, घर में जल्द गूंजेगी किलकारियां" href="https://ift.tt/3zgA5tU Vastu Tips: कुत्ते पालना निसंतान दंपत्तियों के लिए माना जाता है बेहद शुभ, घर में जल्द गूंजेगी किलकारियां</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3uWECye
Surya Grahan: 10 जून को ऐसे दिखेगा रिंग ऑफ फायर का अद्भुत नजारा, जानें किस राशि में लगेगा सूर्य ग्रहण और प्रभाव
<p style="text-align: justify;"><strong>Solar Eclipse 2021 Ring of Fire: </strong>पंचांग के अनुसार 10 जून, दिन गुरुवार को सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. इस दिन ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि है. साल 2021 का यह दूसरा ग्रहण और पहला सूर्य ग्रहण होगा. खगोल शास्त्र में सूर्य ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है. जबकि ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण को एक प्रमुख घटना के तौर पर देखा जाता है. इसके पहले 26 मई को इस साल का पहला ग्रहण और चंद्रग्रहण लगा था. इसके 15 दिन बाद फिर दूसरा ग्रहण - सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>इस</strong> <strong>राशि</strong> <strong>में</strong> <strong>लगेगा</strong> <strong>सूर्य</strong> <strong>ग्रहण</strong></p> <p style="text-align: justify;">ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, साल 2021 का पहला सूर्य ग्रहण वृष राशि और मृगशिरा नक्षत्र में लगने जा रहा है. इसलिए सूर्य ग्रहण का वृष राशि और मृगशिरा नक्षत्र में पैदा हुए लोगों पर विशेष प्रभाव होगा. इन लोगों को सूर्यग्रहण के प्रभाव से बचने के लिए विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>सूर्य</strong> <strong>ग्रहण</strong> <strong>का</strong> <strong>प्रभाव</strong><strong> </strong></p> <p style="text-align: justify;">ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक सूर्य ग्रहण का सबसे अधिक प्रभाव वृष राशि में और मृगशिरा नक्षत्र में जन्मे लोगों पर पड़ेगा. इसके साथ ही अन्य राशियों पर भी इसका प्रभाव देखने को मिलेगा. इस सूर्य ग्रहण की वजह से धन- हानि हो सकती है. इन लोगों को चाहिए कि वे इस दौरान अनावश्यक धन- खर्च करने से बचें. यह सूर्य ग्रहण स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव डालेगा.</p> <div class="uk-grid-collapse uk-grid" style="text-align: justify;"> <div class="uk-width-3-5 fz20 p-10 newsList_ht uk-first-column"><a href="https://ift.tt/34Uaskp Eclipse 2021: सूर्य ग्रहण के समय गर्भवती महिलाएं रखें इन बातों का खास ध्यान, 5 दिन बाद लगेगा साल का पहला सूर्य ग्रहण</strong></a></div> </div> <p style="text-align: justify;"><strong>कहां</strong> <strong>दिखाई</strong> <strong>देगा</strong> <strong>सूर्य</strong> <strong>ग्रहण</strong><strong>?</strong></p> <p style="text-align: justify;">10 जून को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में आंशिक सूर्य ग्रहण माना जा रहा है. मुख्य रूप से यह सूर्यग्रहण उत्तर-पूर्व अमेरिका, यूरोप, उत्तरी एशिया और उत्तरी अटलांटिक महासागर में दिखाई देगा. यह एक पूर्ण सूर्यग्रहण होगा.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>पूर्ण</strong> <strong>सूर्यग्रहण</strong> <strong>क्या</strong> <strong>है</strong><strong>? </strong></p> <p style="text-align: justify;">वैज्ञानिक मत के अनुसार अमावस्या के दिन सूर्य और पृथ्वी के मध्य जब चंद्रमा आ जाता है तो सूर्य ग्रहण होता है. वहीं जब सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा की छाया पूर्णरूप से सूर्य को ढक लेती है, तब ये पूर्ण सूर्य ग्रहण कहलाता है. इस दिन रिंग ऑफ फायर का अद्भूत नाजारा भी देखने को मिलेगा.</p> <div class="uk-grid-collapse uk-grid"> <div class="uk-width-3-5 fz20 p-10 newsList_ht uk-first-column" style="text-align: justify;"><a href="https://ift.tt/34V77lj Grahan: 10 जून को लगेगा सूर्य ग्रहण, इन राशियों पर पड़ेगा अशुभ प्रभाव, रहें सावधान</strong></a></div> <div class="uk-width-2-5 uk-position-relative uk-padding-remove-left" style="text-align: justify;"> </div> </div> lifestyle https://ift.tt/3cn1U9R
क्या वास्तव में एक दिन में एक सेब डॉक्टर को रखता है दूर? जानिए हकीकत है या फसाना
<p style="text-align: justify;">'एक दिन में एक सेब का इस्तेमाल डॉक्टर को रखता है दूर' का मुहावरा पहली बार 1913 में गढ़ा गया, लेकिन ये कहावत पर आधारित था जिसका इतिहास 1866 से जुड़ता है. फल के स्वास्थ्य फायदे व्यापक रूप से जाने और स्वीकार किए जाते हैं. लेकिन, प्रत्येक दिन एक सेब वास्तव में डॉक्टर को दूर रखता है? इस फल के बारे में क्या कुछ खास है जो उसे फलों की अन्य किस्मों और स्वस्थ भोजन से ऊपर रखता है? क्या आपकी खराब सेहत के खतरे को कम करने में ये आदर्श है? स्वस्थ डाइट और जीवनशैली के हिस्से के तौर पर सेब वास्तव में कई बीमारियों से लड़ सकते हैं और आपको स्वस्थ और डॉक्टर से दूर रखने में मदद कर सकते हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>सेहत के दावे के पक्ष में सबूत</strong></p> <p style="text-align: justify;">रिसर्च ने लंबे समय से साबित किया है कि ताजा फल और सब्जियों में भरपूर डाइट कई तरह की पुरानी स्थितियों को कम कर सकती है. लेकिन ज्यादा विस्तार से किए गए रिसर्च की नतीजे बताते हैं कि सेब, विशेष रूप से अच्छी सेहत के खास तौर पर संरक्षक हो सकते हैं. सेब, विशेष रूप से उनकी स्किन एंटीऑक्सीडेंट्स के शानदार स्रोत होते हैं. एंटीऑक्सीडेंट्स सेल्स और टिश्यू के न नुकसान को रोकने और कैंसर, कार्डियोवैस्कुलर रोग, और संभावित तौर पर अल्जाइमर रोग से शरीर के बचाव में मदद करने के लिए माने जाते हैं. माना जाता है कि सेब में मौजूद फ्लेवोनायड एलर्जी और वायरल संक्रमण के खिलाफ शरीर की रक्षा करता है.</p> <p style="text-align: justify;">सेब लंग्स के काम को सुधार भी सकता है. फिनलैंड में एक रिसर्च के दौरान शोधकर्ताओं ने सेब का इस्तेमाल और स्ट्रोक के खतरे के बीच 9,200 पुरुष और महिलाओं पर संबंध की जांच-पड़ताल की. नतीजे से पता चला कि जिन लोगों ने अत्यधिक मात्रा में सेब का इस्तेमाल किया, उनको 28 साल की अवधि में सबसे कम सेब इस्तेमाल करनेवालों के मुकाबले स्ट्रोक का कम खतरा था. उन्होंने सुझाव दिया कि ये फायदा सेब में शामिल फाइटोन्यूट्रीयंट्स से आ सकता है. फिनलैंड की दो अन्य रिसर्च के नतीजों से खुलासा हुआ कि सेब का इस्तेमाल दिल की बीमारी और लंग कैंसर के खतरे को भी कम कर सकता है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>सेहत के दावे के खिलाफ सबूत</strong></p> <p style="text-align: justify;">कई अन्य फूड्स में एंटीऑक्सीडेंट्स का लेवल समान होता है और सेब के जैसा फायदा देता है. कॉफी, ब्लैक टी, ब्लूबेरी, लाल अंगूर, स्ट्राबेरी और केला सभी एंटीऑक्सीडेंट्स फ्लेवोनायड में भरपूर होते हैं. गौर करनेवाली बात है कि सेब के ज्यादातर पोषण लाभ उसकी स्किन से आता है, इसलिए पूरे सेब के मुकाबले छिले हुए सेब, सेब का जूस और सेब की चटनी में एंटीऑक्सीडेंट्स का लेवल कम होता है. हर दिन एक सेब खाने से आपके सेहत को नुकसान की संभावना नहीं है. लेकिन, प्रत्येक दिन कई सेब का इस्तेमाल पाचन समस्याओं समेत प्रतिकूल साइड-इफेक्ट्स में योगदान कर सकता है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="बच्चों की डाइट में शामिल करें ये टॉप फूड्स, ब्रेन बढ़ाने के साथ करेंगे उनकी याद्दाश्त तेज" href="https://www.abplive.com/lifestyle/add-these-top-brain-boosting-foods-to-children-diet-will-help-sharpen-their-memory-1923438">बच्चों की डाइट में शामिल करें ये टॉप फूड्स, ब्रेन बढ़ाने के साथ करेंगे उनकी याद्दाश्त तेज</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="मोटापे से पीड़ित लोगों में लॉन्ग कोविड इफेक्ट का खतरा ज्यादा, जानें क्या कहती है रिसर्च" href="https://www.abplive.com/lifestyle/how-obesity-may-increase-the-risk-of-long-term-complications-of-covid-19-understand-by-research-1923470">मोटापे से पीड़ित लोगों में लॉन्ग कोविड इफेक्ट का खतरा ज्यादा, जानें क्या कहती है रिसर्च</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/34PWPTB
मोटापे से पीड़ित लोगों में लॉन्ग कोविड इफेक्ट का खतरा ज्यादा, जानें क्या कहती है रिसर्च
<p style="text-align: justify;">मध्यम या गंभीर मोटापा से पीड़ित लोगों में कोविड-19 को हराने के बाद बीमारी के दीर्घकालिक परिणामों का ज्यादा जोखिम होता है, उन मरीजों की तुलना में जो मोटे नहीं हैं. ये खुलासा अमेरिका में की गई रिसर्च से हुआ है. रिसर्च को हाल ही में डायबिटीज, ओबेसिटी और मेटाबोलिज्म की पत्रिका में ऑनलाइन प्रकाशित किया गया था.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>मोटापा कोविड-19 के दीर्घकालिक जटिलताओं को कैसे बढ़ाता है?</strong></p> <p style="text-align: justify;">इससे पहले कई रिसर्च में मोटापा को कोविड-19 की गंभीर शक्ल होने का जोखिम कारक के तौर पर पहचाना गया है और जिसके लिए बीमारी के शुरुआती चरण में अस्पताल में भर्ती, इंटेसिव केयर और वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता हो सकती है. मोटापा का संबंध कार्डियो-वैस्कुलर रोग, ब्लड क्लॉट्स, और लंग्स की स्थितियों के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा है. उसके अलावा, मोटापा इम्यून सिस्टम कमजोर करने और एक क्रोनिक सूजन की स्थिति पैदा करने के लिए जाना जाता है.</p> <p style="text-align: justify;">शोधकर्ताओं का कहना है कि कोविड-19 बीमारी का कारण बननेवाले कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद ऐसी स्थितियां खराब परिणाम दे सकती हैं. क्लेवीलैंड क्लीनिक के डायरेक्टर अली अमीनियन ने कहा, "हमारी जानाकरी में ये मौजूदा रिसर्च पहला है जिससे पता चलता है कि मध्यम से गंभीर मोटापा पीड़ितों को कोविड-19 के दीर्घकालिक नतीजे होने का ज्यादा खतरा होता है."</p> <p style="text-align: justify;"><strong>मध्यम और गंभीर मोटापा के मरीजों में टेस्ट की ज्यादा जरूरत</strong></p> <p style="text-align: justify;">शोधकर्ताओं ने रिसर्च के दौरान क्लेवीलैंड क्लीनिक हेल्थ सिस्टम में मार्च 2020 से जुलाई 2020 के दौरान आनेवाले मरीजों का डेटा इस्तेमाल किया, फिर उनका फॉलोअप जनवरी 2021 तक जारी रखा गया. उन्होंने कोविड-19 के संभावित दीर्घकालिक पेचीदगियों के तीन संकेतकों का परीक्षण किया, जिसमें अस्पताल में दाखिला, मृत्यु दर और मेडिकल टेस्ट की जरूर शामिल थे. परिणामों की तुलना मरीजों के पांच ग्रुप में उनके बॉडी मास इंडेक्स यानी 18.5-24.9 (सामान्य), 25-29.9 (अधिक वजन), 30-34.9 (हल्का मोटापा), 35-39.9 (मध्यम मोटापा) और 40 या उससे ज्यादा (गंभीर मोटापा) से की गई. </p> <p style="text-align: justify;">कुल 2,839 मरीज जिनको आईसीयू में भर्ती की आवश्यकता नहीं हुई और कोविड-19 के तीव्र चरण से बच गए, उन्हें रिसर्च के अंतिम नतीजे में शामिल किया गया. दूसरी तरफ, सामान्य बॉडी मास इंडेक्स समूह को एक संदर्भ के रूप में समझा गया. नतीजे से पचा चला कि कोविड-19 को हराने के बाद विभिन्न लक्षण आम होते हैं, लेकिन मध्यम और गंभीर मोटापा के मरीजों में दोबारा अस्पताल पहुंचने का खतरा क्रमश: 28 फीसद और 30 फीसद ज्यादा होता है.</p> <p style="text-align: justify;">उसी तरह, विभिन्न मेडिकल समस्याओं के आंकलन के लिए टेस्ट की जरूरत सामान्य बॉडी मास इंडेक्स वालों के मुकाबले मध्यम और गंभीर मोटापा के मरीजों में क्रमश: 25 फीसद और 30 फीसद अधिक पड़ती है. ज्यादा विशेष रूप से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, दिल, लंग, किडनी, वैस्कुलर और दिमागी सेहत का आकलन करने के लिए जांच की जरूरत 35 या उससे अधिक बॉडी मास इंडेक्स के मरीजों में स्पष्ट रूप से ज्याद थी. शोधकर्ताओं का कहना है कि इस रिसर्च का अवोलकन संभावित तौर पर कोविड-19 के दीर्घकालिक जटिलताओं को समझा सकता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="बच्चों की डाइट में शामिल करें ये टॉप फूड्स, ब्रेन बढ़ाने के साथ करेंगे उनकी याद्दाश्त तेज" href="https://www.abplive.com/lifestyle/add-these-top-brain-boosting-foods-to-children-diet-will-help-sharpen-their-memory-1923438">बच्चों की डाइट में शामिल करें ये टॉप फूड्स, ब्रेन बढ़ाने के साथ करेंगे उनकी याद्दाश्त तेज</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Immunity: कोरोना में इस तरह बढ़ाएं बच्चों की इम्यूनिटी, डाइट में शामिल करें ये चीजें" href="https://ift.tt/3iqZmvv कोरोना में इस तरह बढ़ाएं बच्चों की इम्यूनिटी, डाइट में शामिल करें ये चीजें</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"> </p> lifestyle https://ift.tt/3fVeuPV
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