Thursday, June 3, 2021
Surya Grahan 2021: शनि जयंती पर हो रही है यह अद्भुत खगोलीय घटना, जानें भारत पर क्या होगा इसका असर
<p style="text-align: justify;"><strong>Surya Grahan 2021: </strong>हिंदू धर्म में हर साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को शनि जयंती मनाई जताई है. इस दिन शनि देव की पूजा की जाती है. इससे शनिदेव खुश हो जाते हैं. शनिदेव की कृपा से भक्त पर शनि की साढ़े साती और शनि की ढैय्या का असर कम हो जाता है. जिन पर शनि देव की कृपा होती है. उनके पास कभी आर्थिक तंगी नहीं रहती है. धन- वैभव, मान- सम्मान में वृद्धि होती है. उनकी सभी प्रकार की मनोकामना पूरी होती है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>एक</strong> <strong>अद्भुत</strong> <strong>खगोलीय</strong> <strong>घटना</strong></p> <p style="text-align: justify;">पंचांग की गणना के अनुसार, साल 2021 में ज्येष्ठ की अमावस्या 10 जून 2021 को होगी. इसी तारीख को एक खगोलीय घटना होने जा रही है. अर्थात 10 जून 2021 को ही इस साल का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा. यह सूर्य ग्रहण रिंग ऑफ़ फायर के रूप में दिखेगा. खगोलीय घटनाओं में दिलचस्पी रखने वालों के लिए यह दिन बेहद खास होगा. क्योंकि इस दिन आसमान में रिंग ऑफ फायर देखने को मिलेगा. यह दुर्लभ नजारा चंद्रमा के पृथ्वी और सूर्य के बीच आने पर दिखेगा.</p> <p style="text-align: justify;"><a href="https://ift.tt/2SBQHvb Jayanti 2021: शनि जयंती के दिन लगेगा सूर्य ग्रहण, इस राशि पर पड़ेगा बेहद बुरा प्रभाव, जानें</strong></a></p> <p style="text-align: justify;">खास बात यह भी है कि इसी दिन वट सावित्री व्रत का पर्व भी पड़ रहा है. इस पर्व पर सुहागिन महिलायें अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य एवं संतान प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं तथा वट वृक्ष की पूजा करती है. इसके साथ ही वट वृक्ष की परिक्रमा भी करती हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>अद्भुत</strong> <strong>खगोलीय</strong> <strong>घटना</strong> <strong>सूर्य</strong> <strong>ग्रहण</strong><strong> {</strong><strong>रिंग</strong> <strong>ऑफ़</strong> <strong>फायर</strong><strong>} </strong><strong>का</strong> <strong>भारत</strong> <strong>पर</strong> <strong>असर</strong></p> <p style="text-align: justify;">यह सूर्य ग्रहण इस साल का पहला सूर्य ग्रहण और दूसरा ग्रहण होगा. इसके पहले साल 2021 में 26 मई को पहला चंद्र ग्रहण लगा था. चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत के कुछ भागों में आंशिक रूप से ही दिखाई देगा. इस लिए इसका भारत पर कोई खास प्रभाव नहीं पडेगा और न ही इसका सूतक काल भारत में मान्य होगा.</p> <div class="news_content" style="text-align: justify;"><strong><a href="https://ift.tt/2TuBLzm Tips: इन पांच पौधों को आंगन में भूलकर भी नहीं लगाना चाहिए, जानें क्यों?</a></strong></div> lifestyle https://ift.tt/34JfWOU
'वीगन मिल्क विवाद' के बीच प्रधानमंत्री से PETA को बैन करने की मांग, अमूल ने लगाया साजिश का गंभीर आरोप
<p style="text-align: justify;">अमूल ने पशु संरक्षण के लिए काम करनेवाली संस्था पेटा पर बैन लगाने की मांग की है. अमूल के उपाध्यक्ष वलमजी हंबल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले में हस्तक्षेप का आग्रह किया. हंबल ने आरोप लगाया कि गैर सरकारी संगठन भारतीय डेयरी उद्योग की छवि खराब कर 10 करोड़ लोगों की आजीविका बर्बाद करने की कोशिश कर रही है. उनकी तरफ से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया, "डेयरी सेक्टर भारत के सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता है लेकिन अवसरवादी तत्वों जैसे इस संगठन की फैलाई झूठी खबर से जीडीपी बुरी तरह प्रभावित हो सकती है. ऐसे संगठन भारत के दुग्ध उत्पादकों को बेरोजगार करने की साजिश का हिस्सा हैं."</p> <p style="text-align: justify;"><strong>अमूल ने पेटा इंडिया को प्रतिबंधित करने की मांग की</strong></p> <p style="text-align: justify;">उन्होंने आगे कहा, "भारत में इस तरह के संगठनों की गतिविधियों को रोकने के लिए, गुजरात के दुग्ध उत्पादक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह करते हैं कि पेटा को बैन करने के लिए जरूरी कार्यवाही करें ताकि गलत सूचना अभियान से देश के डेयरी उद्योग की छवि कोई धूमिल न कर सके." उन्होंने आरोप लगाया कि पेटा का असली उद्देश्य सिंथेटिक दूध पैदा करनेवाली मल्टीनेशनल कंपनियों की मदद करना है. उन्होंने जोर दिया कि डेयरी उद्योग से जुड़े 10 करोड़ भारतीय दूध दूहते वक्त किसी तरह की पशु क्रूरता में शामिल नहीं होते.</p> <p style="text-align: justify;">हंबल ने कहा, "भारतीय संस्कृति में पशुधन का महत्व परिवार जैसा है और दुग्ध उत्पादक उनका परिवार के किसी सदस्य की तरह देखभाल करते हैं. इसलिए, क्रूरता का सवाल ही नहीं उठता...ये पूरा प्रकरण एक गलत सूचना अभियान और भारतीय डेयरी उद्योग को तोड़ने का प्रयास है, जो आत्मनिर्भर है, इस तरह दूध और दूध प्रोडक्ट्स के आयात की परेशानी से देश को बचाता है." उन्होंने बताया कि उस पर निर्भर 10 करोड़ लोग बेरोजगार हो जाएंगे क्योंकि मंशा कई विदेशी कंपनियों से प्रेरित लगती है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>'वीगन विवाद' के बीच पेटा और अमूल में बढ़ा तकरार</strong></p> <p style="text-align: justify;">पेटा ने इससे पहले अमूल को पौधे पर आधारित दूध और फूड के बाजार का फायदा उठाने की सलाह दी थी. अमूल के बैन की मांग का जवाब देते हुए पेटा इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनीलाल वलीयेट ने बयान में कहा, "अमूल ने खुद धौंस दिखाया है, पशुओं के लिए लोगों की चिंता करने और ग्राहकों की बदलती प्रवृत्ति को समझ पाने में असमर्थ है. लेकिन उसकी धमकी से सच्चाई नहीं बदलने जा रही: वीगन खानपान दुनिया में कब्जा जमा रहा है." </p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="World Bicycle Day 2021: जानिए क्यों और कब विश्व बाइसिकल दिवस मनाया जाता है, क्या हैं खास मैसेज" href="https://ift.tt/2SUgwa4 Bicycle Day 2021: जानिए क्यों और कब विश्व बाइसिकल दिवस मनाया जाता है, क्या हैं खास मैसेज</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="केंद्र ने मेड इन इंडिया वैक्सीन के लिए की डील, बायोलॉजिकल-ई को दिए 1500 करोड़ रुपये" href="https://www.abplive.com/news/india/union-ministry-advance-arrangement-with-biological-e-ltd-hyderabad-for-30-cr-covid19-vaccine-doses-ann-1922297">केंद्र ने मेड इन इंडिया वैक्सीन के लिए की डील, बायोलॉजिकल-ई को दिए 1500 करोड़ रुपये</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3phxEmj
Bipolar Disorder: जानिए इस मानसिक बीमारी के कारण, लक्षण, संकेत और रोकथाम के उपाय
<p style="text-align: justify;">बाइपोलर डिसऑर्डर एक मानसिक बीमारी है जो डिप्रेशन और मूड में बदलाव की वजह बनती है. उसमें रोगी की मनोदशा दो विपरीत अवस्था में बदलती रहती है. बीमारी की चपेट में आने के बाद कई बार व्यवहार पर नियंत्रण रखना मुश्किल हो जाता है. औसतन एक शख्स को इसका पता 25 साल की उम्र के आसपास चलता है, लेकिन लक्षण किशोरावस्था या बाद में भी जाहिर हो सकते हैं. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण</strong><br />बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित शख्स को अक्सर सोने में दुश्वारी होती है. उसके अन्य लक्षणों में व्यवहार का चिड़चिड़ा हो जाना, पागलपन और डिप्रेशन दोनों एक साथ होना, ऊर्जा में कमी, काम को पूरा करने में परेशानी, अक्सर खोये खोये रहना, विचार मग्न रहना, जल्दी-जल्दी बोलना, खुद को चोट पहुंचाना, आत्महत्या का विचार शामिल हैं. पीड़ित शख्स का जिंदगी के प्रति दृष्टिकोण नकारात्मक हो सकता है. बीमारी पुरुषों और महिलाओं को समान रूप से प्रभावित करती है. पुरुषों को महिलाओं की तुलना में जल्दी बाइपोलर डिसऑर्डर होने की संभावना होती है. कुछ लोगों को बहुत ज्यादा व्याकुलता का भी अनुभव हो सकता है. ये जोखिम भरा व्यवहार जैसे खुदकुशी के प्रयास का कारण बनती है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>बाइपोलर डिसऑर्डर की वजह</strong><br />शुरुआत में लक्षणों का पता चलने से प्रभावी इलाज हो सकता है. हालांकि, रोग के प्रमुख कारणों का पता नहीं चल पाया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यावरणीय और जेनेटिक कारक हालत के शुरू होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. परिवार के किसी करीबी सदस्य में बीमारी के होने से बाइपोलर डिसऑर्डर होने की संभावना स्पष्ट रूप से बढ़ जाती है. उसके अलावा, दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर्स में असंतुलन से बाइपोलर डिसऑर्डर समेत मूड का विकार हो सकता है. जेनेटिक रूप से बाइपोलर डिसऑर्डर और सिजोफ्रेनिया में बहुत समानता है. मानसिक स्वास्थ्य की अन्य खराबी जैसे चिंता बाइपोलर डिसऑर्डर की संभावना को बढ़ा सकता है. तनाव को बाइपोलर डिसऑर्डर समेत ज्यादातर मानसिक स्वास्थ्य की स्थितयों में महत्वपूर्ण योगदान करनेवाला पाया गया है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>बाइपोलर डिसऑर्डर की रोकथाम</strong></p> <p style="text-align: justify;">बाइपोलर डिसऑर्डर लंबे समय तक रहनेवाली स्थिति है. इसलिए, पीड़ित शख्स को दवा से ज्‍यादा प्‍यार और प्रोत्‍साहन की जरूरत होती है. अगर आपको किसी में लक्षण दिखाई दे, तो दवा या विशेषज्ञ के लिए डॉक्टर से संपर्क करें. जीवनशैली में बदलाव भी बीमारी की रोकथाम में मददगार हो सकते हैं. इसलिए, नियमित व्यायाम करें, खाने और सोने के शेड्यूल का पालन करें, अपने मूड में आए उतार-चढ़ाव को समझने की कोशिश करें, तनाव को नियंत्रित करना सीखें, सेहतमंद शौक या स्पोर्ट्स की तलाश करें, अल्कोहल न पीएं. कुछ लोग लक्षणों को हल्का करने के लिए खास सप्लीमेंट्स लेते हैं, लेकिन उसके इस्तेमाल से संभावित मुद्दे हो सकते हैं. ऐसे में जरूरी हो जाता है कि किसी सप्लीमेंट्स को लेने से पहले डॉक्टर को बताएं.</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="World Bicycle Day 2021: जानिए क्यों और कब विश्व बाइसिकल दिवस मनाया जाता है, क्या हैं खास मैसेज" href="https://ift.tt/2SUgwa4 Bicycle Day 2021: जानिए क्यों और कब विश्व बाइसिकल दिवस मनाया जाता है, क्या हैं खास मैसेज</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="कोविड-19 के बाद पहली बार 10 किलोमीटर की दौड़, मिलिंद सोमन के पोस्ट पर अंकिता ने दिया ये रिएक्शन" href="https://www.abplive.com/lifestyle/post-covid-19-first-10k-run-ankita-konwar-gave-this-comment-on-post-of-milind-soman-1922147">कोविड-19 के बाद पहली बार 10 किलोमीटर की दौड़, मिलिंद सोमन के पोस्ट पर अंकिता ने दिया ये रिएक्शन</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"> </p> lifestyle https://ift.tt/3cgsVf9
Bhadrakali: इस तिथि पर प्रकट हुईं मां भद्रकाली, व्रत से मिट जाते हैं जाने-अनजाने में हुए समस्त पाप
Apara Ekadashi 2021 Bhadrakali Ekadashi: हिंदू धर्म के व्रतों में मां भद्रकाली व्रत का खास महत्त्व है. पंचांग के मुताबिक़ ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मां भद्रकाली का प्राकट्य हुआ था. मान्यता है कि इस एकादशी तिथि को भगवान शिव के बालों से मां भद्रकाली प्रकट हुई थी. इस लिए इसे भद्रकाली एकादशी कहते हैं. मां भद्रकाली के प्रकट होने का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी से राक्षसों का संहार करना था.धर्म ग्रंथों में भद्रकाली एकादशी अर्थात ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी, अचला एकादशी एवं जलक्रीड़ा एकादशी के नाम से जाना जाता है. वैसे तो एकादशी व्रत के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. परन्तु इस एकादशी के दिन मां भद्रकाली का भी व्रत रखा जाता है. मान्यता है कि इस एकादशी को व्रत रखने से भक्त को जाने अनजाने में किये गए सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है. इस व्रत के असर से प्रेत बाधा से मुक्ति मिलती है. घर में धन-धान्य की कमी नहीं होती. घर परिवार में सुख शांति एवं समृद्धि होती है
VZAY Jayanti 2021: शनि जयंती पर भूलकर भी न करें ये गलती, वर्ना हो सकता है अनिष्टअपरा एकादशी 2021
हिंदू धर्म ग्रन्थों के अनुसार भद्रकाली एकादशी या अपरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की भी पूजा की जाती है. धर्म ग्रंथों के अनुसार अपरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से मनुष्य को अपार पुण्य मिलता है, इसीलिए इसे अपरा एकादशी कहते हैं. ऐसी मान्यता है कि अपरा /अचला एकादशी के दिन पूजा करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में मान-सम्मान, धन, वैभव और अरोग्य की प्राप्ति होती है.
चुटकी भर नमक से ऐसे दूर होगी घर की परेशानियां, धन और सुख समृद्धि की होगी बरसात
Vat Savitri Vrat: वट सावित्री अमावस्या के दिन ही लगेगा सूर्य ग्रहण, जानें सुहागिन महिलाएं कब और कसे करें पूजा
<p><strong>Vat Savitri Vrat / Surya Grahan:</strong> ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि बेहद खास है, क्योंकि हिंदू धर्म में इस तिथि को वट सावित्री व्रत का पर्व मनाया जाता है. इस साल यह तिथि 10 जून को है. इसके अलावा इस साल के 10 जून 2021 को पहला सूर्य ग्रहण भी लग रहा है. अर्थात 10 जून को जहां वट सावित्री व्रत है, वहीं इसी दिन सूर्य ग्रहण भी लग रहा है. ऐसे में इस बार इस तिथि का महत्व और भी बढ़ जाता है. पंचांग के मुताबिक़, सूर्य ग्रहण 10 जून को दोपहर 01: 42 बजे से शुरू होगा और शाम 06: 41 बजे समाप्त होगा. चूंकि सूर्य ग्रहण लगने के 12 घंटे पहले से सूतक कल लग जाता है. सूतक काल में कोई भी शुभ कार्य या पूजा पाठ नहीं किया जाता है. ऐसे में वट सावित्री का व्रत रखने वाली अनेक महिलाओं के मन में वट अमावस्या के दिन पूजा करने के समय को लेकर संशय बना हुआ है. आइए जानें वट सावित्री व्रत की पूजा के लिए शुभ समय और इससे जुड़ी अन्य जानकारी.</p> <div class="uk-grid-collapse uk-grid"> <div class="uk-width-3-5 fz20 p-10 newsList_ht uk-first-column"><a href="https://ift.tt/3z0VZAY Jayanti 2021: शनि जयंती पर भूलकर भी न करें ये गलती, वर्ना हो सकता है अनिष्ट</strong></a></div> </div> <p><strong>भारत</strong> <strong>में</strong> <strong>सूर्य</strong> <strong>ग्रहण</strong> <strong>आंशिक</strong> <strong>होगा</strong></p> <p>शास्त्रों के मुताबिक, सूर्य ग्रहण लगने के 12 घंटे पहले ही सूतक लग जाता है. सूतक काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं किये जाते हैं. मंदिर का कपाट बंद कर दिया जाता है. इस दौरान कोई पूजा पाठ नहीं किया जाता है. परन्तु यह नियम केवल पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान लागू होता है. इस दिन लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में आंशिक सूर्य ग्रहण की तरह दिखाई देगा. वह भी भारत के कुछ हिस्सों से. आंशिक सूर्य ग्रहण में सूतक काल मान्य नहीं होता है. इस लिए सुहागिन महिलाएं वट सावित्री व्रत की पूजा वे किसी भी समय कर सकती हैं. उनके पूजा करने में किसी प्रकार का दोष नहीं होगा.</p> <p><strong>वट</strong> <strong>सावित्री</strong> <strong>व्रत</strong> <strong>शुभ</strong> <strong>मुहूर्त</strong></p> <ul> <li>व्रत तिथि : 10 जून 2021 दिन गुरुवार</li> <li>अमावस्या शुरू : 9 जून 2021 को दोपहर 01:57 बजे</li> <li>अमावस्या समाप्त : 10 जून 2021 को शाम 04:20 बजे</li> <li>व्रत पारण : 11 जून 2021 दिन शुक्रवार</li> </ul> <p><strong>सूर्य</strong> <strong>ग्रहण</strong></p> <p>सूर्य ग्रहण 10 जून की दोपहर 01:42 बजे से शुरू होगा और शाम 06: 41 बजे समाप्त होगा.</p> <div class="uk-grid-collapse uk-grid"> <div class="uk-width-3-5 fz20 p-10 newsList_ht uk-first-column"><a href="https://ift.tt/3uLYIeq Tips: चुटकी भर नमक से ऐसे दूर होगी घर की परेशानियां, धन और सुख समृद्धि की होगी बरसात</strong></a></div> <div class="uk-width-2-5 uk-position-relative uk-padding-remove-left"> </div> </div> lifestyle https://ift.tt/3g2h3Pa
ऑटो रिक्शा, एसी कार टैक्सी या बस, किसमें ज्यादा तेजी से फैलता है कोरोना? रिसर्च से हुआ ये खुलासा
<p style="text-align: justify;">ऑटो रिक्शा के मुकाबले एयर कंडीशनर टैक्सी में सह यात्री से कोविड-19 संक्रमण की संभावना 300 गुना ज्यादा होती है. जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी की तरफ से किए गए रिसर्च में खुलासा हुआ है. दो शोधकर्ता दर्पण दास और गुरुमुर्ति रामाचंद्रन ने परिवहन के चार माध्यम टैक्सी, ऑटो रिक्शा, बस और एयर कंडीशनर टैक्सी का विश्लेषण किया. रिसर्च का विषय था 'भारत में कोविड-19 महामारी के दौरान परिवहन की विभिन्न गाड़ियों का जोखिम विश्लेषण.' </p> <p style="text-align: justify;"><strong>परिवहन के चार माध्यमों में ऑटो रिक्शा ज्यादा सुरक्षित</strong></p> <p style="text-align: justify;">उन्होंने पाया कि एयरकंडीशनर टैक्सी में बैठे कोरोना पॉजिटिव यात्री से बीमारी की चपेट में आने का करीब 300 गुना ज्यादा खतरा है. शोधकर्ताओं का कहना है कि परिवहन के चारों विकल्पों में से ऑटो सबसे सुरक्षित है. उन्होंने बताया कि एयर कंडीशनर बिना टैक्सी में कोरोना से संक्रमित होने की संभावना 250 फीसद तक कम हो जाती है. एयर कंडीशनर और एयर कंडीशनर बिना टैक्सी में खतरे का हिसाब लगाकर उन्होंने नतीजा निकाला कि दोनों प्रकार की टैक्सी में खतरा 75 फीसद तक कम हो गया जब वाहन शून्य से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चले.</p> <p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा कि ऑटो के मुकाबले एयर कंडीशनर बिना टैक्सी में खतरा 86 गुना ज्यादा पाया गया. खुली खिड़की गतिहीन बस में ऑटो में बैठे चार लोगों के मुकाबले कोविड-19 से संक्रमित होने की 72 गुना ज्यादा संभावना हो जाती है. रिसर्च के लिए शोधकर्ताओं ने हवा से फैलनेवाले संक्रामक रोग के Wells-Riley मॉडल का इस्तेमाल किया. इस मॉडल का इस्तेमाल पहले ट्यूबरक्‍युलोसिस और मीजल्स के ट्रांसमिशन को समझने में किया जा चुका है. इस मॉडल के जरिए ट्रांसमिशन पर वेंटिलेशन का अनुमान लगाया गया. रिसर्च में माना गया कि हवा में संक्रामक वायरस के अंश होते हैं. शोधकर्ताओं के मुताबिक, मॉडल से अंदाजा हुआ कि छोटे, खराब वेंटिलेटेड कमरे में संक्रामक वायरस के अंशों की एकाग्रता अधिक होने की प्रवृत्ति होगी, और ये बड़े, बेहतर तरीके से वेंटिलेटेड किए गए कमरों में कम होगी.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कोरोना संक्रमण में परिवहनों की भूमिका पर रिसर्च </strong></p> <p style="text-align: justify;">दास ने स्पष्ट किया कि कोरोना संक्रमित शख्स से वायरल संक्रमण की विभिन्न दर को समझने की कोशिश की गई. इसका आधार विभिन्न गतिविधियां जैसे गाना, बातचीत करना रखा गया था. वाहन की कम आवाज के कारण समझा गया कि ये मिला जुला कमरा है. ऑटो में ड्राइवर समेत पांच लोग एक दूसरे बहुत करीब बैठे, लेकिन वेंटिलेशन के कारण संक्रमण की संभावना सबसे कम हो गई. ज्यादा कम वेंटिलेशन के कारण बैठे 40 लोगों से बस में संक्रमण की संभावना अधिक थी. वायरस के हवाई स्वभाव की वजह से छह फीट की दूरी और मास्क के अलावा वेंटिलेशन ट्रांसमिशन की रोकथाम में महत्वपूर्ण पैरामीटर माना गया. दास ने कहा, "ये कहने का नहीं है कि ऑटो रिक्शा पूरी तरह सुरक्षित हैं.</p> <p style="text-align: justify;">हम कह रहे हैं कि ऑटो रिक्शा तुलनात्मक रूप से ज्यादा सुरक्षित हैं, अगर आपने मास्क पहन रखा है." हालांकि, शोधकर्ताओं ने हिसाब नहीं लगाया कि बस के गति में होने से कितना जोखिम कारक कम हो जाता है, लेकिन ये जरूर माना कि कम होने की संभावना है. रिसर्च में बताया गया कि डिजाइन के कारण ऑटो रिक्शा में जोखिम समान रहने की संभावना है, चाहे ये गतिहीन हो गति में हो. दोनों शोधकर्ता अब रेल और हवाई यात्रा में मुसाफिरों के जोखिम का अंदाजा लगाने पर काम कर रहे हैं. दास कहते हैं, "महामारी ने सार्वजनिक परिवहन में वेंटिलेशन सिस्टम को फिर से डिजाइन और दोबारा विचार करने का अवसर दिया है."</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="कोविड-19 के बाद पहली बार 10 किलोमीटर की दौड़, मिलिंद सोमन के पोस्ट पर अंकिता ने दिया ये रिएक्शन" href="https://www.abplive.com/lifestyle/post-covid-19-first-10k-run-ankita-konwar-gave-this-comment-on-post-of-milind-soman-1922147">कोविड-19 के बाद पहली बार 10 किलोमीटर की दौड़, मिलिंद सोमन के पोस्ट पर अंकिता ने दिया ये रिएक्शन</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="वैक्सीन की कमी के बीच अच्छी खबर, अगले महीने देश आ सकती है फाइजर वैक्सीन" href="https://www.abplive.com/news/india/pfizer-vaccine-may-reach-india-in-july-1922202">वैक्सीन की कमी के बीच अच्छी खबर, अगले महीने देश आ सकती है फाइजर वैक्सीन</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"> </p> lifestyle https://ift.tt/3ihkzHY
वैक्सीन की कमी के बीच अच्छी खबर, अगले महीने देश आ सकती है फाइजर वैक्सीन
<p style="text-align: justify;">देश में फाइजर की अमेरिकी वैक्सीन अगले महीने आ सकती है. सरकार इस दिशा में नियामक कानूनी अड़चनों में ढील देने का फैसला कर लिया है. दरअसल, फाइजर ने क्षतिपूर्ति संबंधी नियामकों में छूट मांगी थी. सरकार में अब इस बात पर सहमति है कि उसे यह छूट दे दी जाए. इस तरह की छूट कंपनी अमेरिका सहित उन सभी देशों से मांगती है जहां वैक्सीन की सप्लाई होनी है. अगर फाइजर की वैक्सीन पर सरकारी मंजूरी मिल जाती है तो भारत में यह चौथी वैक्सीन होगी. इससे पहले कोवीशील्ड, कोवैक्सिन और रूस की स्पूतनिक वैक्सीन भारत के लोगों को दी जा रही है. </p> <p style="text-align: justify;"><br /><strong>सरकार और कंपनी में सहमति</strong><br />टीओआई में छपी खबर के मुताबिक क्षतिपूर्ति और खरीद प्रक्रिया को लेकर भारत सरकार और अमेरिकी कंपनी के बीच अंतिम समक्षौता होना बाकी है लेकिन दोनों तरफ से वैक्सीन की खरीद पर आम सहमति बन चुकी है. सूत्रों के मुताबिक सरकार क्षतिपूर्ति में पूरी तरह से छूट प्रदान कर सकती है. फाइजर को इस तरह के सीमित इस्तेमाल की छूट अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, यूरोपियन मेडिसीन एजेंसी, मेडिसीन एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट रेगुलेटरी एजेंसी यूके, फर्मास्युटिकल एंड मेडिकल डिवाइसेज एजेंसी जापान की ओर से मिल चुकी है. इसके साथ ही फाइजर की वैक्सीन को WHO की इमरजेंसी सूची में भी जगह मिल चुकी है. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>पांच करोड़ खुराक भेज सकती है कंपनी </strong><br />एक रिपोर्ट के मुताबिक फाइजर ने जुलाई से अक्तूबर के बीच पांच करोड़ खुराक भारत को देने की बात कही थी. गौरतलब है कि बीते दिनों अमेरिकी कंपनी फाइजर ने कहा था कि वह 2021 में ही पांच करोड़ टीके उपलब्ध कराने को तैयार है मगर वह क्षतिपूर्ति सहित कुछ नियामकीय शर्तों में बड़ी छूट चाहती है. इस अमेरिकी कंपनी ने पांच करोड़ टीके इसी साल उपलब्ध कराने का संकेत दिया है. इसमें एक करोड़ टीके जुलाई में, एक करोड़ अगस्त में और दो करोड सितंबर तथा एक करोड़ टीके अक्टूबर में उपलब्ध कराये जायेंगे. कंपनी ने कहा है कि वह केवल भारत सरकार से बात करेगी और टीकों का भुगतान भारत सरकार द्वारा फाइजर इंडिया को करना होगा. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>कौन सी छूट मांग रही कंपनी </strong><br />दरअसल, फाइजर ने टीके के संभावित दुष्प्रभावों को लेकर संरक्षण की मांग की है जिस पर भारत सरकार में सहमति बन चुकी है. जल्द इस बारे में निर्णय लिया जाएगा. आमतौर पर किसी भी दवाई या वैक्सीन को लेकर अगर किसी तरह के दुष्रभाव सामने आते हैं तो कंपनी से हर्जाना वसूला जाता है. लेकिन वैक्सीन को जल्दी में तैयार किया गया है, इसलिए वैक्सीन निर्माताओं को इससे छूट की दरकार होती है. इस प्रकार की छूट फाइजर ने अमेरिका समेत उन सभी देशों में मांगी थी, जहां उसके टीके की आपूर्ति की है. </p> <p style="text-align: justify;">ये भी पढ़ें</p> <p style="text-align: justify;"><a href="https://ift.tt/3pgx201 दक्षिण भारत में आज हो सकती है मानसून की दस्तक, जाने कब तक भीगेगी उत्तर भारत की धरती</a></p> lifestyle https://ift.tt/3cgLfom
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