Friday, May 7, 2021

Shani Pradosh Vrat: कल है शनि प्रदोष व्रत, धन वृद्धि और मनोकामना की पूर्ति के लिए करें भगवान शिव और शनि देव की पूजा

<p style="text-align: justify;"><strong>Shani Pradosh Vrat 2021: </strong>हिंदू धर्म या सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को अति मंगलकारी माना गया है. इस व्रत का विधि विधान से पूजा करने पर भगवान शिव की कृपा होती है. वैशाख मास का पहला &nbsp;प्रदोष व्रत&nbsp; शनिवार, 8 मई 2021 को पड़ेगा. इस दिन चूंकि शनिवार है इस लिए इस प्रदोष व्रत को शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है. यह शनि प्रदोष व्रत होने के कारण इसका महत्त्व और बढ़ गया है. इस दिन शनि देव के अलावा भगवान शिव की भी पूजा की जाती है.</p> <p style="text-align: justify;">शास्त्रों के अनुसार, शनि प्रदोष व्रत के दिन शनि देव को काला तिल, काला वस्त्र, तेल, उड़द की दाल अर्पित करना बहुत ही शुभ माना जाता है. इस व्रत का विधि-विधान से पूजा करने पर शिव कृपा से धन की वृद्धि होती है और मनोकामना पूरी होती है. &nbsp;&nbsp;पुराणों में कहा गया है कि प्रदोष व्रत से लंबी आयु की प्राप्ति होती है.</p> <div class="news_content" style="text-align: justify;"><a href="https://ift.tt/3nTLKtc Ekadashi: आज है वरूथिनी एकादशी, जानें क्या है इसकी महिमा, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त</strong></a></div> <p style="text-align: justify;"><strong>शनि</strong> <strong>प्रदोष</strong> <strong>व्रत</strong> <strong>पर</strong> <strong>बन</strong> <strong>रहा</strong> <strong>प्रीति</strong> <strong>योग</strong></p> <p style="text-align: justify;">ज्योतिष के अनुसार, इस शनि प्रदोष व्रत प्रीति योग में रखा जाएगा. &nbsp;प्रीति योग में शनि प्रदोष व्रत रखने मेल-मिलाप बढ़ाने, प्रेम विवाह करने तथा अपने रूठे मित्रों को मनाने में सफलता मिलती है. इस व्रत को रखने से बिगड़े काम बन जाते हैं. यह योग झगड़ों से समझौते करने या इसे निपटाने के लिए भी उत्तम माना जाता है. इस योग में किये गए कार्य से मान-सम्मान में वृद्धि होती है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>शनि</strong> <strong>प्रदोष</strong> <strong>व्रत</strong> <strong>का</strong> <strong>शुभ</strong> <strong>मुहूर्त</strong> <strong>एवं</strong> <strong>पूजा</strong> <strong>का</strong> <strong>समय</strong><strong>-</strong></p> <ul style="text-align: justify;"> <li><strong>त्रयोदशी</strong> <strong>तिथि</strong> <strong>आरंभ</strong><strong>- </strong>08 मई 2021 शाम 05 बजकर 20 मिनट से होगी</li> <li><strong>त्रयोदशी</strong> <strong>तिथि</strong> <strong>समाप्त</strong><strong>- </strong>09 मई 2021 शाम 07 बजकर 30 मिनट पर होगी.</li> <li><strong>पूजा</strong> <strong>समय</strong><strong>- </strong>08 मई शाम 07 बजकर रात 09 बजकर 07 मिनट तक</li> </ul> <div class="uk-grid-collapse uk-grid"> <div class="uk-width-3-5 fz20 p-10 newsList_ht uk-first-column" style="text-align: justify;"><a href="https://ift.tt/33kA1ug Shivratri May 2021: इस दिन है मासिक शिवरात्रि, बन रहें हैं ये दो शुभ योग, जानें किस शुभ मुहूर्त में करें शिव की पूजा</strong></a></div> <div class="uk-width-2-5 uk-position-relative uk-padding-remove-left" style="text-align: justify;">&nbsp;</div> </div> lifestyle https://ift.tt/3h9dNne

Oxygen Concentrator vs Oxygen Cylinder: ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर और ऑक्सीजन सिलेंडर में अंतर समझिए

देश में कोरोना महामारी का संकट अपने चरम पर है. पिछले दो दिनों से चार लाख संक्रमण के मामले आ रहे हैं. हर तरफ ऑक्सीजन को लेकर हाहाकर मचा हुआ है. ऑक्सीजन की कमी के कारण कई लोगों की मौत हो चुकी है. पूरी दुनिया से भारत में ऑक्सीजन भेजी जा रही है. फिर भी पूरी तरह से ऑक्सीजन की कमी की भारपाई नहीं की जा सकी है. देश में 1.36 करोड़ लोग कोरोना से ठीक हो चुके हैं लेकिन 24 लाख लोग अब भी कोरोना से संक्रमित हैं. इनमें से कई अस्पताल में हैं तो कई घर पर आइसोलेशन में. इनमें कई लोगों को ऑक्सीजन की जरूरत है. इसलिए ऑक्सीजन की डिमांड अब तक सबसे ज्यादा हो गई है. चूंकि अस्पताल कोविड रोगियों से भरे पड़े हैं, इसलिए कई लोग घर पर ही इलाज कर रहे हैं और उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है. ऐसे में घर पर ही कुछ लोगों ने ऑक्सीजन सिलेंडर या ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर की व्यवस्था कर ली है. लेकिन ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर और ऑक्सीजन सिलेंडर में क्या अंतर है. आइए इसके बारे में डॉक्टर से विस्तार से जानते हैं-ऑक्सीजन सिलेंडर और ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर में अंतर गुड़गांव में सीके विड़ला अस्पताल के डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनल मेडिसीन के डॉ तुषार दयाल ने बताया कि ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर भी ऑक्सीजन सिलेंडर की तरह काम करता है. ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर एक पोर्टेबल मशीन है जिससे हवा को खींचा जाता है. इसके बाद इस हवा से नाइट्रोजन, कार्बन सहित अन्य गैसों को बाहर निकाल दिया जाता है और नजल ट्यूब या मास्क के जरिए शुद्ध ऑक्सीजन की सप्लाई की जाती है. यह पूरी प्रक्रिया साथ-साथ चती है.
ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर बिजली से चलती है. इसलिए जब तक बिजली है ऑक्सीजन की सप्लाई अनवरत करती रहेगी जबकि ऑक्सीजन सिलेंडर में ऑक्सीजन खत्म होने के बाद इसे फिर से रिफिल करना होगा यानी ऑक्सीजन प्लांट पर ले जाकर सिलेंडर में फिर से ऑक्सीजन भरना होगा.दो तरह के ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर दो तरह के होते हैं. एक लगातार फ्लो वाला कंसेंट्रेटर दूसरा पल्स वाला कंसेंट्रेटर. लगातार बहाव वाले कंसेंट्रेटर को जब तक बंद नहीं किया जाए तब तक एक ही फ्लो में ऑक्सीजन की सप्लाई करता रहता है जबकि पल्स वाला कंसेंट्रेटर मरीज के ब्रीदिंग पैटर्न को समझकर जितनी जरूरत होती है, उतनी ही ऑक्सीजन की सप्लाई करता है. ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर पोर्टेबल होता है, इसलिए ऑक्सीजन सिलेंडर के मुकाबले कहीं भी ले जाने में आसानी होती है.गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर से काम नहीं चलेगा ड़ॉक्टर कहते हैं कि बेशक ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर को ले जाने-आने में आसानी होती है लेकिन गंभीर मरीजों के लिए यह कारगर नहीं होता है. जो व्यक्ति किसी गंभीर बीमारी से पहले से पीड़ित हैं और उसे यदि कोरोना हो गया है और उसे ऑक्सीजन की जरूरत है तो ऐसे मरीजों के लिए ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर काम नहीं करेगा. क्योंकि ऐसे मरीजों में कई तरह के कंप्लीकेशन होते हैं. ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर से प्रति मिनट 5-10 लीटर ऑक्सीजन की सप्लाई होती है जो कि गंभीर मरीजों के लिए पर्याप्त नहीं है. उसके लिए प्रति मिनट इससे ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत होती है. डॉ दयाल बताते हैं कि जब ऑक्सीजन सेचुरेटेड 92 प्रतिशत से नीचे आ जाए तो दोनों में से किसी एक से ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू की जा सकती है.

Mother's Day 2021: 9 मई को मनाया जाएगा मदर्स डे, जानें इसका इतिहास, महत्व और रोचक तथ्य

<p style="text-align: justify;">दुनिया भर के सभी देशों में मदर्स डे कई सालों से मनाया जाता रहा है. इस बार मदर्स डे 9 मई को मनाया जाएगा. यह एक ऐसा दिन है जिसे बच्चे और वयस्क दोनों हर साल मानाने के लिए तत्पर रहते हैं. मदर्स डे पर गिफ्ट, स्पेशल इवेंट और रेस्तरां में स्पेशल मेनू जैसी बहुत लोकप्रिय हैं लेकिन इस साल महामारी के बीच इवेंट नहीं हो पाएंगे. &nbsp; &nbsp;</p> <p style="text-align: justify;">इस बार ज्यादातर परिवार घर पर मदर्स डे &nbsp;सेलिब्रेट करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि हर कोई सुरक्षित रहे. मदर्स डे महिलाओं के आंदोलनों से जुड़ा रहा है जो समान अधिकारों की मांग करते रहे हैं. अमेरिका में 70 के दशक में मदर्स डे पर महिलाओं ने वंचित महिलाओं और बच्चों के समर्थन में रैली निकाली. मदर्स डे से कई रोचक तथ्य जुड़े हुए हैं जिनके बारे में आपको जानना चाहिए.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>मदर्स डे का इतिहास और रोचक तथ्य</strong></p> <p style="text-align: justify;">मदर्स डे सेलिब्रेशन प्राचीन यूनानियों और रोमनों में ट्रेस किया जा सकता है, जिन्होंने गोडेस Rhea और Cybele के सम्मान में उत्सव आयोजित किए. वहीं, &nbsp;यूनाइटेड किंगडम और यूरोप के कुछ हिस्सों में &nbsp;मदर्स डे लेंट के दौरान चौथे रविवार को देखा गया जब लोग स्पेशल सर्विस के लिए अपने 'मदर चर्च' या पड़ोस के मुख्य चर्च लौटे.</p> <p style="text-align: justify;">समय के साथ &nbsp;धार्मिक धारणा से ज्यादा मदर्स डे बच्चों के लिए विशष दिन बन गया, जो इस दिन अपनी मां को फूल और गिफ्ट देते हैं.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>अमेरिका में 1868 &nbsp;में मदर्स फ्रेंडशिप डे की हुई शुरुआत</strong><br />अमेरिका में &nbsp;शांतिदूत एना जार्विस ने गृहयुद्ध के दौरान माताओं के बीच एकजुटता बढ़ाने के लिए बहुत प्रयास किए और उन्होंने 1868 में मदर्स फ्रेंडशिप डे की शुरुआत की .<br />&nbsp;<br />माताओं के सम्मान के रूप में एक सफेद कार्नेशन पहनना सबसे पहले एना जार्विस द्वारा शुरू किया गया था. बाद में लाल या गुलाबी रंग के कार्नेशन का इस्तमाल जीवित मां के लिए किया गया और सफेद कार्नेशन उस मां के लिए किया गया जो अब जीवित नहीं.&nbsp; वहीं, मदर्स डे वर्क क्लब महिलाओं को यह सिखाने के लिए शुरू किए गए कि वे अपने बच्चों की देखभाल कैसे करें.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>दुनियाभर में मदर्स डे के हैं कई वर्जन&nbsp;</strong><br />दुनिया में मदर्स डे के कई वर्जन हैं. थाईलैंड में, पारंपरिक रूप से मदर्स डे अगस्त में थाईलैंड के क्यूम मदर सिरिकित के जन्मदिन पर मनाया जाता है. इथोपिया में परिवार एक विशेष दिन पर शरद ऋतु में इकट्ठा होते हैं और माताओं का सम्मान करते हैं.</p> <p style="text-align: justify;">भारत में पारंपरिक रूप से माताओं का एक विशेष स्थान है. दुर्गा पूजा, लक्ष्मी पूजा और नवरात्रि जैसे अधिकांश त्योहार देवी के रूप में माताओं का सम्मान का प्रतीक माने जाते हैं.&nbsp;<br />&nbsp;<br /><strong>यह भी पढ़ें-</strong><br /><strong><a href="https://ift.tt/2PV05Ji Fungus Infection: कोरोना मरीजों में घातक ब्लैक फंगस इंफेक्शन के मामले दिखे, जानिए क्या हैं लक्षण और इलाज</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a href="%20https://ift.tt/33nQWMI से जानिए, कोरोना से बचने के लिए Hand Sanitiser कैसे और कितनी मात्रा में लगाएं</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3xTZV67

क्या कोविड-19 वैक्सीन के दोनों डोज लगवाने के बाद भी कोरोना हो सकता है? जानिए डॉक्टर अरविंद कुमार से

<p style="text-align: justify;">भारत में कोरोना वायरस के खिलाफ 18 साल से ऊपर के लोगों का टीकाकरण जारी है. टीकाकरण में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविड-19 वैक्सीन कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन इस्तेमाल की जा रही है. टीकाकरण के तीसरे में अब तक कई लोगों ने पूरी डोज लगवा ली है. लेकिन सवाल ये पैदा हो रहा है कि क्या पूरा डोज लगवाने के बाद भी कोविड हो सकता है?</p> <p style="text-align: justify;">कई ऐसे मामले इन दिनों देखने को मिल रहे हैं जहां कोविड-19 वैक्सीन की पूरी डोज लगवाने के बाद लोगों की मौत हो जा रही है. इस पर एबीपी न्यूज़ से बातचीत करते हुए मेदांता अस्पताल, गुरुग्राम के डॉक्टर अरविंद कुमार कहते हैं, "वैक्सीन के तीसरे चरण के मानव परीक्षण के दौरान वॉलेंटियर के दो ग्रुप बनाए गए थे. एक ग्रुप को कोविड-19 वैक्सीन का डोज लगाया गया जबकि दूसरे को नहीं. नतीजे के बाद पता चला कि जिस ग्रुप में वैक्सीन का इस्तेमाल किया गया था, उसमें 70-80 फीसद लोगों को संक्रमण नहीं हुआ, मात्र 20-30 फीसद लोग संक्रमण की चपेट में आ सके थे और संक्रमित लोगों को हल्के लक्षण थे और उनमें से किसी को अस्पताल में नहीं जाना पड़ा था और न ही किसी की मौत हुई. लेकिन कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में कुछ लोगों को टीकाकरण के बावजूद गंभीर लक्षण का सामना करना पड़ा और कुछ की मौत भी हुई."</p> <p style="text-align: justify;">डॉक्टर का जोर इस बात पर है कि वैक्सीन का पूरा डोज लगवाने के बाद भी अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत क्यों आई, इस सिलसिले में रिसर्च किए जाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि टीकाकरण आज भी गंभीर बीमारी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है. उनकी सलाह है कि भले 100 फीसद सुरक्षा न मिलती हो, लेकिन नंबर आने पर अपना टीकाकरण जरूर कराएं.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>सवाल- कोरोना वायरस के स्ट्रेन के खिलाफ क्या वैक्सीन असरदार है?</strong><br /><strong>जवाब-</strong> अभी तक के उपलब्ध डेटा को देखकर लगता है कि उपलब्ध कोविड-19 वैक्सीन स्ट्रेन के खिलाफ प्रभावी साबित हो रही हैं. लेकिन सटीक जवाब के बारे में अभी कह पाना जल्दबाजी होगी बल्कि रिसर्च की जरूरत है.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>मानसिक और शारीरिक तौर पर होनेवाली परेशानी से कैसे बचें?&nbsp;</strong><br /><strong>जवाब-</strong> कोरोना संक्रमण का कोई भी लक्षण जैसे बदन दर्द, बुखार, नाक, गला खराब हो, डायरिया इत्यादि जाहिर होने पर आरटी-पीसीआर की जांच का इंतजार न करें बल्कि सबसे पहले खुद को आइसोलेट कर लें. संक्रमण को रोकने के लिए ये पहला कदम अत्यंत आवश्यक है. दूसरे नंबर पर जरूरी और बुनियादी दवाओं में है पैरासिटामोल. बुखार होने पर सबसे जरूरी है उसे काबू करना और इसके लिए 4-4 या 6-6 घंटे पर पैरासिटामोल की दवा लगातार लें. लक्षण के पहले चरण में एंटीवायरल या एंटीबायोटिक दवाओं को लेने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. होम आइसोलेशन में रहते हुए तीसरे नंबर पर जरूरी है उच्च प्रोटीन वाली डाइट, पानी और फल का इस्तेमाल जरूर करें. वसा युक्त भोजन के इस्तेमाल से परहेज करें. लक्षण जाहिर होने के पहले हफ्ते में स्ट्रॉयड या ब्लड थिनर की कोई भूमिका नहीं है. अपनी दवाओं की पर्ची किसी दूसरे को आजमाने की सलाह न दें. घबराने की बजाए दिमाग को शांत रखें, आराम करें, योग करें और घर पर रहें. पांचवें नंबर पर है खुद की मॉनिटरिंग यानी अपने शरीर के तापमान और ऑक्सीजन को 4-4 घंटे पर नापते रहें.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>सवाल- आपको अस्पताल जाने की कब जरूरत पड़ सकती है?</strong><br /><strong>जवाब-</strong> बुखार 104-105 डिग्री सेल्सियस से ऊपर लगातार रहे, ऑक्सीजन लेवल में गिरावट आए, छाती में दर्द, अत्यधिक खांसी होने पर आपको ऑक्सीजन की जरूरत पड़ेगी. ऑक्सीजन लेवल सुधारने के लिए हर घंटे पर छाती को फुलाते हुए गहरी सांस लें. अगर सांस रोकने की रफ्तार में रोजाना वृद्धि हो रही है, तब ये इस बात का संकेत है आपके लंग में कोई समस्या नहीं है.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Black Fungus Infection: कोरोना मरीजों में घातक ब्लैक फंगस इंफेक्शन के मामले दिखे, जानिए क्या हैं लक्षण और इलाज" href="https://ift.tt/2PV05Ji Fungus Infection: कोरोना मरीजों में घातक ब्लैक फंगस इंफेक्शन के मामले दिखे, जानिए क्या हैं लक्षण और इलाज</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="पश्चिम बंगाल जाने वााले रेल यात्रियों के पास RT-PCR निगेटिव रिपोर्ट होना जरूरी, ममता सरकार ने किया एलान" href="https://www.abplive.com/news/india/train-passengers-going-to-west-bengal-must-have-rt-pcr-negative-report-1911118">पश्चिम बंगाल जाने वााले रेल यात्रियों के पास RT-PCR निगेटिव रिपोर्ट होना जरूरी, ममता सरकार ने किया एलान</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3usAqa0

Black Fungus Infection: कोरोना मरीजों में घातक ब्लैक फंगस इंफेक्शन के मामले दिखे, जानिए क्या हैं लक्षण और इलाज

- कोरोना के कारण कई अनदेखी, अनजानी चीजें हो रही हैं. पिछले कुछ दिनों में Covid-19 patient में Black fungus infections के मामले देखे गए हैं. पिछले साल दिसंबर में इस तरह के कुछ मामले देखे गए थे जिसमें मरीजों की आंख की रोशनी चली गई थी. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के मुताबिक यह बीमारी दुर्लभ और जोखिमपूर्ण है. यह फफूंद यानी फंगस के समूह द्वारा होती है जिसे mucormycetes कहा जाता है. आमतौर हमारे वातावरण में फफूंद का यह समूह पाया जाता है. से संक्रमित मरीज या कोरोना से स्वस्थ्य हुए मरीज में Black fungus infections देखा गया है. Black fungus infections आमतौर पर उन लोगों में होता है जिनका शरीर किसी बीमारी से लड़ने में कमजोर होता है. वह आदमी अक्सर दवाई लेता है और उसमें कई तरह की हेल्थ प्रोब्लम होती है.
क्या है इसके लक्षण
इस बीमारी के बाद चेहरे में सून्नापन आने लगता है. इसके अलावा एक तरफ की नाक भी बंद होने लगती है. आंखों में दर्द और सूजन की शिकायतें आने लगती है.
कौन Black fungus से संक्रमित हो सकता ह
सर गंगाराम अस्पताल के ENT विभाग में सर्जन डॉ मनीष मुंजाल ने बताया कि हमने इस घातक बीमारी को फिर से होते हुए देखा है. यह कोविड-19 के कारण होती है. पिछले दो दिनों में mucormycisis के 6 केसेज आए हैं. पिछले साल इस बीमारी के कारण कई लोगों की जान गई थी और कई की आंखों की रोशनी चली गई थी. इसके अलावा कुछ लोगों को नाक और जबड़े को हटाना पड़ा. ENT विभाग के ही डॉ अजय स्वरूप ने बताया कि डायबीटिज से पीड़ित कोरोना के मरीजों को स्टेरॉयड दिया जाता है. ऐसे मरीजों में ब्लैक फंगल इंफेक्शन का जोखिम रहता है. इसके अलावा कोविड से संक्रमित वीक इम्यूनिटी वाले मरीजों में भी इस बीमारी का जोखिम है.
क्या यह बीमारी घातक है
अगर लंबे समय तक इसका इलाज नहीं कराया जाए तो यह घातक हो सकता है. पिछले साल अहमदाबाद में इस तरह के 5 मरीज मिले थे. इनमें से या तो ये कोरोना संक्रमित थे या कोरोना से ठीक हो गए थे. इनमें से दो लोगों की मौत हो गई जबकि दो लोगों की आंखों की रोशनी चली गई.इसका इलाज क्या है माना जाता है कि इस बीमारी से आधे लोगों की मौत हो जाती है. हालांकि अगर शुरुआती दौर में बीमारी की पहचान कर ली जाए तो रिजल्ट बेहतर आता है. डॉ मुंजाल बताते हैं कि नाक में बाधा, आंख और गाल में सूजन और काली पपड़ी जैसे लक्षण दिखे तो बायोप्सी से इंफेक्शन के बारे में पता लगाया जा सकता है. अगर शुरुआती दौर में एंटीफंगल थेरेपी शुरू कर दी जाए तो मरीज की जान बच सकती है. 

WHO से जानिए, कोरोना से बचने के लिए Hand Sanitiser कैसे और कितनी मात्रा में लगाएं

हैंड सैनेटाइजर कोविड-19 के खिलाफ एतहितायती उपायों का एक अभिन्न हिस्सा रहा है. हाथ की सफाई वायरस के ट्रांसमिशन को रोकने के लिए जरूरी हो गई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कुछ टिप्स 
;शेयर किए हैं और बताया है कि अल्कोहल आधारित हैंड सैनेटाइजर का इस्तेमाल करते हुए कुछ बाकों को ध्यान में रखा जाना चाहिए.अल्कोहल आधारित हैंड सैनेटाइजर की क्या मात्रा हो?
विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह है कि मुट्ठीभर सैनेटाइजर हाथों की सभी सतह को ढंकने के लिए लगाएं. अपने हाथों को एक साथ सही तकनीक की मदद से उसके सूखने तक रगड़ें. पूरी प्रक्रिया 20-30 सेंकड तक चलनी चाहिए.क्या अल्कोहल वाला सैनेटाइजर इस्तेमाल करना सुरक्षित है?
डब्ल्यूएचओ ने इंस्टाग्राम पर बताया, "सैनेटाइजर में अल्कोहल किसी भी प्रासंगिक स्वास्थ्य मुद्दों को बनाने के लिए नहीं दिखाया गया है. अल्कोहल की सिर्फ थोड़ी मात्रा स्किन में अवशोषित होती है. ज्यादातर प्रोडक्ट्स में स्किन के रूखापन को कम करने वाला सुखदायक प्रभाव होता है.
आप कितनी बार हैंड सैनेटाइजर का इस्तेमाल कर सकते हैं?
विशेषज्ञों ने भी साबुन और पानी के इस्तेमाल करने की सिफारिश अपने हाथों को धोने के लिए की है. बार-बार हैंड सैनेटाइजर का इस्तेमाल करना सुरक्षित है. अल्कोहल वाला सैनेटाइजर एंटीबायोटिक प्रतिरोध पैदा नहीं करता है.
क्या सामूहिक हैंड सैनेटाइजर का बोतल छूने से आपको संक्रमण होगा?
डब्ल्यूएचओ का कहना है, "जब आपने एक बार अपने हाथों को सैनेटाइज कर लिया, तब आपने उनको किसी रोगाणु से डिसइंफेक्ट कर लिया जो बोतल पर हो सकता है. अगर हर कोई सार्वजनिक जगह पर सैनेटाइजर का इस्तेमाल करता है...सामुदायिक सामग्री पर कीटाणुओं का खतरा कम हो जाएगा और हर शख्स को सुरक्षित रखेगा."
बार-बार हाथ धोना या ग्लोव्स पहनना कौन बेहतर है?
ग्लोव्स पहनने से रोगाणु के हस्तांतरण का जोखिम एक सतह से दूसरी सतह तक हो सकता है. अगर आप ग्लोव्स पहन रहे हैं, तब सुनिश्चित करें कि आपका हाथ सैनेटाइज किया हो. डब्ल्यूएचओ ने बताया, "ग्लोव्स पहनना हाथ की स्वच्छता का स्थान नहीं ले सकता है. हेल्थ केयर वर्कर्स सिर्फ खास कामों के लिए ग्लोव्स पहनते हैं."
"Coro upnavirus: आपका साबुन महामारी की लड़ाई में दोस्त हो सकता है, 

Varuthini Ekadashi: आज है वरूथिनी एकादशी, जानें क्या है इसकी महिमा, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

<p style="text-align: justify;"><strong>Varuthini Ekadashi 2021: </strong>वैशाख मास की पहली एकादशी का व्रत आज 7 मई को रखा गया है. इस एकादशी को वरूथिनी एकादशी भी कहते हैं. एकादशी व्रत को विधि विधान से करने पर व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त होती है. ज्योतिष के अनुसार चन्द्रमा की स्थिति के कारण व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक स्थिति खराब और अच्छी होती है. चंद्रमा की स्थिति को सही करने के लिए एकादशी का व्रत रखा जाता है. एकादशी व्रत का प्रभाव मन और शरीर दोनों पर पड़ता है. एकादशी व्रत से ग्रहों की ख़राब स्थिति के कारण पड़ने वाले दुष्प्रभाव को भी रोका जा सकता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>बरुथिनी</strong> <strong>एकादशी</strong><strong> 2021 </strong><strong>शुभ</strong> <strong>मुहूर्त</strong><strong>: </strong></p> <p style="text-align: justify;">हिंदू पंचांग के अनुसार, वरूथिनी एकादशी तिथि 06 मई को दोपहर 02 बजकर 10 मिनट से 07 मई की शाम 03 बजकर 32 मिनट तक रहेगी. एकादशी का व्रत उदया तिथि के चलते 7 मई को रखा जाएगा. इसका पारण 08 मई को सुबह 05 बजकर 35 मिनट से सुबह 08 बजकर 16 मिनट तक रहेगी.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>वरूथिनी</strong> <strong>एकादशी</strong> <strong>की</strong> <strong>पूजा</strong> <strong>विधि</strong></p> <p style="text-align: justify;">एकादशी के दिन व्रत करने वाले व्यक्ति को सुबह उठकर जल्द ही नित्यकर्म से निवृत होकर, स्नानादि करके साफ़ कपड़ा पहन लेना चाहिए. इसके बाद पूजा स्थल पर बैठकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए. व्रत को फलाहारी रखना चाहिए. पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित कर जलाभिषेक करें. &nbsp;इसके बाद उनको पीले पुष्प, अक्षत्, धूप, दीप, गंध, तुलसी का पत्ता, चरणामृत आदि भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करें. इसके बाद हाथ जोड़कर, विष्णु चालीसा, विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें. इसके बाद वरुथिनी एकादशी व्रत की कथा का पाठ करें. उसका श्रवण करें. अंत में भगवान विष्णु की आरती करके प्रसाद का वितरण करें. व्रत धारी को पूरे दिन उपवास रखन चाहिए. इस दौरान किसी प्रकार का कोई अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए.</p> <div class="uk-grid-collapse uk-grid" style="text-align: justify;"> <div class="uk-width-3-5 fz20 p-10 newsList_ht uk-first-column"><a href="https://ift.tt/3h8Hx3G Puja: अगर आता है बहुत ज्यादा गुस्सा तो मंगलवार को हनुमान जी के इन उपायों से होगा लाभ</strong></a></div> <div class="uk-width-2-5 uk-position-relative uk-padding-remove-left">&nbsp;</div> </div> <p style="text-align: justify;"><strong>वरूथिनी</strong> <strong>एकादशी</strong> <strong>व्रत</strong> <strong>की</strong> <strong>महिमा</strong><strong>: </strong>वैसे तो व्रतों में एकादशी व्रत का बहुत ऊंचा स्थान है. इस व्रत से व्रती के कष्ट मिटते हैं, पापों का नाश होता है, मोक्ष की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इसके अतिरिक्त विभिन्न एकादशी का भी अलग &ndash; अलग महिमा होती है. &nbsp;इस एकादशी के व्रत से व्यक्ति को सर्वदा समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है.</p> <p style="text-align: justify;">इस दिन भगवान मदुसूदन के स्वरूप की उपासना की जाती है. इस व्रत में रात्रि में जागरण किया जता है इससे मंगल ही मंगल होताहै. इस दिन श्री वल्लभाचार्य का जन्म भी हुआ था. इससे इस एकादशी की महिमा और बढ़ जाती है. पुष्टिमार्गीय वैष्णवों के लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है.</p> <div class="uk-grid-collapse uk-grid"> <div class="uk-width-3-5 fz20 p-10 newsList_ht uk-first-column" style="text-align: justify;"><a href="https://ift.tt/33kA1ug Shivratri May 2021: इस दिन है मासिक शिवरात्रि, बन रहें हैं ये दो शुभ योग, जानें किस शुभ मुहूर्त में करें शिव की पूजा</strong></a></div> <div class="uk-width-2-5 uk-position-relative uk-padding-remove-left" style="text-align: justify;">&nbsp;</div> </div> lifestyle https://ift.tt/3f3JrQn