Thursday, April 29, 2021
क्या रेमडेसिविर के साथ हेपेटाइटिस सी की दवाओं का मेल कोविड-19 के खिलाफ कारगर है? जानें
<p style="text-align: justify;">भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच एंटी वायरल दवा रेमडेसिविर बहुत ज्यादा मांग में है. कोविड-19 में बढ़ोतरी और दवा की कमी के मद्देनजर स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि रेमडेसिविर जीवन-रक्षक दवा नहीं है और उसका कोविड-19 मरीजों पर 'गैर जरूरी या अतार्किक' इस्तेमाल अनैतिक है. उसने चेताया कि दवा की सलाह सिर्फ उन कोविड-19 मरीजों को दी जाती है जो सिर्फ मध्यम से गंभीर बीमार हैं और ऑक्सीजन सपोर्ट हासिल कर रहे हैं.</p> <p style="text-align: justify;">रिसर्च में खुलासा हुआ है कि दवा कोरोना वायरस मरीजों में मृत्यु दर को कम नहीं करती है. लेकिन वर्तमान में कोविड-19 की दवा की अनुपलब्धता के कारण डॉक्टर उसे भारत में तेजी से लिख रहे हैं. एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया भी कह चुके हैं कि दवा 'रामबाण' नहीं है और मृत्यु दर कम नहीं करती. लेकिन उन्होंने बताया कि उसका इस्तेमाल किया जा सकता है क्योंकि हमारे पास एक बहुत अच्छी एंटी वायरल दवा नहीं है. उन्होंने चेताया भी है कि रेमडिसिविर की सीमित भूमिका है और उसे सावधानी से इस्तेमाल किया जाना चाहिए. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>हेपेटाइटिस सी की दवा के साथ रेमडेसिविर का असर बढ़ता है </strong></p> <p style="text-align: justify;">अब, एक नए रिसर्च में अमेरिकी शोधकर्ताओं ने पाया कि हेपेटाइटिस वायरस की चार दवा के साथ रेमडिसिविर के मेल ने कोविड-19 के खिलाफ मजबूत असर दिखाया. मूल रूप से रेमडेसिविर एक दशक पहले हेपेटाइटिस सी और सर्दी जुकाम जैसे वायरस यानी रेस्पिरेटरी सिंसिशीयल वायरस की बीमारी का इलाज करने के लिए विकसित की गई थी. उसे इबोला के मरीजों के लिए भी प्रभावी और सुरक्षित पाया गया था. शुरुआत में उसे कोवड-19 के लिए अच्छी थेरेपी के तौर पर देखा गया लेकिन रिसर्च में उसके इस्तेमाल का स्पष्ट फायदा नहीं पाया गया. फिर भी, रेमडेसिविर कोविड-19 के मरीजों का इलाज करने के लिए इस्तेमाल की जाती है, यहां तक कि अमेरिका में भी.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>हेपेटाइटिस सी की चारों दवा मुंह के जरिए खाई जानेवाली हैं</strong></p> <p style="text-align: justify;">अमेरिकी शोधकर्ताओं ने हेपेटाइटिस सी की चार दवा के साथ रेमडेसिविर को मिलाने पर असर 10 गुना बढ़ानेवाला पाया, ये चारों ओरल दवा हैं जबकि रेमडिसिविर नस के जरिए इंजेक्ट की जाती है. शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि मेल के साथ रेमडेसिविर का इस्तेमाल कोविड-19 के इलाज में उन कोविड-19 मरीजों के लिए परिवर्तनकारी हो सकती है जिनका टीकाकरण नहीं किया गया है और उसी तरह डोज इस्तेमाल कर चुके लोगों के लिए जिनकी इम्यूनिटी वायरस के वेरिएन्ट्स उजागर होने के कारण कम हो गई है. दवाओं का परीक्षण बंदरों पर किया गया था. लेकिन चूंकि ये हेपेटाइटिस सी की दवा को पहले ही इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिल चुकी है और उसके संभावित साइड-इफेक्ट्स मालूम हैं, इसलिए शोधकर्ताओं का कहना है कि संयोजन चिकित्सा का परीक्षण एक नई दवा के मुकाबले इंसानों पर ज्यादा तेजी से किया जा सकता है. उनकी रिसर्च के नतीजे सेल रिपोर्ट्स में प्रकाशित हुए.</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="वैक्सीन लगवा चुके 65 और उससे ज्यादा उम्र वालों को अस्पताल में भर्ती होने खतरा कम" href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/vaccinated-adults-65-and-older-94-less-likely-to-be-hospitalized-with-covid-19-says-cdc-1907149">वैक्सीन लगवा चुके 65 और उससे ज्यादा उम्र वालों को अस्पताल में भर्ती होने खतरा कम</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Heart Health: दिल को लेकर ना बरतें लापरवाही, जानिए इसकी अच्छी सेहत के कुछ कारगर टिप्स" href="https://ift.tt/3t6iGj8 Health: दिल को लेकर ना बरतें लापरवाही, जानिए इसकी अच्छी सेहत के कुछ कारगर टिप्स</a></strong><br />-</p> lifestyle https://ift.tt/2PwBvOH
क्या आप कोरोना पॉजिटिव की देखभाल घर पर कर रहे हैं ? जानिए होम आईसोलेशन से जुड़े खास टिप्स
<p style="text-align: justify;">ज्यादातर लोग जो कोविड-19 से बीमार पड़ते हैं, उन्हें सिर्फ हल्के लक्षण का अनुभव होगा और घर पर ठीक हो सकते हैं. लक्षण कुछ दिनों तक रह सकते हैं, और लोग जो वायरस से पीड़ित हैं, करीब एक सप्ताह में बेहतर महसूस कर सकते हैं. इलाज का उद्देश्य लक्षणों से राहत होता है और आराम, तरल पदार्थों का सेवन और दर्द निवारक शामिल है. हालांकि, मौजूदा मेडिकल स्थिति वाले किसी भी उम्र के बुजुर्गों को चाहिए कि जैसे ही लक्षण शुरू हो, अपने डॉक्टर से मिलें. ये फैक्टर कोविड-19 से गंभीर रूप से बीमार पड़ने के खतरे को ज्यादा बढ़ा सकते हैं.</p> <p style="text-align: justify;"><br /><strong>कोविड-19 मरीज की देखभाल करते हुए खुद की सुरक्षा</strong></p> <p style="text-align: justify;">विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमेरिकी संस्था सीडीसी ने की सिफारिश है कि कोविड-19 पॉजिटिव परिजन की देखभाल करते हुए खुद को कैसे सुरक्षित रखें. अपने हाथों को साफ रखें और अपने चेहरे को दूर रखें- कम से कम 20 सेंकड तक पानी और साबुन से अपने हाथों को बार-बार धोएं, खासकर बीमार शख्स के संपर्क में आने के बाद या एक ही रूम में होने पर. साबुन और पानी उपलब्ध नहीं होने की सूरत में हैंड सेनेटाइजर का इस्तेमाल करें जिसमें कम से कम 60 फीसद अल्कोहल की मात्रा हो. अपनी नाक, आंख और मुंह को छूने से परहेज करें.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>फेस मास्क पहनें-</strong> अगर आपको एक ही रूम में बीमार शख्स के साथ रहने की जरूरत पड़े और वो फेस मास्क पहनने में सक्षम नहीं है, तो फेस मास्क पहनें. कम से कम छह फीट यानी दो मीटर की दूरी पर बीमार शख्स से रहें. मास्क के गंदा या गीला होने पर उसे साफ और सूखे मास्क से बदल दें. इस्तेमाल किए हुए मास्क को फेंक दें और अपने हाथों को धोएं. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>अपने घर की निरंतर सफाई करें-</strong> रोजाना घर की सफाई में काम आने स्प्रे या वाइप्स का सतह साफ करने के लिए इस्तेमाल करें. टैबलेट, दरवाजे का हैंडल, काउंडर को अक्सर बार-बार छूआ जाता है. बीमार शख्स के अलग रूम और बाथरूम की सफाई से बचें. बिस्तर और खाने-पीने के बर्तनों को सिर्फ बीमार शख्स के इस्तेमाल के लिए किनारे कर दें. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>कपड़े धोने के साथ सावधान रहें-</strong> धुलाई के गंदे कपड़ों को हिलाए नहीं. सामान्य साबुन का इस्तेमाल बीमार शख्स के कपड़े धोने के लिए करें. बीमार शख्स के कपड़ों की तह लगाते वक्त डिस्पोजेबल ग्लोव्स पहनें और सामग्रियों को अपने शरीर से दूर रखें. ग्लोव्स हटाने के बाद अपने हाथों को धोएं. गंदे मास्क और ग्लोव्स को बीमार शख्स के कमरे में रखे डस्टबीन में डाल दें. <br /><strong>खाने-पीने के बर्तनों के साथ सावधानी-</strong> कोरोना पॉजिटिव शख्स के बर्तन, कप, डिश को संभालते वक्त ग्लोव्स पहनें. सामान को साबुन और गर्म पानी से धोएं. इस्तेमाल किए हुए सामानों की देखभाल करते या ग्लोव्स उतारने के बाद हाथों को साफ करें. </p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Heart Health: दिल को लेकर ना बरतें लापरवाही, जानिए इसकी अच्छी सेहत के कुछ कारगर टिप्स" href="https://ift.tt/3t6iGj8 Health: दिल को लेकर ना बरतें लापरवाही, जानिए इसकी अच्छी सेहत के कुछ कारगर टिप्स</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="ऑस्ट्रेलिया के मशहूर शेफ ने छोले भटूरा खाते हुए शेयर की तस्वीर, भारत के संकट पर कही ये बात" href="https://www.abplive.com/lifestyle/food/australian-masterchef-shares-picture-of-eating-chole-bhature-expressed-concern-over-crisis-1907096">ऑस्ट्रेलिया के मशहूर शेफ ने छोले भटूरा खाते हुए शेयर की तस्वीर, भारत के संकट पर कही ये बात</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3aN5GIZ
Sankashti Chaturthi: कल है विकट संकष्टी चतुर्थी, संतान प्राप्ति के लिए इस दिन करें गणेश जी की पूजा, जानें डेट, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
<p style="text-align: justify;"><strong>Sankashti Chaturthi 2021: </strong>वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी/ विकट संकष्टी चतुर्थी कहते है. इस साल यह 30 अप्रैल 2021, दिन शुक्रवार को पड़ रही है. इस दिन गणपति की विधि-विधान से पूजा की जाती है. इस चतुर्थी को संकट हरने वाली चतुर्थी भी कहते हैं. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गणेश भगवान की विधि विधान से पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>विकट</strong> <strong>संकष्टी</strong> <strong>चतुर्थी</strong> <strong>2021 </strong><strong>शुभ</strong> <strong>मुहूर्त</strong><strong> (</strong><strong>Vikata Sankashti Chaturthi 2021 Shubh Muhurat)</strong></p> <ul style="text-align: justify;"> <li><strong>विकट</strong> <strong>संकष्टी</strong> <strong>चतुर्थी</strong><strong> -</strong>30 अप्रैल 2021, शुक्रवार को</li> <li><strong>विकट</strong> <strong>संकष्टी</strong> <strong>चतुर्थी</strong> <strong>के</strong> <strong>दिन</strong> <strong>चन्द्रोदय</strong> <strong>का</strong> <strong>समय</strong> – 10:48 रात</li> <li><strong>चतुर्थी</strong> <strong>तिथि</strong> <strong>के</strong> <strong>दौरान</strong> <strong>कोई</strong> <strong>चन्द्रोदय</strong> <strong>नहीं</strong> <strong>है</strong><strong>.</strong></li> <li><strong>चतुर्थी</strong> <strong>तिथि</strong> <strong>प्रारम्भ</strong> <strong>– </strong>29 अप्रैल 2021 को रात 10:09 बजे</li> <li><strong>चतुर्थी</strong> <strong>तिथि</strong> <strong>समाप्त</strong> <strong>– </strong>30 अप्रैल 2021 को शाम 07:09 बजे</li> </ul> <div class="uk-grid-collapse uk-grid" style="text-align: justify;"> <div class="uk-width-3-5 fz20 p-10 newsList_ht uk-first-column"><a href="https://ift.tt/3ntwEdQ Puja 2021: बुधवार के दिन शुभ मुहूर्त में ऐसे करें श्री गणेश की पूजा, जानें पूजा विधि एवं लाभ</strong></a></div> <div class="uk-width-2-5 uk-position-relative uk-padding-remove-left"> </div> </div> <p style="text-align: justify;"><strong>संकष्टी</strong> <strong>चतुर्थी</strong> <strong>की</strong> <strong>पूजा</strong> <strong>विधि</strong></p> <p style="text-align: justify;">संकष्टी चतुर्थी के दिन भक्त को सुबह उठकर नित्यकर्म, स्नानादि करके पूजा स्थल पर बैठ जाना चाहिए. पूजा की चौकी पर भगवान गनेश की प्रतिमा स्थापित कर उन्हें दूर्वा अर्पित करें. उसके बाद दीपक आदि जलाकर पुष्प, अक्षत आदि अर्पित करें. अब व्रत का संकल्प लें. गणेश जी को भोग लगाएं. गणेश जी को मोदक प्रिय होते हैं, आप इस दिन भगवान गणेश को मोदक का भोग भी लगा सकते हैं. ॐ गणेशाय नमः या ॐ गं गणपते नमः का 108 बार जाप करें. इस व्रत में शाम को चंद्र दर्शन जरूर किया जाता है अगले दिन गणेश भगवान का पूजा पाठ करके व्रत का पारण करें.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>संकष्टी</strong> <strong>चतुर्थी</strong> <strong>व्रत</strong> <strong>का</strong> <strong>महत्व</strong><strong>: </strong></p> <p style="text-align: justify;">धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश जी की पूजा- अर्चना करने से व्यक्ति की सभी प्रकार की बाधाएं दूर हो जाती हैं. शास्त्रों में भगवान गणपति को विघ्नहर्ता की संज्ञा दी गई है. ये अपने भक्तों की सभी आपदाओं का संहार करते हैं. अपने भक्तों के जीवन में जो भी विघ्न –बाधा आते हैं उन्हें वे हर लेते हैं एवं उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. इस दिन भगवान गणेश की आराधना करने से गणेश जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और इस दिन भगवान गणेश की आराधना करने से निसंतान दंपतियों को पुत्र की प्राप्ति होती है. चन्द्र दर्शन भी चतुर्थी के दिन बहुत शुभ माना जाता है. सूर्योदय से प्रारम्भ होने वाला यह व्रत चंद्र दर्शन के बाद संपन्न होता है.</p> <div class="uk-grid-collapse uk-grid"> <div class="uk-width-3-5 fz20 p-10 newsList_ht uk-first-column" style="text-align: justify;"><a href="https://ift.tt/3u25m0F 2021: 28 अप्रैल से वैशाख महीने की शुरुआत, इन कार्यों को करने से प्रसन्न होंगे ब्रह्मा, विष्णु और महेश</strong></a></div> <div class="uk-width-2-5 uk-position-relative uk-padding-remove-left" style="text-align: justify;"> </div> </div> lifestyle https://ift.tt/3aPoJSV
वैक्सीन लगवा चुके 65 और उससे ज्यादा उम्र वालों को अस्पताल में भर्ती होने खतरा कम
<p style="text-align: justify;">कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ टीकाकरण में शामिल फाइजर-बायोएनटेक और मॉडर्ना की वैक्सीन बुजुर्गों के बीच अस्पताल में भर्ती होने की रोकथाम में अत्यंत प्रभावी हैं. बुधवार को जारी रिसर्च के मुताबिक, इस ग्रुप को गंभीर बीमारी और मौत का सबसे ज्यादा खतरा होता है. सेंटर फोर डिजीज एंड कंट्रोल ने कहा कि नतीजे पहली बार वास्तविक सबूत को आश्वस्त कर रहे हैं कि अमेरिका में दोनों वैक्सीन कोविड-19 के गंभीर लक्षण को रोक पाने में सफल रहीं जैसा उन्होंने मानव परीक्षण के दौरान असर दिखाया था.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>65 साल या ज्यादा उम्र वालों को अस्पताल में भर्ती होने की कम जरूरत</strong></p> <p style="text-align: justify;">सीडीसी के मुताबिक, रिसर्च के दौरान 65 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों को कोविड-19 वैक्सीन के दोनों डोज लगाए गए, उनको कोविड-19 के कारण एक ही आयु ग्रुप के अन्य लोगों की तुलना में कम अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ी. जिन लोगों का आंशिक रूप से टीकाकरण किया गया, उनको डोज नहीं लगवाने वालों के मुकाबले बीमारी से 64 फीसद कम अस्पताल में भर्ती होने की संभावना थी.</p> <p style="text-align: justify;">गंभीर बीमारी का खतरा उम्र के साथ बढ़ता है, क्योंकि बुजुर्गों को सबसे ज्यादा जोखिम होता है. सीडीसी ने टीकाकरण के लिए उनको प्राथमिकता दी थी. डेटा से पता चलता है कि अमेरिका में 65 साल और उससे ज्यादा उम्र के 68 फीसद यानी 37 मिलियन से ज्यादा लोगों ने डोज के दोनों खुराक लगवा लिए हैं. नए रिसर्च से खुलासा हुआ कि अस्पताल में भर्ती होने का खतरा स्पष्ट तौर पर फाइजर-बायोएनटेक या मॉडर्ना की वैक्सीन का दूसरा डोज लेने के बाद कम हो गया.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>सीडीसी ने बताया कोविड-19 से अस्पताल में भर्ती होने का खतरा</strong></p> <p style="text-align: justify;">नतीजे सीडीसी की मोर्बिडिटी एंड मोर्टेलिटी वीकली रिपोर्ट में प्रकाशित हए हैं. सीडीसी डायरेक्टर रशेल वालसिंकी ने बयान में कहा, "ये खोज हौसला बढ़ानेवाली है दो तिहाई आबादी के लिए स्वागत योग्य खबर है कि 65 साल और ऊपर के लोगों ने पहले ही पूरा डोज इस्तेमाल कर लिया है."</p> <p style="text-align: justify;">ये रिसर्च खुद को इजराइल में किए गए रिसर्च से अलग करता है जिसमें समान नतीजे उजागर हुए थे, लेकिन सिर्फ फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन के असर को देखा गया. भारत बंद दरवाजों के पीछे भी लोगों से मास्क पहनने की अपील कर रहा है, इस बीच सीडीसी ने 27 अप्रैल को नया गाइडलान्स जारी किया था, ये कहते हुए कि जिन लोगों का पूरी तरह देश में टीकाकरण हो चुका है, वो बाहरी और अंदरुनी सरगर्मियों के दौरान मास्क पहनना रोक सकते हैं. </p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="Heart Health: दिल को लेकर ना बरतें लापरवाही, जानिए इसकी अच्छी सेहत के कुछ कारगर टिप्स" href="https://ift.tt/3t6iGj8 Health: दिल को लेकर ना बरतें लापरवाही, जानिए इसकी अच्छी सेहत के कुछ कारगर टिप्स</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong><a title="कोरोना पॉजिटिव महिला ने स्वस्थ जुड़वां बच्चों को दिया जन्म, जानिए ऐसे ब्रेस्टफीडिंग के वक्त क्या एहतियात रखें" href="https://www.abplive.com/lifestyle/corona-positive-pregnant-woman-delivers-healthy-twins-know-breastfeeding-precautions-1907131">कोरोना पॉजिटिव महिला ने स्वस्थ जुड़वां बच्चों को दिया जन्म, जानिए ऐसे ब्रेस्टफीडिंग के वक्त क्या एहतियात रखें</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3ntQC8j
Vaishakh Purnima 2021: कब है वैशाख पूर्णिमा? व्रत करने से दूर होगी दरिद्रता और दुख, जानें पूजा विधि और व्रत का महत्त्व
<p style="text-align: justify;"><strong>Vaishakh Purnima 2021 Importance </strong><strong>Buddha Purnima: </strong>हिंदू धर्म में वैसे तो हर मास की पूर्णिमा का महत्त्व होता है. परन्तु वैशाख मास की पूर्णिमा का महत्त्व कुछ और अधिक ही है. इस बार इस पूर्णिमा पर इस साल का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है. इससे इसका अपना अलग ही महत्त्व है. पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान किये जाने का प्रावधान है.</p> <p style="text-align: justify;">हिंदू धर्म के अनुसार, वैशाख मास धार्मिक दृष्टि से हर महीनों में उत्तम मास माना गया है. इस मास की पूर्णिमा तिथि को गंगा स्नान, दान, पुण्य और व्रत करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है. चूंकि इस बार कोरोना वायरस के संक्रमण का प्रसार फिर से तेजी से हो रहा है. इस लिए भक्तों को घर पर ही गंगा जल मिलाकर स्नान करना चाहिए. इस पूर्णिमा को सिद्ध विनायक पूर्णिमा और सत्य विनायाक पूर्णिमा कहते है. वैशाख पूर्णिमा की तिथि के दिन ही महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था. इस लिए इसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहते है. इसी तिथि को महात्मा बुद्ध को बोधिसत्व की प्राप्ति भी हुई थी. इसी तिथि को उनका महानिर्वाण भी हुआ था. </p> <div class="uk-grid-collapse uk-grid" style="text-align: justify;"> <div class="uk-width-3-5 fz20 p-10 newsList_ht uk-first-column"><a href="https://www.abplive.com/lifestyle/religion/food-oil-do-not-eat-veg-oil-in-month-of-vaishakh-it-is-harmfull-to-health-1906907"><strong>वैशाख महीने में न करें वनस्पति तेलों का सेवन, बेल से होगा सेहत को फायदा</strong></a></div> <div class="uk-width-2-5 uk-position-relative uk-padding-remove-left"> </div> </div> <p style="text-align: justify;"><strong>वैशाख</strong> <strong>पूर्णिमा</strong> <strong>की</strong> <strong>डेट</strong></p> <p style="text-align: justify;">हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल 26 मई 2021 को वैशाख पूर्णिमा है. इसी दिन इस साल {2021} का पहला चंद्र ग्रहण भी लगने जा रहा है. यह ग्रहण संपूर्ण भारत में नहीं दिखाई देगा. जिसके चलते इसका प्रभाव भी संपूर्ण भारत में नहीं पड़ेगा.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>वैशाख पूर्णिमा का महत्व</strong></p> <p style="text-align: justify;">ऐसी मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण ने वैशाख पूर्णिमा का महत्त्व अपने परम-मित्र सुदामा को उस समय बताया था. जब वे द्वारिका पहुंचे थे. श्री कृष्ण जी के बताने के अनुसार, सुदामाजी ने व्रत किया. इससे उनकी दरिद्रता और दुःख दूर हो गए थे. इससे वैशाख पूर्णिमा का महत्त्व और बढ़ जाता है. </p> <p style="text-align: justify;">वैशाख पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा- अर्चना का विधान है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति हो जाती है. इस दिन व्रत करने से सुख- समृद्धि में वृद्धि होती है. वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध जयंती के रूप में भी मनाया जाता है.</p> <div class="uk-grid-collapse uk-grid"> <div class="uk-width-3-5 fz20 p-10 newsList_ht uk-first-column" style="text-align: justify;"><a href="https://ift.tt/3u2iIKf Month: आज से शुरू है वैशाख माह, जानें महर्षि नारद ने क्या बताया इस माह का महत्व</strong></a></div> <div class="uk-width-2-5 uk-position-relative uk-padding-remove-left" style="text-align: justify;"> </div> </div> lifestyle https://ift.tt/3sZL3Q8
Heart Health: दिल को लेकर ना बरतें लापरवाही, जानिए इसकी अच्छी सेहत के कुछ कारगर टिप्स
दिल की देखभाल करना महत्वपूर्ण है क्योंकि ये शरीर में सबसे अहम अंगों में से एक है. ये दिल ही है जो हमें अन्य अंगों तक रक्त प्रवाह कर जीवित रखता है. दिल की बीमारियों की घटना प्रमुख रूप से पिछले कुछ वर्षों में बढ़ गई है. उसके पीछे डायबिटीज, हाइपरटेंशन, अस्वस्थ डाइट, मोटापा, सुस्त जीवनशैली और अल्कोहल, तंबाकू का सेवन जोखिम के तौर पर उभरे हैं. इसलिए जरूरी है कि तत्काल सक्रिय हुआ जाए अपनी जीवनशैली में बदलाव लाएं, जिससे दिल की बीमारियों के बोझ को कम किया जा सके.
आपको जरूर स्वस्थ दिल वाली जीवनशैली बिताना चाहिए क्योंकि स्वस्थ दिल के फायदे का आपके संपूर्ण स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है. मजबूत दिल के होने से कई पुरानी स्थितियों से जुड़ी पेचीदगियों के खिलाफ सुरक्षा मिल सकती है. हालांकि, उम्र दिल के रोग का एक बुनियादी जोखिम कारक रहा है, हर साल ज्यादा से ज्यादा युवाओं में बदलती जीवनशैली के कारण दिल की बीमारी के मामले उजागर हो रहे हैं. इसलिए, महत्वपूर्ण है कि जिंदगी की शुरुआत से बाद के चरण में विपत्तियों को रोकने के लिए दिल की देखभाल शुरू की जाए. फूड के स्वस्थ विकल्प बनाना
रोजाना के भोजन में साबुत अनाज का कम से कम एक प्रकार जैसे बाजरा और अनाज की सिफारिश की जाती है.ओमेगा-3 चिया बीज और अलसी ओमेगा-3 के सबसे अच्छे स्रोत ह रोजाना की डाइट में हरी सब्जियों को ज्यादा शामिल करें क्योंकि ये विटामिन्स और मिनरल्स, विशेषकर दिल के अनुकूल विटामिन K के स्रोत हैं. खाना बनाने के लिए जैतून और सरसों तेल का इस्तेमाल करें क्योंकि उनमें स्वस्थ फैट्स होते हैं, जो दिल के लिए अच्छा है. भर पानी पीने के अलावा, खुद को अन्य स्वस्थ ड्रिंक्स जैसे नारियल पानी, नींबू पानी, स्मूदी और कम नमक और शुगर की मात्रा का इस्तेमाल करते हुए घर पर तैयार ड्रिंक्स से खुद को हाइ़ड्रेटेड रखें धममियों में पट्टिका के खतरे को कम कर सकता है जो रक्त प्रवाह को कम करता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, सिफारिश की जाती है कि कम से कम हर सप्ताह 150-300 मिनट शारीरिक गतिविधि को अंजाम दें. का प्रबंधन हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है. तनाव का संबंध अक्सर हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ता है और शरीर को तनाव के ऊंचे स्तर तक उजागर करता है. सांस लेने का व्यायाम और मेडिटेशन तनाव के प्रबंधन में मदद कर सकता है. ब्लड प्रेशर को काबू करना हाई ब्लड प्रेशर एक आम बीमारी है और दिल की बीमारियों का एक प्रमुख कारण जैसे हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर है. आपको ब्लड प्रेशर पर निरंतर निगरानी रखनी होगी और हाइपरटेंशन कम करने में मददगार डाइट को खाना चाहिए"
कोरोना वायरस: बीते 10 दिनों में नारियल पानी के दाम में हुआ दो गुना इज़ाफा, जानें क्या हैं इसके फायदे
"ऑस्ट्रेलिया के मशहूर शेफ ने छोले भटूरा खाते हुए शेयर की तस्वीर, भारत के संकट पर कही ये बात
कोरोना पॉजिटिव महिला ने स्वस्थ जुड़वां बच्चों को दिया जन्म, जानिए ऐसे ब्रेस्टफीडिंग के वक्त क्या एहतियात रखें
<p style="text-align: justify;">संभल के चंदौसी कोरोना वायरस कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर में कोरोना पॉजिटिव महिला ने सफलतापूर्क जुड़वां बच्चों को जन्म दिया है. तीन डॉक्टरों की एक टीम ने कहा, "26 वर्षीय महिला को अस्पताल के इमरजेंसी यूनिट में अस्वस्थ ऑक्सीजन लेवल 87 होने पर सोमवार को भर्ती कराया गया था और स्थिति को देखते हुए उसे ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया. मंगलवार को उसे प्रसव पीड़ा हुआ और विशेष रूप से तैयार किए गए 'लेबर रूम' में जुड़वां को जन्म दिया."</p> <p style="text-align: justify;">नरौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सेवा देनेवाले डॉक्टर खिलेंद्र सक्सेना बताते हैं, "डॉक्टरों ने महिला का इलाज किया. कोविड-19 गाइडलाइन्स और सभी एहतियाती उपायों को डिलीवरी के समय इमरजेंसी रूम में अपनाया गया. उसने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया. पहला बच्चा स्वस्थ और सामान्य था. कुछ मिनट देर से पैदा हुए दूसरे नवजात को शुरुआत में थोड़ा सांस की कठिनाई थी और ऑक्सीजन दिया गया लेकिन उसकी हालत सुधर गई. दोनों नवजात शिशु अब स्वस्थ और कोविड-19 से मुक्त हैं."</p> <p style="text-align: justify;"><strong>क्या मां से नवजात को कोविड-19 की बीमारी हो सकती है?</strong></p> <p style="text-align: justify;">इस सवाल का जवाब अभी भी अज्ञात है. हालांकि, संभल में कोविड-19 के नोडल ऑफिसर डॉक्टर मनोज जूनाबाई के मुताबिक, ये जरूरी नहीं है कि अगर मां कोरोना पॉजिटिव है, तो उसका बच्चा भी पॉजिटिव होगा. लेकिन एहतियाती उपाय के तौर पर दो दिन बाद बच्चों का फिर से कोरोना जांच कराया जाएगा. अब तक, हम लोग नवजात शिशु और कोरोना पॉजिटिव मां को एक दूसरे से अलग रख रहे हैं. </p> <p style="text-align: justify;"><strong>क्या कोरोना पॉजिटिव मां अपने बच्चे को छू और पकड़ सकती है?</strong></p> <p style="text-align: justify;">इसका जवाब हां में है. आपमें कोरोना पॉजिटिव की पुष्टि होने के बाद भी अपने नवजात को छू सकती हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि उचित उपाय किए जाने चाहिए. लेकिन सवाल ये है कि उचित उपाय क्या हैं?</p> <ol> <li>अपने नवजात शिशु को सुरक्षित रूप से स्तनपान कराएं</li> <li>बच्चे को स्तनपान कराते समय एक मेडिकल मास्क को पहनें</li> <li>स्तनपान कराने से पहले अल्कोहल युक्त हैंड सेनेटाइजर से हाथों को धोएं</li> <li>सुनिश्चित करें कि अपने और अपने बच्चे के आसपास साफ-सफाई रखें </li> </ol> <p><strong>नवजात को लेकर घर जाने के बाद कोरोना पॉजिटिव मां क्या करे?</strong></p> <p>अस्पताल से घर वापसी पर उचित देखभाल करना चाहिए. कमरा परिवार के किसी अन्य सदस्य के साथ शेयर नहीं करें. महामारी गाइडलाइन्स के पालन को सुनिश्चित करें और कुछ दिनों तक बाहर न निकलें जब तक कि लक्षण खत्म न हो जाएं. अपने लक्षणों पर करीबी निगाह रखें ताकि आनेवाली गैर जरूरी समस्याजनक स्थितियों को दूर किया जा सके. </p> <p><strong><a title="कोरोना वायरस: बीते 10 दिनों में नारियल पानी के दाम में हुआ दो गुना इज़ाफा, जानें क्या हैं इसके फायदे" href="https://www.abplive.com/news/india/coronavirus-coconut-water-prices-have-doubled-in-last-10-days-know-what-are-its-benefits-ann-1907038">कोरोना वायरस: बीते 10 दिनों में नारियल पानी के दाम में हुआ दो गुना इज़ाफा, जानें क्या हैं इसके फायदे</a></strong></p> <p><strong><a title="उम्र बढ़ने के साथ शरीर को फिट रखना है जरूरी, युवाओं जैसी एनर्जी पाने के लिए अपनाएं ये तरीका" href="https://www.abplive.com/health-and-fitness/health-tips-feeling-low-energy-with-tiredness-on-aging-6-ways-to-energize-like-a-young-man-1906897">उम्र बढ़ने के साथ शरीर को फिट रखना है जरूरी, युवाओं जैसी एनर्जी पाने के लिए अपनाएं ये तरीका</a></strong></p> lifestyle https://ift.tt/3xukvtE
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